Mamata Banerjee Fake Degree Controversy: ममता बनर्जी को नाम से क्यों हटाना पड़ा 'डॉक्टर'? क्या था उस 'फर्जी' PhD का सच

Published : May 04, 2026, 12:17 PM IST

Mamata Banerjee PhD Controversy: चुनावी नतीजों के रुझानों में ममता बनर्जी की TMC सत्ता से जाती नजर आ रही है। बंगाल राजनीति में फ्रंटफुट पर रहने वाली दीदी की जिंदगी में ऐसा वक्त भी आया, जब उन्हें अपनी डिग्री की वजह से बैकफुट पर आना पड़ा था।पढ़िए किस्सा

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पश्चिम बंगाल: जब 29 साल की लड़की बनी राजनीति की 'जायंट किलर'

बात 1984 की है। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में सहानुभूति की लहर थी। कांग्रेस ने जादवपुर सीट से एक 29 साल की साधारण कार्यकर्ता को मैदान में उतारा। नामांकन पत्र पर सरनेम तक नहीं था, बस ममता लिखा था। सामने कम्युनिस्टों के दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी थे। सबने मान लिया था कि ममता का चुनाव जीतना नामुमकिन है, लेकिन नतीजों ने सबको सन्न कर दिया। ममता ने सोमनाथ चटर्जी को करीब 20,000 वोटों से हरा दिया और देश की सबसे युवा सांसदों में से एक बन गईं। यहीं से उन्हें 'जायंट किलर' कहा जाने लगा।

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ममता बनर्जी संसद पहुंचीं और नाम के आगे लगाया 'डॉक्टर'

1984 में सांसद बनने के बाद ममता ने अपने नाम की नेमप्लेट और आधिकारिक कागजों पर 'डॉ. ममता बनर्जी' लिखना शुरू किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अमेरिका की 'यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट जॉर्जिया' से अपनी पीएचडी (PhD) पूरी की है। उस वक्त एक युवा महिला सांसद के नाम के आगे 'डॉक्टर' जुड़ना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा था, लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकी और इसकी वजह से बड़ा विवाद छिड़ गया।

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ममता बनर्जी ने जहां से डॉक्टरी की पढ़ाई की, वह वजूद में ही नहीं

जैसे ही ममता के विरोधी सक्रिय हुए, इस डिग्री की जांच शुरू हो गई। जांच में जो खुलासा हुआ, उसने संसद से लेकर कोलकाता तक हड़कंप मचा दिया। पता चला कि जिस 'यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट जॉर्जिया' का ममता जिक्र कर रही थीं, उसका तो पूरी दुनिया में कोई वजूद ही नहीं था। उसका कोई कैंपस तक नहीं है। उस नाम की कोई यूनिवर्सिटी अमेरिका में नहीं मिली। वह महज कागजी या फर्जी यूनिवर्सिटी निकली। जैसे ही यह खबर फैली, ममता बनर्जी की काफी किरकिरी हुई। उन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के चुपचाप अपने नाम के आगे से 'डॉक्टर' हटा लिया।

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ममता बनर्जी की डिग्री विवाद को राजीव गांधी ने हंसकर टाला

उस वक्त के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस विवाद को ज्यादा तूल नहीं दिया और इसे हंसकर टाल दिया। उन्होंने ममता को बंगाल में बड़ी जिम्मेदारियां भी दीं। कहा जाता है कि राजीव गांधी, ममता को बंगाल के ही बड़े नेता प्रणव मुखर्जी के खिलाफ तैयार कर रहे थे, लेकिन 1989 के चुनाव में राजीव सरकार बहुमत से पीछे रह गई और ममता भी अपनी सीट हार गईं।

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Bengal Election Result: क्या कह रहा है बंगाल का मूड?

सालों बाद आज फिर बंगाल एक बड़े सियासी मोड़ पर खड़ा है। 293 सीटों पर हो रही गिनती के ताजा हालात की बात करें, तो दोपहर 12 बजे तक भाजपा (BJP) करीब 160 सीटों पर आगे चल रही है, तो टीएमसी (TMC) सिर्फ 117 पर फंसी नजर आ रही है।

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