भारतीय रेलवे एक नया इतिहास रचने के लिए तैयार है। इस ट्रेन को बिजली नहीं, डीजल नहीं, केवल पानी चाहिए। जी हां, पानी से चलने वाली भारत की पहली ट्रेन दिसंबर में ट्रायल रन शुरू करने जा रही है।

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे पहले से ही नई-नई ट्रेनें, वंदे भारत ट्रेन, नए कोच, नए रूट जैसी सुविधाओं के साथ रेलवे को आधुनिक और तेज गति से चलाने के लिए प्रयासरत है। अब रेलवे ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब न बिजली चाहिए, न डीजल, इस ट्रेन को चलाने के लिए सिर्फ पानी काफी है। जी हां, भारतीय रेलवे पहली हाइड्रोजन ट्रेन सेवा शुरू करने जा रही है। पर्यावरण के अनुकूल यह हाइड्रोजन ट्रेन दिसंबर में ट्रायल रन शुरू करेगी। 

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इस ट्रेन का ईंधन पानी है। जी हां, यह हाइड्रोजन पावर इंजन ट्रेन है। पानी और गर्म हवा से यह ट्रेन चलेगी। खास बात यह है कि इसमें शून्य कार्बन उत्सर्जन होगा। यानी पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल। इतना ही नहीं, डीजल इंजन की तुलना में इसमें 60% कम शोर होगा। इसलिए ध्वनि प्रदूषण की चिंता भी नहीं है। पहले चरण में देशभर में 35 हाइड्रोजन ट्रेन सेवा शुरू करने का रेल मंत्रालय ने फैसला किया है।

पानी से चलने वाली ट्रेन होने के कारण इसकी गति में कोई समझौता नहीं है। 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हाइड्रोजन ट्रेन दौड़ेगी। एक बार पानी भरने के बाद यह 1,000 किमी की दूरी तय करेगी। बेहद कम कीमत पर यह ट्रेन चलेगी। हाइड्रोजन भरना भी कोई मुश्किल काम नहीं है। इसलिए हर तरह से हाइड्रोजन ट्रेन भारतीय परिवहन में एक नई क्रांति लाएगी।

पहले चरण में हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत मार्ग पर चलेगी। 90 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, नीलगिरि माउंटेन रेलवे, कालका शिमला रेलवे सहित कई इको सेंसिटिव जोन में भी यह ट्रेन चलेगी। इतना ही नहीं, धीरे-धीरे सुंदर पर्यावरण और पर्यटन स्थलों से भी यह हाइड्रोजन ट्रेन गुजरेगी। इस तरह पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए भारतीय रेलवे पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा।

ग्रीन रेलवे के तहत हाइड्रोजन ट्रेन चलेगी। दिसंबर में प्रायोगिक ट्रेन शुरू की जाएगी। कई परीक्षणों के बाद हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन शुरू होगा। बारिश, धूप सहित विभिन्न मौसमों में ट्रेन का परीक्षण किया जाएगा।