
इन दिनों फिल्म Dhurandhar: The Revenge को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। फिल्म का एक छोटा सा किरदार अचानक सुर्खियों में आ गया है। यह किरदार है अतीफ अहमद, जिसे कई लोग उत्तर प्रदेश के चर्चित माफिया Atiq Ahmed से जोड़कर देख रहे हैं।
फिल्म में अतीफ का रोल सिर्फ 7–8 मिनट का बताया जा रहा है, लेकिन उसका बैकग्राउंड, हथियारों का नेटवर्क और मर्डर वाला सीन काफी चर्चा में है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि फिल्म में दिखाए गए दावे कितने सच हैं और कितने सिनेमाई कल्पना।
असल जिंदगी में 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में पुलिस कस्टडी के दौरान अतीक अहमद और उसके भाई Ashraf Ahmed की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस घटना ने पूरे देश को हिला दिया था। अब फिल्म के जरिए उसी कहानी का एक अलग रूप दिखाया गया है।
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फिल्म की कहानी में अतीफ अहमद को एक ऐसे माफिया के रूप में दिखाया गया है जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence (ISI) से जुड़ा हुआ है। फिल्म में दावा किया गया है कि अतीफ:
फिल्म में उसका मर्डर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजय सान्याल की प्लानिंग से दिखाया गया है। यही हिस्सा सबसे ज्यादा विवाद का कारण बन रहा है।
फिल्म के शुरुआती हिस्से में एक सीन है जहां जसकीरत सिंह रांगी नाम का किरदार बदला लेने के लिए अतीफ से AK-47 खरीदने आता है।
कहानी में दिखाया गया है कि यह हथियार पाकिस्तान के इशारे पर बलूच माफिया के जरिए भारत पहुंचते हैं और फिर अतीफ के नेटवर्क तक पहुंचते हैं। यह सीन फिल्मी जरूर है, लेकिन इससे जुड़ा एक एंगल असल केस में भी सामने आया था।
अप्रैल 2023 में Umesh Pal हत्याकांड की चार्जशीट प्रयागराज पुलिस ने कोर्ट में दाखिल की थी। इस चार्जशीट में अतीक अहमद और अशरफ को हथियार तस्करी के मामले में भी आरोपी बनाया गया था। पुलिस के अनुसार पूछताछ में अतीक ने दावा किया था कि उसके पास हथियारों की कमी नहीं है और उसका संपर्क आईएसआई और Lashkar-e-Taiba से जुड़े लोगों तक है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक:
हालांकि इन आरोपों को अदालत में पूरी तरह साबित होना बाकी था, क्योंकि इससे पहले ही अतीक की हत्या हो गई।
फिल्म में एक और सीन दिखाया गया है जिसमें अतीफ जेल के अंदर बैठकर फोन पर अपने नेटवर्क को चला रहा होता है। असल जिंदगी में भी यह आरोप लंबे समय तक लगते रहे कि अतीक अहमद जेल में रहते हुए भी अपना अपराधी नेटवर्क चलाता था।
2007 में Raju Pal हत्या मामले के बाद अतीक कई जेलों में रहा, जिनमें नैनी, देवरिया, बांदा और चित्रकूट जेल शामिल हैं। 2013 में देवरिया जेल में रहते हुए उसके गुर्गों पर लखनऊ के कारोबारी मोहित जायसवाल के अपहरण और मारपीट का आरोप लगा था। इस मामले के बाद उसे बरेली जेल और फिर 2019 में गुजरात की साबरमती जेल भेज दिया गया।
फिल्म में नेपाल के रास्ते नकली नोट और हथियारों की तस्करी दिखाई गई है।
असल में भारत में कई सालों से नेपाल के जरिए फेक इंडियन करेंसी नोट (FICN) का नेटवर्क पकड़ा जाता रहा है। कई मामलों में जांच एजेंसियों ने इसमें आईएसआई से जुड़े लोगों का नाम भी बताया था। हालांकि अतीक अहमद के खिलाफ नकली नोटों के बड़े रैकेट का कोई सीधा सार्वजनिक केस सामने नहीं आया, लेकिन हथियार तस्करी के मामलों में उसका नाम जरूर जुड़ा रहा।
फिल्म में आईएसआई कनेक्शन और राजनीतिक साजिश का एंगल दिखाने के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद Dr. S. T. Hasan ने कहा कि किसी भारतीय जांच एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर अतीक का आईएसआई कनेक्शन साबित नहीं किया है। उनके मुताबिक यह फिल्म सिर्फ राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश हो सकती है। दूसरी तरफ कुछ लोग मानते हैं कि यूपी में माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वजह से ऐसे अपराधियों का अंत हुआ।
फिल्में अक्सर असली घटनाओं से प्रेरित होकर बनती हैं, लेकिन उनमें ड्रामा और काल्पनिक तत्व भी जोड़े जाते हैं।
‘धुरंधर: द रिवेंज’ में भी कई घटनाओं को सिनेमाई अंदाज में दिखाया गया है। वहीं असल जिंदगी में अतीक अहमद का अपराध जगत काफी बड़ा और जटिल था। उस पर हत्या, अपहरण, रंगदारी और कई अन्य गंभीर मामलों के आरोप थे। उसकी मौत के बाद कई सवाल हमेशा के लिए अधूरे रह गए। फिल्म ने इन्हीं सवालों और आरोपों को एक कहानी के रूप में सामने रखने की कोशिश की है।
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