भारत के लिए क्यों ज़रूरी है 3-बच्चे का मॉडल? RSS चीफ मोहन भागवत ने बताई चौंकाने वाली वजह
RSS Chief Statement: मोहन भागवत ने कहा शादी केवल सहमति नहीं, सामाजिक कर्तव्य है। 3-बच्चे सिद्धांत, जनसंख्या संतुलन, घुसपैठ, GDP से आगे सोच और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके बयान ने नई बहस छेड़ दी-क्या अब सोच बदलने का वक्त आ गया है?

RSS Three Child Theory: देश में जनसंख्या, शादी, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अक्सर बहस होती रहती है, लेकिन जब RSS प्रमुख मोहन भागवत इन विषयों पर खुलकर बोलते हैं, तो बयान सिर्फ़ बयान नहीं रह जाता, बल्कि एक नई चर्चा की शुरुआत बन जाता है। रविवार को दिए गए अपने भाषण में मोहन भागवत ने साफ कहा कि “शादी सिर्फ़ आपसी सहमति नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक ज़िम्मेदारी है”। साथ ही उन्होंने तीन-बच्चे के सिद्धांत, जनसंख्या असंतुलन, GDP की सीमाएं और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बेबाक राय रखी, जिसने सबका ध्यान खींचा।
क्या सच में शादी सिर्फ़ निजी फैसला नहीं है?
मोहन भागवत का कहना है कि शादी को केवल दो लोगों की निजी पसंद मानना अधूरा नजरिया है। उनके अनुसार, शादी का सीधा असर समाज, जनसंख्या संतुलन और भविष्य की पीढ़ियों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि समाज को संतुलित रखने के लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: RSS Chief Mohan Bhagwat says, "... People from the Hindu community have gradually abandoned these low-skilled jobs. Everyone is chasing after high-paying jobs. The result is that since there's no one else to do these jobs, their (infiltrators)… pic.twitter.com/NSsRSUHHDd
— ANI (@ANI) February 8, 2026
तीन-बच्चे का सिद्धांत क्यों चर्चा में है?
जनसंख्या पर बात करते हुए RSS प्रमुख ने बताया कि पारंपरिक ज्ञान और कुछ मेडिकल रिसर्च दोनों ही तीन बच्चों वाले परिवार मॉडल को संतुलन के लिए बेहतर मानते हैं। भागवत के अनुसार, जनसंख्या असंतुलन के तीन बड़े कारण हैं-
- जन्म दर में बदलाव
- धर्मांतरण
- घुसपैठ।
बाद वाले पर, उन्होंने नागरिकों से राज्य की "आंखें और कान" बनने का आग्रह किया, यह सुझाव देते हुए कि स्थानीय लोगों को संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान करनी चाहिए और सरकारी पहचान प्रयासों में मदद करने के लिए पुलिस को रिपोर्ट करनी चाहिए।
क्या GDP देश की असली तस्वीर दिखाता है?
अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि सिर्फ़ GDP के आंकड़ों से देश की वास्तविक स्थिति नहीं समझी जा सकती। उनके मुताबिक, आर्थिक मजबूती के लिए उत्पादन की मात्रा के साथ-साथ गुणवत्ता भी ज़रूरी है, तभी रुपया मज़बूत होगा और देश स्थिर रहेगा।
क्या RSS सरकार को पीछे से चलाता है?
इस सवाल पर भागवत ने साफ शब्दों में कहा कि RSS पर्दे के पीछे से सरकार नहीं चलाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार वही चलाते हैं जो चुने गए हैं, RSS सिर्फ़ राष्ट्रहित में सहयोग करता है।
सुरक्षा और समाज की भूमिका कितनी अहम?
दिल्ली में हाल ही में हुए एक धमाके का ज़िक्र करते हुए, भागवत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सिर्फ़ सरकारी खुफिया जानकारी ही काफी नहीं है। उन्होंने कहा, "ब्लास्ट होने से कुछ ही समय पहले इसका पता चल गया था, लेकिन सामाजिक जागरूकता ही असली कंट्रोल लाती है," उन्होंने नागरिकों से "मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता" वाला रवैया छोड़ने और अंदरूनी और बाहरी खतरों के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
जीवन भर की प्रतिबद्धता
संघ की अंदरूनी समावेशिता और अपने भविष्य पर बात खत्म करते हुए, भागवत ने दोहराया कि RSS SC और ST समुदायों सहित हर जाति के लिए खुला है, और भ्रष्टाचार के प्रति ज़ीरो-टॉलरेंस की नीति बनाए रखता है। उन्होंने कहा, "रिटायरमेंट के बाद भी," "देश के लिए मेरा काम जारी रहेगा।"
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