राज्यसभा ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पास किया। इससे 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान जैसी कानूनी सुरक्षा देने का रास्ता साफ हो गया है।

Vande Mataram Bill 2026 Explained: राज्यसभा ने बुधवार 29 जुलाई को 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' को पारित कर दिया। इस विधेयक के पास होने के बाद 'वंदे मातरम' को भी राष्ट्रगान 'जन गण मन' की तरह कानूनी सुरक्षा देने का रास्ता साफ हो गया है। इस संशोधन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 'वंदे मातरम' का जानबूझकर अपमान करने, उसे गाने से रोकने या उसके गायन में बाधा डालने पर भी वही कानूनी कार्रवाई हो, जो फिलहाल राष्ट्रगान के मामले में लागू होती है।

राज्यसभा में क्या बोले गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय?

विधेयक पर चर्चा के दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह संशोधन केवल कानून में बदलाव भर नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कदम भारत की राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों और देश की आत्मा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके अनुसार, 'वंदे मातरम' को उचित कानूनी संरक्षण देना ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

मौजूदा कानून में क्या प्रावधान हैं?

फिलहाल 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' के तहत तीन राष्ट्रीय प्रतीकों को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है—

  • राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा)
  • भारत का संविधान
  • राष्ट्रगान 'जन गण मन'

इस अधिनियम की धारा 3 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान के गायन में बाधा डालता है या लोगों को राष्ट्रगान गाने से रोकता है, तो यह दंडनीय अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।

संशोधन विधेयक में क्या बदलाव किए गए हैं?

प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रगान को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा को 'वंदे मातरम' तक भी विस्तारित करना है। यदि यह विधेयक कानून बन जाता है, तो निम्न कार्य अपराध की श्रेणी में आएंगे—

  • 'वंदे मातरम' का जानबूझकर अपमान करना।
  • किसी व्यक्ति या समूह को 'वंदे मातरम' गाने से रोकना।
  • राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान जानबूझकर बाधा उत्पन्न करना।

इन मामलों में भी वही सजा लागू होगी, जो वर्तमान में राष्ट्रगान से जुड़े ऐसे अपराधों के लिए निर्धारित है। यानी तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों।

क्या यह विधेयक अब कानून बन गया है?

फिलहाल, राज्यसभा ने इस विधेयक को पारित कर दिया है, लेकिन इसे कानून बनने से पहले संविधान के तहत निर्धारित अन्य प्रक्रियाओं से भी गुजरना होगा। इनमें आवश्यक संसदीय मंजूरी (यदि लागू हो) और राष्ट्रपति की स्वीकृति शामिल है। सभी संवैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही यह संशोधन कानून के रूप में लागू होगा।

यह संशोधन क्यों लाया गया?

'वंदे मातरम' की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में देशभक्ति और आजादी की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की बैठक में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि भले ही 'जन गण मन' को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया गया है, लेकिन 'वंदे मातरम' को भी समान सम्मान दिया जाएगा क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन में इसका ऐतिहासिक योगदान रहा है।

अब तक कानूनी सुरक्षा क्यों नहीं थी?

संविधान सभा द्वारा सम्मान दिए जाने के बावजूद 'वंदे मातरम' को 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' के तहत राष्ट्रगान जैसी कानूनी सुरक्षा नहीं मिली थी। सरकार का कहना है कि यह संशोधन उसी कानूनी अंतर को समाप्त करने के लिए लाया गया है, ताकि राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों को समान कानूनी संरक्षण मिल सके।

सरकार का उद्देश्य क्या है?

सरकार के अनुसार, इस संशोधन का मकसद राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को भी वही कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है, जो वर्तमान में राष्ट्रगान 'जन गण मन' को प्राप्त है। इससे दोनों राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की रक्षा के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी।