आकृति चौधरी NSA मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 5 लाख रुपये मुआवजे के आदेश को यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। जानिए पूरा मामला और कोर्ट की सख्त टिप्पणी।
नोएडा के मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में स्टूडेंट-एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाला है। हाई कोर्ट ने हिरासत को रद्द करने के साथ गौतमबुद्ध नगर की DM मेधा रूपम समेत जिम्मेदार अधिकारियों की सैलरी से 5 लाख रुपये मुआवजा वसूलने का आदेश दिया था। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या बोली यूपी सरकार?
सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करेगी। यानी अब कानूनी लड़ाई का अगला पड़ाव सुप्रीम कोर्ट होगा। विवाद सिर्फ आकृति की हिरासत तक सीमित नहीं है। हाई कोर्ट के उस निर्देश ने भी मामला गंभीर बना दिया, जिसमें मुआवजे की रकम संबंधित अधिकारियों की निजी सैलरी से वसूलने की बात कही गई थी।
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पांच महीने हिरासत में रहीं आकृति
आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। प्रशासन की ओर से उन पर आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने जैसे आरोप लगाए गए और बाद में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत हिरासत में लिया गया। आकृति करीब पांच महीने हिरासत में रहीं। मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने NSA लगाने के लिए पेश की गई सामग्री और हिरासत के आधारों की जांच की।
हाई कोर्ट ने NSA कार्रवाई पर उठाए सवाल
इलाहाबाद हाई कोर्ट को आकृति की हिरासत के लिए पर्याप्त और ठोस सामग्री नहीं मिली। अदालत ने हिरासत रद्द करते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे गंभीर कमी माना। कोर्ट ने कहा कि हिरासत के आधार अटकलों पर आधारित और सबूतों से रहित थे.
इसी के साथ 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया और संबंधित अधिकारियों से इसकी भरपाई की बात कही गई। अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में भी कोर्ट की नाराजगी दर्ज करने का निर्देश दिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई यह तय करने में अहम होगी कि हाई कोर्ट के इस मुआवजा और अधिकारियों की सैलरी से वसूली वाले आदेश पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है।
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