
Uttarakhand Bus accident:उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में बरातियों से भरी बस के खाई में गिरने से हुए हादसे में 33 शवों को निकाला जा चुका है। जबकि बस एक्सीडेंट में घायल 19 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया है। बुधवार की देर शाम तक रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरा कर लिया गया। पुलिस ने बुधवार को कहा कि दुर्घटना के लगभग 24 घंटे बाद खोज और बचाव अभियान समाप्त हो गया है।
बरातियों से भरी बस गिर गई थी खाई में...
पौढ़ी गढ़वाल के सिमड़ी गांव में यह बस हादसा हुआ था। एक बस धुमाकोट से 70 किलोमीटर दूर आगे टिमरी गांव के पास खाई में गिर गई थी। हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र से एक बारात पौड़ी के बीरोंखाल ब्लॉक के काड़ागांव जा रही थी। मंगलवार की दोपहर में यह बस लालढांग से काड़ा गांव के लिए निकली थी। बस में 50 से अधिक लोग सवार थे। मंगलवार देर शाम अंधेरा होने के बाद बस घिरोली पुल के आगे पहुंची। बस सिमड़ी इंटर कॉलेज के पास एक खाई में अनियंत्रित होकर गई गई। देखते ही देखते हर ओर चीख-पुकार मच गई। रात के अंधेरे में स्थानीय लोगों व पुलिस प्रशासन ने किसी तरह मोबाइल व टार्च की रोशनी में बचाव कार्य शुरू किया। पूरी रात व अगले दिन बुधवार शाम तक बचाव अभियान चलाया गया।
हादसे में 33 लोगों की मौत
इस बस हादसे में 33 लोगों की मौत हो गई। खाई से 31 शवों को निकाला गया जबकि दो घायलों ने अस्पताल जाने से पहले ही दम तोड़ दिया था। एसडीआरएफ के प्रभारी विकास रमोला ने बताया कि 31 शव निकाले गए हैं जबकि दो घायलों ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। हादसे में 33 लोगों की मौत हो गई है। पुलिस ने बताया कि दुर्घटना में घायल हुए 20 लोगों को बाहर निकाला गया और उन्हें बिरोंखाल, रिखनीखाल और कोटद्वार के अस्पतालों में ले जाया गया।
एक व्यक्ति खुद ही निकला, बाद में एसडीआरएफ ने कराया भर्ती
हादसे में घायल हुए एक अन्य व्यक्ति ने खुद ही किसी तरह सुरक्षित निकल गया। घटनास्थल पर बाहर निकल गया लेकिन उसकी अवस्था को देखते हुए एसडीआरएफ ने उनको अस्पताल पहुंचवाया।
मृतकों के परिवार को दो-दो लाख की अहेतुक सहायता
बुधवार को पौड़ी गढ़वाल हादसे के घायलों से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने घटनास्थल का जायजा लिया। इसके बाद अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की है। धामी ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने उन गांववालों की सूची बनाने का भी निर्देश दिया जो दुर्घटना के बाद बचाव कार्य में जुट गए और निस्वार्थ भाव से घायलों को निकालने में मदद की है।
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