ट्रेन-बस नहीं मिली तो भागकर पहुंचे पोलैंड, किसी के पास पानी नहीं तो कोई बिना खाने के पैदल चला

Published : Mar 05, 2022, 05:51 PM ISTUpdated : Mar 05, 2022, 06:06 PM IST
ट्रेन-बस नहीं मिली तो भागकर पहुंचे पोलैंड,  किसी के पास पानी नहीं तो कोई बिना खाने के पैदल चला

सार

Indian Student reached poland :  यूक्रेन पर रूस के हमले के दस दिन हो चुके हैं। इस बीच भारत सरकार अपने छात्रांे को युद्धग्रस्त इलाकों से निकाल रही है। तमाम छात्र खारकीव, सुमी और अन्य इलाकों में फंसे हैं। कुछ छात्र भागकर पोलैंड के रेजजो पहुंचे हैं। पोलैंड के रेजजो पहुंचे एक छात्र प्रत्यूष ने बताया कि अभी भी बहुत सारे छात्र खारकीव में फंसे हैं। 

नई दिल्ली। यूक्रेन पर रूस के हमले के दस दिन हो चुके हैं। इस बीच भारत सरकार अपने छात्रों को युद्धग्रस्त इलाकों से निकाल रही है। तमाम छात्र खारकीव, सुमी और अन्य इलाकों में फंसे हैं। कुछ छात्र भागकर पोलैंड के रेजजो पहुंचे हैं। पोलैंड के रेजजो पहुंचे एक छात्र प्रत्यूष ने बताया कि अभी भी बहुत सारे छात्र खारकीव में फंसे हैं। उसने बताया कि हम एक मार्च को बम और गोलीबारी के बीच खारकीव से भागे थे। प्रत्यूष ने कहा कि पोलैंड बॉर्डर पहुंचते ही भारत सरकार ने हमें बहुत मदद की। 

स्थित इतनी भयानक कि कोई निकल नहीं सकता था
एक अन्य छात्र आकाश ने बताया कि हम खारकीव में फंसा था। हम पश्चिमी यूक्रेन के लिए ट्रेन में सवार हुए और अपने जोखिम पर यात्रा की। स्थिति इतनी भयानक थी कि कोई भी हमें वहां से नहीं निकाल सकता था। आकाश का कहना है कि यह युद्ध हमारे करियर चौपट कर रहा है।

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सुमी में बिना खाना-पानी फंसे हैं छात्र
पोलैंड बॉर्डर पहुंचे कुछ छात्रों ने बताया कि सुमी में कई छात्र फंसे हुए हैं। उनके पास न तो खाना है और न ही अन्य सामान। ये छात्र पानी की कमी से भी जूझ रहे हैं। खारकीव से भागकर पोलैंड के रेजजो पहुुंचे एक छात्र ने बताया कि संघर्ष विराम हो तो सीमाओं तक पहुंचने में मदद मिल सकती है, लेकिन अभी हालात बहुत खराब दिख रहे हैं। सरकार ने भी सुमी से छात्रों को निकालने में असमर्थता जताई है। दरअसल, वहां कोई परिवहन के साधन नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में छात्रों का घरों से निकलना खतरे से खाली नहीं है। 

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यूक्रेन के कुछ इलाकों में बसों की व्यवसथा की 
शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया था कि अन्य जगहों से छात्रों को निकालने के लिए बसों की व्यवस्था की है, लेकिन सुमी की स्थिति मुश्किल भरी है। वहां से सीजफायर के बिना छात्रों को निकालना संभव नहीं दिख रही हैै। इस बीच छात्रों के वीडियो भी सामने आए, जिनमें उन्होंने बताया है कि वो अकेले ही रूसी सीमा की ओर जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दूतावास के अधिकारी लगातार इन छात्रों के संपर्क में हैं। लेकिन जो स्थिति है, उसके हिसाब से उन्हें घरों में रहना चाहिए। सरकार ने रूस और यूक्रेन की सरकार से कई बार संपर्क कर तुरंत ही युद्धविराम लागू करने की मांग की है, ताकि इन भारतीय छात्रों को सुरक्षित रास्ता मिल सके। बताते चलें कि रूस ने आज दो शहरों में सीजफायर पर सहमति दी है, जिससे वहां के स्थानीय लोग शहर छोड़ सकें। 
 

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