असम विधानसभा में UCC का बिल पास, शादी-तलाक से लिव-इन तक अब एक ही कानून!

Published : May 27, 2026, 04:17 PM IST
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सार

Assam UCC Bill Passed: असम में पारित UCC विधेयक में किन-किन मामलों के लिए समान कानून का प्रस्ताव है? उत्तराखंड और गुजरात के बाद UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य कौन बना? राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद असम में UCC लागू होने में कितना समय लग सकता है?

UCC Bill Passed in Assam: देश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम भी उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां विधानसभा ने UCC विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सरकार इसे समानता और एकरूप कानून की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों की नजर अब इसके लागू होने की प्रक्रिया और प्रभाव पर टिकी हुई है।

असम विधानसभा में पारित इस विधेयक के तहत राज्य के सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी ढांचा लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि उन्हें मिले संवैधानिक संरक्षण प्रभावित न हों।

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राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद होगा लागू

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद कहा कि अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद ही इसे राज्य में पूरी तरह लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मंजूरी मिलने के बाद इससे जुड़े छह से सात नियमों को अधिसूचित करना होगा। हालांकि सरकार ने इन नियमों की तैयारी पहले ही पूरी कर ली है, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले उन्हें लागू नहीं किया जा सकता। सरकार का अनुमान है कि पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में करीब तीन से छह महीने का समय लग सकता है।

 

 

क्या है इस UCC विधेयक में खास?

असम सरकार द्वारा पारित UCC विधेयक का मकसद राज्य में अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नागरिक कानून लागू करना है। इसके तहत विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों को एक ही कानूनी ढांचे के तहत लाने की बात कही गई है।

सरकार का तर्क है कि इससे कानून व्यवस्था में समानता आएगी और नागरिकों को एक जैसी कानूनी प्रक्रिया का लाभ मिलेगा। वहीं अनुसूचित जनजातियों को इस दायरे से बाहर रखने का फैसला इसलिए लिया गया है ताकि उनकी पारंपरिक और संवैधानिक पहचान सुरक्षित रह सके।

विधानसभा में पास होने के बाद क्या बोले हिमंत सरमा?

विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया। उन्होंने कहा कि UCC को लागू करना उनकी सरकार के चुनावी घोषणा पत्र का प्रमुख वादा था और सरकार ने चुनाव के तुरंत बाद पहले ही विधानसभा सत्र में इसे पूरा कर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी और गर्व है कि असम देश का तीसरा राज्य बन गया है जिसने यूनिफॉर्म सिविल कोड को अपनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। उन्होंने विधेयक को पारित कराने में सहयोग देने वाले विधानसभा के सभी सदस्यों का आभार भी जताया।

देशभर में फिर तेज हुई UCC पर बहस

असम में UCC विधेयक पारित होने के बाद देशभर में इस मुद्दे पर बहस फिर तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित होगी। वहीं विरोध करने वाले समूहों का तर्क है कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को देखते हुए इस तरह के कानून को लागू करने से कई सामाजिक और कानूनी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

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