Donald Trump: ईरान जंग के बीच ट्रंप की 'सीक्रेट' कमाई से बवाल, 3 महीने का डेटा देख वॉल स्ट्रीट भी सन्न!

Published : May 18, 2026, 11:53 AM IST
Donald Trump Stock Trading

सार

Donald Trump News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक नए विवाद में घिर गए हैं। खुलासे के मुताबिक, तीन महीनों में ट्रंप या उनके सलाहकारों ने 3700 से ज्यादा शेयर ट्रेड किए, जिससे अमेरिका में बवाल मच गया है। ईरान जंग के बीच उनकी इस कमाई को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। 

Donald Trump Stock Trading Controversy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर बड़े विवाद में घिर गए हैं। इस बार मामला शेयर बाजार और करोड़ों डॉलर की ट्रेडिंग से जुड़ा है। एक नए वित्तीय खुलासे ने वॉशिंगटन से लेकर वॉल स्ट्रीट तक हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 के सिर्फ पहले तीन महीनों में ट्रंप या उनके सलाहकारों ने 3700 से ज्यादा शेयर ट्रेड किए। यानी औसतन हर दिन 40 से ज्यादा ट्रेड हुए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि ये ट्रेडिंग ऐसे समय हुई, जब ईरान को लेकर अमेरिका की रणनीति और बयान लगातार ग्लोबल मार्केट को प्रभावित कर रहे थे।

3 महीने में 3700 ट्रेड ने क्यों मचाया हड़कंप?

Bloomberg की रिपोर्ट के बाद कई अमेरिकी मार्केट एक्सपर्ट्स भी हैरान रह गए। वॉल स्ट्रीट के दिग्गजों का कहना है कि इतनी ज्यादा ट्रेडिंग किसी बड़े हेज फंड जैसी लगती है, ना कि किसी मौजूदा राष्ट्रपति की निवेश गतिविधि जैसी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 की आखिरी तिमाही में करीब 380 ट्रेड हुए थे, लेकिन 2026 की शुरुआत में यह संख्या अचानक 3700 के पार पहुंच गई। यानी ट्रेडिंग में करीब 10 गुना उछाल देखने को मिला।

किन कंपनियों में लगा ट्रंप का पैसा?

खुलासों के मुताबिक ट्रंप से जुड़े पोर्टफोलियो में कई बड़ी अमेरिकी कंपनियों के शेयर शामिल थे। इनमें AI, टेक्नोलॉजी, डिफेंस और मीडिया सेक्टर की कंपनियां सबसे ज्यादा थीं, जिन कंपनियों में करोड़ों डॉलर के निवेश और खरीद-बिक्री की जानकारी सामने आई है, उनमें Nvidia, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, मेटा, बोइंग, Oracle और नेटफ्लिक्स शामिल हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि फरवरी में माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेजन के शेयरों में 5 से 25 मिलियन डॉलर तक की बड़ी बिकवाली भी हुई।

ईरान तनाव के बीच क्यों बढ़ा शक?

मामला सिर्फ ट्रेडिंग का नहीं है। विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि इसी दौरान ईरान को लेकर ट्रंप के बयान भी लगातार बाजार पर असर डाल रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान बातचीत को लेकर ट्रंप के कुछ सार्वजनिक बयानों से पहले ऑयल मार्केट और अमेरिकी शेयर बाजार में बड़े दांव लगाए गए थे। फिर जैसे ही बातचीत में प्रगति के संकेत आए, तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बाजार में तेजी देखने को मिली। इसके बाद सोशल मीडिया पर 'इनसाइडर जानकारी' और 'पॉलिटिकल ट्रेडिंग' जैसे सवाल तेजी से उठने लगे। हालांकि अब तक ट्रंप के खिलाफ किसी गैरकानूनी काम का सबूत सामने नहीं आया है।

क्या राष्ट्रपति रहते शेयर ट्रेड करना सही है?

अमेरिका में अब यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है। कई आलोचकों का कहना है कि जिन कंपनियों में निवेश किया गया, वे सीधे अमेरिकी सरकारी नीतियों से प्रभावित होती हैं। उदाहरण के तौर पर एनविडिया को चीन में AI चिप्स एक्सपोर्ट करने के लिए अमेरिकी मंजूरी चाहिए। बोइंग (Boeing) को अमेरिकी डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भर रहना पड़ता है। मेटा, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां लगातार सरकारी जांच और नियमों के दायरे में रहती हैं। ऐसे में राष्ट्रपति पद पर रहते इतनी आक्रामक ट्रेडिंग को लेकर हितों के टकराव की बहस तेज हो गई है।

ट्रंप परिवार और अरब कनेक्शन भी चर्चा में

विवाद में एक नया एंगल ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर (Jared Kushner) को लेकर भी जुड़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुशनर की निवेश कंपनी एफिनिटी पार्टनर्स (Affinity Partners) के पास खाड़ी देशों से जुड़ा अरबों डॉलर का फंड है। आलोचकों का कहना है कि एक तरफ मध्य-पूर्व में कूटनीतिक भूमिका और दूसरी तरफ निजी निवेश संबंध, दोनों साथ होने से सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, अभी तक किसी भी एजेंसी ने ट्रंप या कुशनर पर कोई गलत काम साबित नहीं किया है।

व्हाइट हाउस ने क्या कहा?

व्हाइट हाउस ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति हमेशा अमेरिकी जनता के हित में फैसले लेते हैं और निवेश गतिविधियों का सीधा प्रबंधन ट्रंप परिवार नहीं करता। ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन की ओर से भी कहा गया कि निवेश बाहरी वित्तीय संस्थानों द्वारा संभाले जाते हैं।

 

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