
नई दिल्ली. मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन से ग्रामीण इलाकों में हर परिवार को करीब 727 डॉलर यानी 53,000 रुपए से अधिक का लाभ हो रहा है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में डायरिया की कमी और जल्द स्वच्छता पहुंचना भी शामिल है। एक अंतरराष्ट्रीय स्टडी में यह खुलासा हुआ है।
ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ भारत मिशन पर स्टडी में पता चला है कि 10 सालों में घरेलू खर्च पर वित्तीय रिटर्न लागत का 1.7 गुना है, जबकि समाज में कुल खर्च का वित्तीय रिटर्न लागत का 4.3 गुना है।
यह स्टडी वैश्विक सूचना विश्लेषण प्रमुख एल्सेवियर की साइंसडायरेक्ट जर्नल में छापी गई है और यह स्वच्छ भारत मिशन का पहला आर्थिक विश्लेषण भी है। इसके मुताबिक, ग्रामीण इलाके में सबसे गरीब को लागत का 2.6 गुना वित्तीय रिटर्न और लागत की 5.7 गुना सामाजिक वापसी मिली।
सर्वे में 12 राज्यों के 10 हजार से ज्यादा घरों का किया गया आंकलन
इस सर्वे में 20 जुलाई 2017 से 12 राज्यों के 10051 ग्रामीण घरों का आंकलन किया गया। इसमें बिहार, उत्तरप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश और असम समेत 12 राज्यों के घरों को शामिल किया गया, इन राज्यों से देश के कुल खुले में शौच के 90% मामले आते हैं।
2 अक्टूबर 2014 को पीएम ने लॉन्च किया था मिशन
पीएम मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी। इस दौरान उन्होंने ऐलान किया था कि भारत 2019 तक खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा। 2014 में लॉन्च के समय 38.7% से यह अक्टूबर 2019 तक 100% टारगेट हो गया। इस स्कीम के तहत 10 करोड़ घरों में शौचालय बनाए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, परिवारों को शौचालय के औसतन 13 हजार रुपए सरकारी अनुदान मिला, यह कुल लागत का दो तिहाई था। वहीं, इन परिवारों में से 63.8 प्रतिशत ने सरकारी सब्सिडी के पूरक के तौर पर अपना निवेश (औसतन 11 हजार रुपए) किया है।
सालाना 53,000 रुपए का हुआ फायदा
स्टडी में पता चला है कि 53,000 रुपए का सालाना फायदा डायरिया के मामलों में कमी से और सफाई के समय में बचत से हुई है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि घरेलू स्वच्छता के कारण 21,000 रुपए से अधिक का एकमुश्त संपत्ति मूल्य लाभ हुआ।
यह भी पाया गया कि समय से पहले मौत में कमी के कारण पर्याप्त स्वास्थ्य लाभ सालाना लगभग 18,000 रुपए रहा। जिनके घर के शौचालय नहीं होता, उन्हें घर के बाहर स्वच्छता करने में भी काफी समय लगता है। ऐसे में जिन घरों में शौचालय है, वहां सभी सदस्यों द्वारा समय की बचत में सालाना 24,000 रुपए प्रति घर लाभ हुआ।
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