Rishi Biwal marksheet: NEET UG-2026 पेपर लीक केस में ऋषि बिवाल की मार्कशीट ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सेकंड डिवीजन से पास छात्र के लिए 10 लाख में पेपर खरीदने के आरोप, CBI जांच, कोचिंग माफिया और 21 जून री-एग्जाम पर बड़ा खुलासा।
CBI Investigation NEET Leak Update: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG-2026 एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस पूरे मामले में एक ऐसी मार्कशीट चर्चा का केंद्र बन गई है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर जांच एजेंसियों तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

यह मार्कशीट है ऋषि बिवाल की। वही छात्र, जिसके पिता दिनेश बिवाल पर आरोप है कि उन्होंने बेटे को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए कथित तौर पर 10 लाख रुपये देकर NEET का पेपर खरीदा। लेकिन जब छात्र की शैक्षणिक पृष्ठभूमि सामने आई, तो कई बड़े सवाल खड़े हो गए।
यह भी पढ़ें: इस्लामाबाद नहीं, भारत है बेहतर: BRICS के मंच से रूस ने कर दिया ऐसा ऐलान कि पाकिस्तान को लग गई मिर्ची
सेकंड डिवीजन बाय ग्रेस से पास हुआ छात्र
राजस्थान बोर्ड की सीनियर सेकेंडरी परीक्षा की मार्कशीट के मुताबिक ऋषि बिवाल 500 में सिर्फ 254 अंक हासिल कर पाया था। उसे कुल 50.80 प्रतिशत नंबर मिले और वह “Second Division By Grace” से पास हुआ। सबसे ज्यादा चर्चा उसके साइंस विषयों के नंबरों को लेकर हो रही है। मार्कशीट के अनुसार:
- हिंदी – 32 नंबर
- अंग्रेजी – 51 नंबर
- फिजिक्स – 51 नंबर: थ्योरी-1 में सिर्फ 9 नंबर, थ्योरी-2 में 14 नंबर
- केमिस्ट्री – 58 नंबर: पहले थ्योरी पेपर में 15 नंबर, दूसरे पेपर में 14 नंबर
- बायोलॉजी – 62 नंबर, पहले थ्योरी पेपर में 20 नंबर, दूसरे पेपर में 14 नंबर
अब यही अंक जांच एजेंसियों और सोशल मीडिया पर बहस का बड़ा विषय बन चुके हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस छात्र के फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी जैसे मुख्य विषयों में इतने कम थ्योरी नंबर हों, उसके लिए कथित तौर पर लाखों रुपये खर्च कर पेपर खरीदने की जरूरत क्यों पड़ी।
CBI जांच में क्या सामने आया?
सूत्रों के मुताबिक CBI की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिवाल ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि उसने अपने बेटे के लिए पेपर मंगवाया था। बताया जा रहा है कि इसके लिए करीब 10 लाख रुपये तक की डील हुई थी। हालांकि हैरानी की बात यह रही कि कथित पेपर मिलने के बावजूद छात्र NEET में केवल 107 अंक ही हासिल कर सका। जांच एजेंसियों का दावा है कि दिनेश बिवाल और मांगीलाल कथित पेपर लीक नेटवर्क में “कोरियर” की भूमिका निभा रहे थे। आरोप है कि Telegram PDF, WhatsApp चैट और प्रिंट कॉपी के जरिए प्रश्नपत्र अलग-अलग छात्रों तक पहुंचाए गए।
CBI के रिमांड दस्तावेजों के अनुसार राजस्थान के सीकर, हरियाणा के गुरुग्राम और महाराष्ट्र के नासिक तक फैले नेटवर्क के जरिए कथित प्रश्नपत्र शेयर किए गए। एजेंसी अब मोबाइल डेटा, डिजिटल डिवाइस, चैट रिकॉर्ड और पैसों के लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है।
क्या पहले भी हुआ था पेपर लीक?
पूछताछ में सामने आई जानकारी ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। आरोप है कि मांगीलाल और दिनेश बिवाल पहले भी NEET पेपर लीक कर आगे बेच चुके हैं। जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पिछले साल NEET-2025 में बिवाल परिवार के पांच बच्चों का MBBS में चयन हुआ था। अब आरोप लगाया जा रहा है कि इन्हें भी परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। मामले में यह भी सामने आया है कि मांगीलाल का बेटा सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज में MBBS कर रहा है। वहीं विकास बिवाल पर भी कथित तौर पर आगे पेपर बेचने के नेटवर्क में शामिल होने के आरोप लगे हैं।
हरियाणा का छात्र यश यादव, जो सीकर में रहकर तैयारी करता था, उसका नाम भी जांच में सामने आया है। बताया जा रहा है कि इसी दौरान मांगीलाल परिवार के संपर्क बढ़े और महाराष्ट्र के नेटवर्क से कथित पेपर लाने का सिलसिला शुरू हुआ।
कोचिंग माफिया पर जांच एजेंसियों की नजर
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे मामले के पीछे बड़ा “एजुकेशन माफिया” काम कर रहा है। गिरफ्तार आरोपी केवल नेटवर्क की निचली कड़ी हो सकते हैं। राजस्थान का सीकर लंबे समय से मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग हब माना जाता है। ऐसे में अब कई कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर वे बड़े चेहरे कौन हैं, जिनके लिए बिवाल परिवार कथित तौर पर काम कर रहा था।
अब 21 जून को दोबारा होगी परीक्षा
पेपर लीक विवाद के बाद NEET UG-2026 परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने पुनर्परीक्षा की नई तारीख घोषित कर दी है। परीक्षा अब 21 जून को आयोजित होगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 14 जून को एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 3 मई को परीक्षा होने के बाद 7 मई तक NTA के कंप्लेंट सिस्टम में कई शिकायतें दर्ज हुई थीं। इसके बाद आंतरिक जांच हुई और मामला संबंधित एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई तक स्थिति स्पष्ट हो गई थी कि “गेस पेपर” के जरिए संगठित तरीके से परीक्षा को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
अगले साल से पूरी तरह ऑनलाइन होगा NEET
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी ऐलान किया कि अगले साल से NEET परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड और ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी। ओएमआर शीट की जगह छात्रों को सीधे कंप्यूटर सिस्टम पर परीक्षा देनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। उन्होंने साफ कहा कि सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति है और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
छात्रों के भरोसे पर सबसे बड़ा सवाल
NEET केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के डॉक्टर बनने के सपने का रास्ता है। ऐसे में पेपर लीक जैसे आरोप सिर्फ सिस्टम पर नहीं, मेहनत करने वाले छात्रों के विश्वास पर भी चोट करते हैं। अब पूरे देश की नजर CBI जांच पर टिकी है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि पेपर किसने लीक किया, बल्कि यह भी है कि क्या शिक्षा व्यवस्था में सक्रिय बड़े नेटवर्क तक जांच एजेंसियां पहुंच पाएंगी या नहीं।
यह भी पढ़ें: LPG से लेकर डिफेंस तक: मोदी-नाहयान की मुलाकात ने बदला खाड़ी देशों का समीकरण, चीन-पाकिस्तान हैरान!
