98 दिन की खुदाई, 2000 पन्नों की रिपोर्ट और फिर आया भोजशाला पर सबसे बड़ा फैसला

Published : May 15, 2026, 03:59 PM IST
Bhojshala Verdict Madhya Pradesh High Court Declares Dhar Site a Temple Upholds Hindu Worship Rights

सार

Bhojshala Temple Case: धार की ऐतिहासिक भोजशाला पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे मंदिर माना है। ASI रिपोर्ट, पूजा अधिकार, कमल मौला मस्जिद विवाद और 98 दिन चले सर्वे के बाद आए इस फैसले ने पूरे देश में नई बहस छेड़ दी है।

Bhojshala verdict: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर शुक्रवार को बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया। इंदौर खंडपीठ ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में भोजशाला को मंदिर माना है और हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिए जाने की पुष्टि की है। अदालत के इस फैसले को हिंदू पक्ष की बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष के लिए यह मामला अब नए कानूनी विकल्पों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यह फैसला केवल एक धार्मिक स्थल को लेकर नहीं है, बल्कि इतिहास, पुरातत्व, आस्था और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े उस विवाद का हिस्सा है, जो वर्षों से अदालतों और समाज के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था।

कोर्ट ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य यह स्थापित करते हैं कि विवादित स्थल “भोजशाला” के रूप में जाना जाता रहा है और इसका संबंध परमार वंश के राजा भोज से जुड़े संस्कृत शिक्षा केंद्र से रहा है। अदालत ने साफ कहा कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-पाठ की निरंतरता कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट और वैज्ञानिक निष्कर्षों पर भरोसा जताते हुए कहा कि पुरातत्व एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है और उसके आधार पर प्राप्त तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फैसले में यह भी कहा गया कि यह एक संरक्षित स्मारक है और इसके संरक्षण तथा निगरानी का अधिकार ASI के पास रहेगा।

 

 

यह भी पढ़ें: होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव, भारतीय जहाज पर ड्रोन हमले के बाद अब एक और जहाज पर कब्जे की खबर

मंदिर या मस्जिद? यही था सबसे बड़ा सवाल

कोर्ट के सामने सबसे अहम प्रश्न यही था कि क्या भोजशाला वास्तव में वाग्देवी मंदिर है या फिर कमल मौला मस्जिद। हिंदू पक्ष का दावा था कि यह 11वीं सदी में राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र था। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना था कि यह सदियों पुरानी कमल मौला मस्जिद है, जहां लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है। अदालत ने अपने फैसले में ASI की रिपोर्ट, पुरातात्विक साक्ष्यों और अयोध्या मामले में स्थापित कानूनी सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि वैज्ञानिक अध्ययन और ऐतिहासिक सामग्री मंदिर होने के पक्ष को मजबूत करते हैं।

 

 

मुस्लिम पक्ष के लिए अदालत ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम पक्ष चाहे तो मस्जिद के लिए अलग जमीन आवंटन को लेकर आवेदन कर सकता है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक अधिकारों और पुरातात्विक तथ्यों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। हालांकि मुस्लिम पक्ष से जुड़े संगठनों ने ASI की रिपोर्ट को पहले ही “पक्षपाती” बताया था। उनका आरोप रहा है कि सर्वे प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती गई।

फैसले के बीच शांतिपूर्ण तरीके से हुई नमाज

फैसले वाले दिन शुक्रवार होने के कारण तय व्यवस्था के मुताबिक मुस्लिम समुदाय ने भोजशाला परिसर में नमाज अदा की। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। धार शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर नाकाबंदी की गई थी। सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी प्रशासन लगातार नजर रख रहा था। जानकारी के मुताबिक करीब 1000 से अधिक पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था में लगाए गए थे ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों से लगातार संवाद बनाए रखा और अदालत के फैसले का सम्मान करने की अपील की।

98 दिनों तक चला ASI का वैज्ञानिक सर्वे

इस मामले में सबसे अहम भूमिका भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की विस्तृत रिपोर्ट ने निभाई। हाई कोर्ट के आदेश पर मार्च 2024 में वैज्ञानिक सर्वे शुरू किया गया था, जो करीब 98 दिनों तक चला। 22 मार्च 2024 से शुरू हुआ यह सर्वे जून 2024 के अंत तक चला और 15 जुलाई 2024 को ASI ने लगभग 2000 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में सौंपी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि वर्तमान ढांचे का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर के अवशेषों और स्तंभों का उपयोग करके किया गया था। सर्वे के दौरान परमार काल की मूर्तियां, नक्काशीदार पत्थर और कई शिलालेख भी मिले थे। इन्हीं निष्कर्षों को अदालत ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण आधार माना।

दशकों पुराना है भोजशाला विवाद

भोजशाला विवाद नया नहीं है। यह मामला कई दशकों से संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक मुद्दा बना हुआ है। हालांकि कानूनी लड़ाई ने 2022 के बाद ज्यादा तेजी पकड़ी, जब “हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस” ने अदालत में याचिका दायर की। 2003 में ASI द्वारा बनाई गई व्यवस्था के अनुसार:

  • हिंदू समुदाय को हर मंगलवार सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की अनुमति दी गई थी
  • मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज पढ़ने की इजाजत थी
  • बाकी दिनों में यह परिसर पर्यटकों के लिए खुला रहता था

मुस्लिम पक्ष ने अपने दावे के समर्थन में धार रियासत के 1935 के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें इस स्थल को मस्जिद के रूप में मान्यता देने की बात कही गई थी।

जैन समाज ने भी किया दावा

इस विवाद में हाल के वर्षों में जैन समाज भी एक पक्ष के रूप में सामने आया। जैन समुदाय ने हस्तक्षेप याचिका दाखिल करते हुए दावा किया कि यह मूल रूप से जैन गुरुकुल और मंदिर था। जैन पक्ष का कहना है कि यहां मिली वाग्देवी की प्रतिमा वास्तव में जैन यक्षिणी अंबिका की प्रतिमा है। हालांकि अदालत का मुख्य फोकस हिंदू और मुस्लिम पक्षों के दावों पर रहा।

फैसले के बाद आगे क्या?

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब संभावना जताई जा रही है कि मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है। दूसरी ओर हिंदू संगठनों ने फैसले का स्वागत किया है और इसे “ऐतिहासिक न्याय” बताया है। फिलहाल भोजशाला मामला केवल एक धार्मिक विवाद नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, पुरातात्विक साक्ष्यों और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन की बड़ी परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक राजनीतिक तथा कानूनी चर्चा का केंद्र बन सकता है।

यह भी पढ़ें: NEET UG-2026 Paper Leak: 50% नंबर से ग्रेस पर पास छात्र के लिए 10 लाख में खरीदा गया पेपर?

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

Coma Dream: कोमा से जागी लड़की ने पूछा एक सवाल, डॉक्टरों ने दिया दिल तोड़ने वाला जवाब
महाराजगंज में बच्चों के बीच बदले-बदले दिखे CM योगी, वायरल हो रहा 'बुलडोज़र बाबा' अनोखा अंदाज