
नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन कानून को पेश किया था जिसे संसद द्वारा पारित कर दिया गया। इस बिल के तहत देश में आए शरणार्थियों को मिलने वाली नागरिकता को लेकर नियम पूरी तरह से बदल जाएंगे। विधेयक पेश करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक 001% भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। ऐसे में इस बिल को लेकर जनता के मन में कई सवाल उठ रहे हैं, बिल क्या है, कहां लागू होगा ? कितने समय से देश में रह रहे लोगों को नागरिक माना जाएगा और कैसे शरणार्थियों को इसका फायदा मिलेगा? तो यहां हम आपको नागरिकता संशोधन कानून से जुड़े सभी सवालों के जवाब बता रहे हैं....
सवाल- बिल को क्यों दिया गया ये नाम?
जवाब- मोदी सरकार नागरिकता को लेकर जो नया बिल ला रही है, उसे सिटिजन अमेंडमेंट बिल, 2019 नाम दिया गया है। इस बिल के आने से सिटिजन एक्ट, 1955 में संसोधन किया जाएगा।
सवाल- किन देशों के शरणार्थियों को मिलेगा लाभ?
जवाब- केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जा रहे CAB में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने की तैयारी है।
सवाल- शरणार्थियों के लिए बिल के क्या फायदे?
जवाब- इस बिल के पेश होने के बाद इन सभी शरणार्थियों को भारत में अवैध नागरिक नहीं माना जाएगा। मौजूदा कानून के तहत भारत में अवैध तरीके से आए लोगों को उनके देश वापस भेजने या फिर हिरासत में लेने की बात है। जो इस कानून के बनने के बाद समाप्त हो जाएगा।
सवाल- क्या पूरे देश में लागू होगा कानून?
जवाब- नहीं ये कानून पूरे देश में लागू नहीं होगा। देश के पूर्वोत्तर में अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिजोरम के इनर लाइन परमिट एरिया को इस बिल से बाहर रखा गया है। इसके अलावा ये बिल नॉर्थ ईस्ट के छठे शेड्यूल का भी बचाव करता है।
सवाल- कब से भारत आए लोगों को मिलेगी नागरिकता?
जवाब- नए कानून के मुताबिक, अफगानिस्तान-बांग्लादेश-पाकिस्तान से आया हुआ कोई भी हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, ईसाई नागरिक जो कि 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत में आया हो उसे अवैध नागरिक नहीं माना जाएगा।
सवाल- कानून का उल्लंघन किया तो?
जवाब- इनमें से जो भी नागरिक OCI होल्डर है, अगर उसने किसी कानून का उल्लंघन किया है तो उसको एक बार उसकी बात रखने का मौका दिया जाएगा। इस बिल में यह संसोधन शरणार्थियों के लिए बड़ी राहत देगी ।
सवाल- कैसे पाई जा सकेगी भारतीय नागरिकता?
जवाब- मोदी सरकार के नए कानून में इन सभी शरणार्थियों को भारत में अब नागरिकता पाने के लिए कम से कम 6 साल का वक्त बिताना होगा। पहले ये समय सीमा 11 साल के लिए थी।
सवाल- क्या देश में हो जाएगा धर्म के नाम बंटवारा?
जवाब- नागरिकता संसोधन बिल 2019 का कांग्रेस समेत 11 दल विरोध कर रहे हैं और भारत के संविधान का उल्लंघन बता रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार जो बिल ला रही है, वह देश में धर्म के आधार पर बंटवारा करेगा जो समानता के अधिकार के खिलाफ है।
सवाल- अकेले असम में ही क्यों हो रहा विरोध ?
जवाब- पूर्वोत्तर के राज्यों में मोदी सरकार के इस बिल का सर्वाधिक विरोध किया जा रहा है। पूर्वोत्तर के लोगों का मानना है कि बांग्लादेश से अधिकतर हिंदू आकर असम, अरुणाचल, मणिपुर जैसे राज्यों में बसते हैं ऐसे में ये पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ठीक नहीं रहेगा। पूर्वोत्तर में कई छात्र संगठन, राजनीतिक दल इसके विरोध में सड़कों पर उतरे हैं।
सवाल- असम के राजनेताओं ने भी जताया विरोध?
जवाब- एनडीए में भारतीय जनता पार्टी की साथी असम गण परिषद ने भी इस बिल का विरोध किया है, बिल के लोकसभा में आने पर वह गठबंधन से अलग हो गई थी। हालांकि, कार्यकाल खत्म होने पर जब बिल खत्म हुआ तो वह वापस भी आई।
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