
देश के चुनावी ढांचे को बदलने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। लोकसभा में यूनियन टेरिटरीज लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया है, जिसका सीधा असर दिल्ली, जम्मू और कश्मीर और पुडुचेरी की राजनीति पर पड़ेगा।
सरकार का कहना है कि संविधान में हाल के बदलावों के बाद पुराने कानून अब मौजूदा जरूरतों के हिसाब से फिट नहीं बैठ रहे थे, इसलिए उन्हें अपडेट करना जरूरी हो गया था।
यह भी पढ़े: सक्ती में मौत का धमाका! पावर प्लांट में बॉयलर फटा, 9 मजदूरों की दर्दनाक मौत
इस विधेयक का सबसे बड़ा फोकस तीन चीजों पर है:
अब सीटों का निर्धारण पुराने आंकड़ों से नहीं, बल्कि नई जनगणना के आधार पर होगा। इसके लिए एक स्वतंत्र आयोग बनाया जाएगा, जो तय करेगा कि किस इलाके में कितनी सीटें हों और उनकी सीमाएं क्या हों।
दिल्ली में फिलहाल 70 विधानसभा सीटें हैं। नए प्रस्ताव के मुताबिक, अब यह संख्या “कम से कम 70” कर दी गई है। यानी आने वाले समय में जनसंख्या बढ़ने के साथ सीटों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा, दिल्ली में चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय होंगी, ताकि तेजी से बढ़ती आबादी को सही प्रतिनिधित्व मिल सके।
जम्मू और कश्मीर में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। यहां विधानसभा सीटों की न्यूनतम संख्या 114 कर दी गई है। हालांकि, पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों के लिए 24 सीटें पहले की तरह खाली रहेंगी। नए सीमांकन के बाद ही अन्य बदलाव लागू किए जाएंगे, ताकि मौजूदा व्यवस्था पर अचानक असर न पड़े।
पुदुचेरी की विधानसभा में न्यूनतम 30 सीटें तय की गई हैं। इसके साथ ही नामित सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 5 करने का प्रस्ताव है, जिनमें 2 महिलाएं होंगी। यह बदलाव भी सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा।
इस विधेयक का एक अहम हिस्सा महिलाओं को मिलने वाला आरक्षण है। संविधान के अनुसार, विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित होंगी। लेकिन यह आरक्षण तभी लागू होगा जब नई जनगणना और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। यानी यह बदलाव तुरंत नहीं, बल्कि आने वाले समय में लागू होगा।
सरकार ने इस विधेयक के जरिए कई पुराने प्रावधानों को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है, जो अब समय के हिसाब से अप्रासंगिक हो चुके हैं। इससे कानून को सरल और स्पष्ट बनाने की कोशिश की गई है, ताकि चुनावी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित हो सके।
इस विधेयक के लागू होने के बाद:
हालांकि, ये सभी बदलाव एक साथ लागू नहीं होंगे। नई जनगणना और सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
यह विधेयक सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि देश के चुनावी सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि यह विधेयक कब पास होता है और इसके लागू होने के बाद राज्यों की राजनीति में क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।
यह भी पढ़ें: अब बिहार आपके हवाले साथियो, नीतीश-सम्राट की देखिए कभी खुशी कभी गम वाली तस्वीरें
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।