
Gaurav Gogoi Pakistan Link Case: विधानसभा चुनाव से पहले असम की राजनीति में शनिवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ऐलान किया कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से जुड़े कथित पाकिस्तान लिंक के मामले को अब केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को सौंप दिया जाएगा। यह फैसला कैबिनेट बैठक के बाद लिया गया। सरकार का कहना है कि यह मामला सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। आइए जानते हैं पूरा विवाद है क्या? असम सरकार ने अचानक केस दिल्ली क्यों भेज दिया और इससे असम की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
मुख्यमंत्री ने हिमंत बिस्वा सरमा प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से जुड़े कथित पाकिस्तान लिंक के मामले की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। सरमा के मुताबिक, कैबिनेट की राय थी कि जांच में सामने आए बिंदु गंभीर हैं और राज्य पुलिस की सीमा से बाहर जाते हैं। इसी वजह से केस को आगे की कार्रवाई के लिए MHA को भेजने का फैसला लिया गया।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, इस केस में तीन अहम किरदार बताए जा रहे हैं, एक मौजूदा सांसद, दूसरी उनकी ब्रिटिश नागरिक पत्नी और तीसरा पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख है। सरमा का कहना है कि इन तीनों के बीच कथित संबंधों की जांच की गई है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि गोरव गोगोई पहले पाकिस्तान जा चुके हैं। उन्होंने दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन में तत्कालीन पाक उच्चायुक्त से मुलाकात की। इस यात्रा की जानकारी केंद्र सरकार को नहीं दी गई। पाकिस्तान यात्रा के दौरान वे सोशल मीडिया पर भी सक्रिय नहीं थे। हालांकि, ये सभी आरोप हैं, जिन पर अंतिम फैसला जांच के बाद ही होगा।
सरमा ने यह भी दावा किया कि गौरव गोगोई की पत्नी ने 2011 से 2012 के बीच पाकिस्तान में काम किया था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, SIT की रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका संपर्क पाकिस्तान की कुछ संस्थाओं से रहा और पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के साथ पेशेवर तौर पर काम किया गया। सरमा का यह भी आरोप है कि जांच शुरू होने के बाद सोशल मीडिया से कुछ पोस्ट हटाए गए।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि राज्य सरकार ने मौजूदा सांसद गोरव गोगोई से पूछताछ नहीं की। उनका कहना था कि, अगर इस स्तर पर कड़ी कार्रवाई होती, तो उस पर चुनाव से पहले राजनीति करने का आरोप लग सकता था। इसी वजह से पूरा मामला केंद्र को सौंपने का फैसला किया गया।
गौरव गोगोई पहले ही इन आरोपों को बेबुनियाद, बेतुका और निराधार बता चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर बिना सबूत आरोप लगाने का आरोप लगाया है। हालांकि, MHA को केस सौंपे जाने के ताजा फैसले पर कांग्रेस सांसद की ओर से अभी कोई नई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है, जब असम में विधानसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं। BJP और कांग्रेस के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। मुख्यमंत्री सरमा ने कांग्रेस पर और भी आरोप लगाए और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही।
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