महाराणा प्रताप से परशुराम तक… अखिलेश के छुट्टी वाले ऐलान में क्या है 2027 का गणित?

Published : Sep 09, 2026, 05:40 PM IST
Akhilesh Yadav

सार

अखिलेश यादव ने 2027 में सपा सरकार बनने पर 8 अतिरिक्त सरकारी छुट्टियां बहाल करने का ऐलान किया है। महाराणा प्रताप, परशुराम, निषादराज, सम्राट अशोक और विश्वकर्मा जयंती के जरिए कई सामाजिक समूहों को साधने की रणनीति चर्चा में है।

Akhilesh Yadav 2027 Plan: उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन सियासी बिसात पर मोहरे सजने लगे हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ऐसा ऐलान किया है, जिसका असर सरकारी कैलेंडर से कहीं आगे तक जा सकता है। उन्होंने कहा कि 2027 में सपा की सरकार बनी तो कई महापुरुषों और धार्मिक-सामाजिक हस्तियों की जयंती पर खत्म की गई सरकारी छुट्टियां फिर बहाल की जाएंगी। कुल 8 दिन की अतिरिक्त छुट्टियों की बात कही गई है।

एक ऐलान, कई सामाजिक समूहों तक संदेश

अखिलेश यादव ने सरदार वल्लभ भाई पटेल, निषादराज, भगवान परशुराम, अवंतीबाई लोधी, सम्राट अशोक मौर्य, महाराणा प्रताप और विश्वकर्मा जयंती जैसे मौकों का जिक्र किया है।

राजनीतिक तौर पर देखें तो इन नामों के पीछे अलग-अलग सामाजिक समूहों की भावनाएं और पहचान जुड़ी हुई हैं। महाराणा प्रताप का नाम राजपूत समाज, भगवान परशुराम का नाम ब्राह्मण समाज, निषादराज का नाम निषाद समुदाय, अवंतीबाई लोधी का नाम लोधी समाज और सम्राट अशोक का नाम मौर्य समाज से जोड़ा जाता है। विश्वकर्मा जयंती के जरिए कारीगर और विश्वकर्मा समुदाय तक संदेश पहुंचाने की कोशिश भी मानी जा सकती है। यानी छुट्टियों का यह ऐलान एक साथ कई सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

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योगी सरकार के पुराने फैसले को बनाया मुद्दा

इस घोषणा का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2017 में स्कूलों में कई महापुरुषों की जयंती पर होने वाली छुट्टियों को खत्म किया था। सरकार का तर्क था कि इन दिनों स्कूल खुले रहें और विद्यार्थियों को महापुरुषों के जीवन व विचारों की जानकारी दी जाए। अब अखिलेश उसी पुराने फैसले को पलटने का वादा कर रहे हैं। इससे सपा को अपनी सरकार और BJP सरकार के बीच नीतिगत अंतर दिखाने का मौका भी मिलता है।

क्या सरकारी कर्मचारी भी टारगेट?

इस दांव का एक दूसरा पहलू सरकारी कर्मचारी हैं। अतिरिक्त छुट्टियां सीधे सरकारी कर्मचारियों के लिए आकर्षक मुद्दा हो सकती हैं। हालांकि सिर्फ छुट्टियों के आधार पर किसी वर्ग के चुनावी रुझान का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी, लेकिन राजनीतिक दल अक्सर ऐसे फैसलों के जरिए कर्मचारियों और उनके सामाजिक नेटवर्क तक संदेश पहुंचाने की कोशिश करते हैं। कुल मिलाकर अखिलेश यादव का यह ऐलान सरकारी कैलेंडर बदलने के वादे से ज्यादा 2027 के लिए सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से साधने की रणनीति नजर आता है। अब देखना होगा कि BJP और दूसरे दल इस चुनावी दांव का जवाब किस तरह देते हैं।

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