हनुमान थापा: 19000 फीट की ऊंचाई पर 25 फीट बर्फ में दबकर मौत को 6 दिन तक मात देने वाला शूरवीर

Published : Feb 11, 2021, 08:57 PM IST
हनुमान थापा: 19000 फीट की ऊंचाई पर 25 फीट बर्फ में दबकर मौत को 6 दिन तक मात देने वाला शूरवीर

सार

सियाचिन दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र के साथ साथ घातक भी है। माइनस में तापमान, कठोक इलाके और शत्रुतापूर्ण पड़ोसी इस इलाके को भारतीय सुरक्षाबलों के लिए और भी चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। इन सब प्रतिकूल परिस्थियों के बावजूद भारतीय सुरक्षाबल दृढ़ होकर सियाचिन में तैनात रहकर वीरता के साथ अपनी जान न्योछावर कर भारतीय सीमा और संप्रभुता की रक्षा करते हैं। इन्हीं में से एक थे वीर लांस नायक हनुमान थापा। 

नई दिल्ली. सियाचिन दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र के साथ साथ घातक भी है। माइनस में तापमान, कठोक इलाके और शत्रुतापूर्ण पड़ोसी इस इलाके को भारतीय सुरक्षाबलों के लिए और भी चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। इन सब प्रतिकूल परिस्थियों के बावजूद भारतीय सुरक्षाबल दृढ़ होकर सियाचिन में तैनात रहकर वीरता के साथ अपनी जान न्योछावर कर भारतीय सीमा और संप्रभुता की रक्षा करते हैं। इन्हीं में से एक थे वीर लांस नायक हनुमान थापा। 

सेना में अपने 13 साल के करियर के दौरान, लांस नायक हनुमान थापा ने विभिन्न पोस्टों पर अपनी सेवा दी। वे 2003-06 तक जम्मू-कश्मीर में तैनात थे, जहां उन्होंने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में हिस्सा लिया। इसके बाद वे 2008 से 2010 तक जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स में तनात रहे। इसके बाद वे 2010-12 तक नॉर्थ इंडिया में तैनात रहे, जहां उन्होंने घुसपैठियों के खिलाफ अभियानों में हिस्सा लिया। 

इसके बाद अगस्त 2015 में उनकी सियाचिन में पोस्टिंग हुई। लांस नाइक हनुमान थापा को 'मिरेकल मैन' के नाम से भी जाना जाता है। वे सियाचिन में 19600 फीट पर अपनी पोस्ट पर तैनात थे। हिमस्खलन के बाद 6 दिन तक बर्फ में फंसे रहने के बाद उनका रेस्क्यू किया गया। 

जब पूरे देश ने मांगी उनके लिए दुआएं
हनुमान हर रोज की तरह ही 3 फरवरी 2016 को भी सीमा की सुरक्षा में तैनात थे। तभी एक हिम्स्खलन में वे और 9 जवान 25 फीट गहरी बर्फ में दब गए। इसके बाद आर्मी ने जवानों को खोज निकालने के लिए बड़ा रेस्क्यू अभियान चलाया। लेकिन लांस नायक हनुमान थापा को खोजने में 6 दिन लग गए। 

लेकिन खास बात ये रही कि हनुमान थापा इन 6 दिनों तक मौत से जंग लड़ते हुए जिंदा रहे। इसके बाद उन्हें दिल्ली से मिलिट्री हॉस्पिटल में इलाज के लिए लाया गया। पूरे देश ने हनुमान थापा के जल्द ठीक होने की कामना की। लेकिन 11 फरवरी को थापा जिंदगी की इस जंग को हार गए। उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उन्होंने 11 फरवरी को आखिरी सांस ली। 

देश के लिए कुर्बान किया जीवन
लांस नाइक थापा ने देश की रक्षा के लिए अपना जीवन तक कुर्बान कर दिया। उन्हें उनके बलिदान के लिए मरणोपरांत सेना मेडल से नवाजा गया। उनकी पत्नी और एक बेटी भी है।

फ्लैग ऑफ हॉनर फाउंडेशन ने उनके शहीद होने के 5 साल बाद थापा की बहादुरी कहानी और देश सेवा और बलिदान को साझा किया।  

 

 

 

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

‘हमारी एजेंसियों का इस्तेमाल…’ ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर साधा तगड़ा निशाना!
ED रेड, CM की एंट्री! I-PAC ऑफिस पर छापा और ममता का बड़ा आरोप