दिल्ली-मुंबई से चेन्नई-कोलकाता तक बदलेगा रेल नेटवर्क, मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला

Published : Sep 09, 2026, 04:45 PM IST
Indian Railways High Density Network 7 Major Corridors to Get Four Tracks Under New Projects

सार

सरकार ने 7 हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को 4-ट्रैक बनाने की मंजूरी दी है। इन रूट्स पर देश का 40% रेल ट्रैफिक चलता है। इस योजना से यात्री और मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ेगी और 5 राज्यों के 56 लाख लोगों को फायदा होगा।

भारतीय रेलवे के उन रूट्स पर अब ट्रेनों की रफ्तार और क्षमता बढ़ाने की तैयारी है, जहां देश का बड़ा हिस्सा रेल ट्रैफिक दौड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में सात हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को चार ट्रैक वाला बनाने से जुड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई। सरकार के मुताबिक इन रूट्स पर रेलवे के करीब 40 फीसदी ट्रैफिक का दबाव है।

दिल्ली-मुंबई से चेन्नई-कोलकाता तक बदलेगा नेटवर्क

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक हाई-डेंसिटी नेटवर्क में दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली जैसे प्रमुख रूट शामिल हैं। इनके साथ दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता के डायगोनल कॉरिडोर तथा दिल्ली-गुवाहाटी रूट को भी इस व्यापक योजना में शामिल किया गया है। योजना का मकसद सिर्फ नई पटरी बिछाना नहीं, बल्कि मौजूदा नेटवर्क की क्षमता बढ़ाकर यात्री और मालगाड़ियों के बढ़ते दबाव को संभालना है।

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खड़गपुर-झारसुगुड़ा और अरक्कोनम-रेनिगुंटा को भी मंजूरी

कैबिनेट ने मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी नेटवर्क के खड़गपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन में 367 किलोमीटर की चौथी रेल लाइन को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर 6,528 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं अरक्कोनम से रेनिगुंटा के बीच 77 किलोमीटर में तीसरी और चौथी लाइन बिछाने की योजना को भी मंजूरी मिली है। इस पर 1,936 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार के अनुसार करीब 11,000 किलोमीटर के हाई-डेंसिटी नेटवर्क में लगभग 2,000 किलोमीटर पर चार लाइन का काम पूरा हो चुका है, जबकि करीब 5,000 किलोमीटर पर काम चल रहा है या मंजूरी मिल चुकी है। बाकी करीब 4,000 किलोमीटर के लिए DPR और मंजूरी की प्रक्रिया जारी है।

5 राज्यों के 56 लाख लोगों को फायदा

बिलासपुर-कटनी सेक्शन समेत इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में करीब 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क बढ़ेगा। इससे 4,790 गांवों के लगभग 56 लाख लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने का दावा किया गया है। इसका असर सिर्फ रेल यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा। छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में खनिज व ऊर्जा से जुड़े परिवहन को भी अतिरिक्त रेल क्षमता मिलने की उम्मीद है। साथ ही अमरकंटक, बांधवगढ़, अचनकमार और कई धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है। यानी सरकार जिस नेटवर्क को रेलवे की ‘रीढ़’ मान रही है, उसे चार ट्रैक की क्षमता देना आने वाले वर्षों में भीड़ कम करने और माल ढुलाई बढ़ाने की बड़ी रणनीति साबित हो सकता है।

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