बिहार के लौरिया से BJP विधायक विनय बिहारी बाढ़ राहत को लेकर बेतिया समाहरणालय में धरने पर बैठ गए। उन्होंने CM सम्राट चौधरी के आने तक धरना जारी रखने की बात कही।

बिहार में बाढ़ का पानी भले धीरे-धीरे उतर रहा हो, लेकिन राहत व्यवस्था को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। पश्चिम चंपारण की लौरिया विधानसभा सीट से BJP विधायक विनय बिहारी मंगलवार को बेतिया समाहरणालय परिसर में गमछा बिछाकर धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि बाढ़ पीड़ितों को जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री नहीं मिल रही है और जब तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद नहीं पहुंचते, वह धरने से नहीं उठेंगे।

बाढ़ राहत को लेकर विधायक ने खोला मोर्चा

विनय बिहारी ने आरोप लगाया कि कई बाढ़ प्रभावित इलाकों में अभी भी पर्याप्त पॉलिथीन, राशन और जरूरी सामान नहीं पहुंचा है। इससे पहले भी वह लौरिया और योगापट्टी क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित करने तथा पीड़ित परिवारों को राहत और मुआवजा देने की मांग उठा चुके हैं।

धरने के दौरान विधायक ने अधिकारियों और सरकार को भेजे गए पत्र दिखाते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को चार और आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा को दो पत्र दिए हैं। उनका कहना है कि इलाके में जिस स्तर की आपदा है, उसके अनुरूप राहत व्यवस्था नहीं है। हालांकि ये विधायक द्वारा लगाए गए आरोप हैं।

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'जब तक सम्राट चौधरी नहीं आएंगे, नहीं उठूंगा'

विनय बिहारी ने कहा कि वह चाहते हैं कि मुख्यमंत्री खुद क्षेत्र का दौरा करें और प्रभावित लोगों की स्थिति देखें। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के आने तक वह धरने पर बैठे रहेंगे। अपने अंदाज में उन्होंने कहा, 'ऊपर श्रीहरि, नीचे सम्राट चौधरी', और मुख्यमंत्री के आने का इंतजार करने की बात कही।

विधायक के मुताबिक, वह करीब चार घंटे तक जिलाधिकारी समेत अधिकारियों से मुलाकात का इंतजार करते रहे। जब मुलाकात नहीं हुई तो उन्होंने समाहरणालय परिसर में धरना शुरू कर दिया। सूचना मिलने के बाद बेतिया के DDC ने उनसे बातचीत की, लेकिन विधायक अपनी मांग पर कायम रहे।

सरकार की ओर से भी चल रहा राहत अभियान

विनय बिहारी के विरोध के बीच सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और स्थिति के आकलन की कार्रवाई जारी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे भी किया है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि लाखों प्रभावित परिवारों को सीधे आर्थिक सहायता भेजी गई है। फिलहाल लौरिया विधायक का धरना स्थानीय बाढ़ राहत व्यवस्था को लेकर सरकार के लिए एक अलग तरह की चुनौती बन गया है। अब नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री के दौरे या प्रशासन की ठोस कार्रवाई के बाद धरना कब खत्म होता है।

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