बंगाल में पलटी सत्ता! 15 साल बाद TMC OUT, BJP IN, लेकिन क्यों उठे EVM पर सवाल?

Published : May 04, 2026, 07:06 PM IST
BJP Sweeps West Bengal TMC Questions Counting Process and EVM Data After Shock Defeat

सार

TMC Questions Counting Process and EVM: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में BJP की बड़ी जीत के बाद TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने काउंटिंग प्रक्रिया और EVM डेटा पर सवाल उठाए। जानिए कैसे 15 साल की ममता सरकार खत्म हुई और क्या हैं पूरे विवाद के पीछे की बड़ी वजहें।

पश्चिम बंगाल की राजनीति ने 4 मई को एक बड़ा मोड़ ले लिया। लंबे समय से सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस का किला ढह गया और भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। इस बदलाव ने सिर्फ सरकार नहीं बदली, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा और बहस का केंद्र भी बदल दिया है। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पहली बार चुनावी नतीजों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने जहां जनता के फैसले को स्वीकार करने की बात कही, वहीं चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल भी उठाए।

“जनता का फैसला स्वीकार, लेकिन प्रक्रिया पर सवाल”

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और हर किसी को उसे स्वीकार करना चाहिए। लेकिन उन्होंने साथ ही वोटों की गिनती की प्रक्रिया को लेकर असामान्य परिस्थितियों की ओर इशारा किया। उनका कहना है कि 2021 के चुनाव में जहां 8–9 घंटे के भीतर लगभग 90% गिनती पूरी हो गई थी, वहीं इस बार उसी समय में सिर्फ 6–8 राउंड की गिनती ही हो सकी। यह अंतर सिर्फ तकनीकी देरी है या इसके पीछे कोई और कारण, यही सवाल अब सियासी बहस का केंद्र बनता जा रहा है।

यह भी पढ़ें: West Bengal Election 2026: SIR, केंद्रीय बल और डर की राजनीति ने कैसे बदला बंगाल का चुनावी गणित

काउंटिंग एजेंट्स को चेतावनी और धैर्य की अपील

अभिषेक बनर्जी ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और काउंटिंग एजेंट्स से साफ कहा कि वे किसी भी हाल में काउंटिंग सेंटर न छोड़ें। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर नतीजों को मीडिया के साथ साझा नहीं किया जा रहा, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बर्धमान दक्षिण सीट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जीत के बावजूद वहां दोबारा गिनती कराई जा रही है, जो संदेह को और बढ़ाता है।

EVM और डेटा मैचिंग पर बड़ा आरोप

सबसे गंभीर आरोप कल्याणी क्षेत्र से सामने आया, जहां अभिषेक बनर्जी के मुताबिक कम से कम 8 ईवीएम ऐसी हैं, जिनमें कंट्रोल यूनिट का डेटा Form 17C से मेल नहीं खा रहा। EVM डेटा और आधिकारिक दस्तावेजों के बीच इस तरह का अंतर चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधे सवाल खड़ा करता है। हालांकि, इस पर चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

BJP की रणनीतिक जीत: TMC के गढ़ में सेंध

इस चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत यह है कि भाजपा ने उन क्षेत्रों में बढ़त बनाई, जिन्हें तृणमूल का मजबूत गढ़ माना जाता था। मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर बंगाल जैसे इलाकों में भाजपा की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि राज्य में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। 15 साल तक सत्ता में रही ममता बनर्जी की सरकार का अंत सिर्फ एक चुनावी हार नहीं, बल्कि जनमत में बड़े बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।

काउंटिंग सेंटर पर विवाद और सियासी तनाव

हेस्टिंग्स काउंटिंग सेंटर पर उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब अभिषेक बनर्जी वहां पहुंचे और चुनाव आयोग ने उन्हें बाहर जाने के लिए कहा, क्योंकि वे उस सीट के उम्मीदवार नहीं थे। दूसरी ओर, तृणमूल की ओर से आरोप लगाया गया कि काउंटिंग प्रक्रिया में हस्तक्षेप हो रहा है और “काउंटिंग सेंटर को लूटने” जैसी स्थिति बनाई जा रही है। यह बयानबाजी बताती है कि चुनाव परिणाम के साथ-साथ राजनीतिक तनाव भी चरम पर है।

आगे क्या? राज्यपाल से मुलाकात की अटकलें

सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर सकती हैं। यह मुलाकात आगे की राजनीतिक रणनीति और सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर अहम मानी जा रही है।

जीत, हार और सवालों के बीच नया बंगाल

पश्चिम बंगाल का यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं है। यह एक ऐसा मोड़ है जहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया, पारदर्शिता और राजनीतिक विश्वास तीनों पर एक साथ बहस हो रही है। एक तरफ भाजपा की ऐतिहासिक जीत है, तो दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के गंभीर आरोप। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की भूमिका, जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तय करेंगी कि यह विवाद किस दिशा में जाता है। फिलहाल इतना तय है कि बंगाल की राजनीति अब पहले जैसी नहीं रहने वाली।

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