
Shraddha Walker murder case: श्रद्धा वॉकर हत्याकांड में दर्ज एफआईआर से संबंधित किसी भी कंटेंट का किसी भी रूप में इस्तेमाल करने पर कोर्ट ने मीडिया पर रोक लगा दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की लिंक कोर्ट, आज तक और अन्य मीडिया चैनलों को मामले में एफआईआर के संबंध में किसी भी सामग्री का प्रसारण नहीं करने के आदेश जारी करने के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि इस अदालत का मानना है कि अगली तारीख तक आजतक न्यूज चैनल एफआईआर से संबंधित किसी भी सामग्री का किसी भी रूप में उपयोग नहीं करेगा। विस्तृत सुनवाई के लिए इस मामले पर 17 अप्रैल को सुनवाई होनी है।
क्या कहा कोर्ट ने?
कोर्ट ने कहा कि जब संविधान का अनुच्छेद 21 किसी व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करता है तो यह ऐसे व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक अवस्था के संरक्षण पर भी विचार करता है। अदालत ने कहा कि किसी हत्या के मामले से संबंधित संवेदनशील जानकारी का कोई भी प्रसार निश्चित रूप से अभियुक्तों और पीड़ित के परिवार के लिए मनोवैज्ञानिक प्रभाव का परिणाम होगा। जज ने कहा कि यह अदालत के संज्ञान में लाया गया था कि आजतक, नार्को-एनालसिस टेस्ट की कुछ रिकॉर्डिंग प्रसारित करने पर विचार कर रहा है, यह न केवल मामले के लिए हानिकारक होगा बल्कि अभियुक्तों और पीड़िता का परिवार, दोनों को प्रभावित करेगा।
18 मई को कर दी थी लिव इन पार्टनर की हत्या, नवम्बर में हिरासत में लिया
आफताब पूनावाला ने अपने लिव इन पार्टनर श्रद्धा वॉकर की हत्या 18 मई को की थी। आफताब ने गुस्से में आकर श्रद्धा की हत्या करने के बाद उसके 35 टुकड़े कर दिए। शव को छुपाने के लिए उसने टुकड़ों को 300 लीटर की फ्रिज में रखा और फिर धीरे धीरे उसे छतरपुर के जंगलों में फेंका। दिल्ली पुलिस ने महरौली के छतरपुर जंगलों से श्रद्धा की हड्डियों को बरामद करने का दावा किया। पुलिस ने इस हत्या की मोटिव भी खुलासा कर दिया।
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