PM मोदी-ट्रंप G7 फ्रांस बैठक तय, क्या नया भू-राजनीतिक समीकरण बनेगा? भारत-अमेरिका तनाव के बीच बातचीत, क्या व्यापार और वीज़ा नीतियों में बड़ा बदलाव होगा? पश्चिम एशिया व जहाज़ हमलों के विवाद से क्या रिश्तों में और खटास आएगी? क्या यह मुलाकात भारत की रणनीतिक कूटनीति की दिशा बदल सकती है?

नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फ्रांस में एक बेहद गोपनीय और संवेदनशील मुलाकात होने जा रही है। पीएम मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया के एक हफ्ते के ऐतिहासिक दौरे पर रवाना हो चुके हैं। लेकिन, इस रवानगी के पीछे छिपी है एक ऐसी कूटनीतिक बिसात, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों के कान खड़े कर दिए हैं। रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने साफ कहा, "भारत की रणनीतिक सोच में फ्रांस का एक खास स्थान है।" भारत फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन के राफेल लड़ाकू विमान का एक बड़ा ग्राहक है, ऐसे में इस बयान के कई गहरे मायने निकाले जा रहे हैं।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

सस्पेंस: 17 जून की वो तारीख और बंद कमरे की खुफिया बैठक!

पर्दे के पीछे की कहानी यह है कि 17 जून को फ्रांस में होने जा रहे G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप एक बंद कमरे में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के रिश्ते एक बेहद संवेदनशील और उतार-चढ़ाव वाले दौर से गुजर रहे हैं। कूटनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट है कि इस बैठक का एजेंडा जितना सामान्य दिख रहा है, अंदरूनी कहानी उतनी ही उलझी हुई है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा सहयोग, H-1B वीज़ा नीतियां, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों पर ऐसी चर्चा होने वाली है, जो आने वाले समय में वैश्विक बाजार की दिशा तय करेगी।

Scroll to load tweet…

खौफनाक सच: समंदर में बहे खून का हिसाब मांगेगा भारत?

इस महामुलाकात के पीछे एक गहरा तनाव भी छिपा हुआ है। दरअसल, कुछ ही दिनों पहले ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों को ले जा रहे कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी सैन्य हमलों का एक सिलसिला देखा गया, जिस पर नई दिल्ली ने कड़ा ऐतराज जताया था। पलाऊ के झंडे वाले टैंकर 'MT सेटेबेलो' पर हुए हमले में तीन बेकसूर भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। इस खौफनाक घटना के बाद भारत ने एक हफ्ते के भीतर दो बार अमेरिकी राजनयिक प्रतिनिधि (चार्ज डी'अफेयर्स) को तलब कर अपनी तीखी नाराजगी जाहिर की थी। क्या मोदी इस मुलाकात में ट्रंप के सामने सीधे तौर पर अपने नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाकर वाशिंगटन को बैकफुट पर लाएंगे? यह सवाल इस वक्त सबसे बड़ा सस्पेंस बना हुआ है।

बिजनेस वॉर: ट्रेड और वीज़ा के खेल में कौन मारेगा बाजी?

दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर खींचतान जारी है। भारत अपने कई तरह के एक्सपोर्ट पर अमेरिकी टैरिफ से बड़ी राहत चाहता है, जबकि वाशिंगटन भारतीय बाजार तक अपनी पहुंच बढ़ाने और लेबर इश्यूज को लेकर अड़ा हुआ है। इसके साथ ही, अमेरिका में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स की किस्मत का फैसला करने वाले H-1B वीज़ा पर भी आर-पार की बातचीत होने की उम्मीद है।

ऑयल क्राइसिस: पश्चिम एशिया की जंग और होर्मुज़ जलडमरूमध्य का खतरा!

यह बैठक तब हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच अप्रैल से चल रहे युद्धविराम को आगे बढ़ाने की गुप्त बातचीत चल रही है। प्रतिबंधों में ढील और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के भविष्य को लेकर दोनों देशों में ठनी हुई है। चूंकि दुनिया भर के शिपिंग बेड़े में 3 लाख से ज्यादा भारतीय नाविक तैनात हैं, इसलिए इस रूट की सुरक्षा भारत की सबसे बड़ी चिंता है। ग्लोबल ऑयल मार्केट में मचे इस हाहाकार के बीच मोदी और ट्रंप की ये बातचीत कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उलटफेर कर सकती है।

इतिहास: स्लोवाकिया में 1993 के बाद पहली बार मचेगा तहलका!

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर एवियन-लेस-बेन्स में आयोजित G7 समिट में पीएम मोदी की यह लगातार सातवीं उपस्थिति है, जो भारत को 'ग्लोबल साउथ' का बेताज बादशाह बनाती है। लेकिन इस दौरे का सबसे गुप्त और ऐतिहासिक हिस्सा स्लोवाकिया की यात्रा है। स्लोवाकिया में भारत की राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव के मुताबिक, 1993 में आजादी मिलने के बाद से आज तक कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री स्लोवाकिया नहीं गया है। यह पहली बार होगा जब कोई भारतीय पीएम वहां कदम रखेगा। अब देखना यह है कि 15 से 17 जून के इस चक्रव्यूह से भारत दुनिया के सामने क्या नया कूटनीतिक चमत्कार दिखाता है!