Tariff Policy: ट्रंप की 'अग्निपरीक्षा', सुप्रीम कोर्ट से पक्ष या खिलाफ आया फैसला तो क्या?

Published : Jan 09, 2026, 08:41 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर विवाद गहरा गया है। मामला अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस पर 9 जनवरी को फैसला आना था, जो फिलहाल टल गया है। लेकिन इस पर आनेवाले फैसले को ट्रंप के लिए बड़ी अग्निपरीक्षा माना जा रहा है। 

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ट्रंप का टैरिफ कानूनी दायरे में या नहीं?

सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि ट्रंप प्रशासन ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत जो टैरिफ लगाए थे, वे कानून के दायरे में थे या नहीं। इस फैसले पर सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत की नजरें टिकी हुई हैं।

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IEEPA कानून क्या है और विवाद क्यों?

IEEPA कानून राष्ट्रपति को आपातकाल की स्थिति में आर्थिक फैसले लेने का अधिकार देता है। ट्रंप प्रशासन ने इसी कानून का हवाला देकर कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए थे। अब सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति को इस कानून के तहत कांग्रेस की मंजूरी के बिना ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार था या नहीं?

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अगर ट्रंप के खिलाफ फैसला आया तो क्या?

अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला देता है और टैरिफ को अवैध ठहराता है, तो इसके बड़े कानूनी और आर्थिक परिणाम होंगे। ऐसी स्थिति में अमेरिकी सरकार को कंपनियों और आयातकों से वसूले गए टैरिफ की रकम लौटानी पड़ सकती है। यह राशि 100 से 150 अरब डॉलर के बीच हो सकती है, जिससे वहां के सरकारी खजाने पर भारी दबाव पड़ेगा।

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ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी पर पड़ेगा असर

अगर टैरिफ अवैध ठहराए जाते हैं, तो अमेरिका को चीन, यूरोप और भारत जैसे देशों के साथ व्यापार वार्ताओं का तरीका बदलना पड़ेगा। इससे ट्रेड वॉर जैसी रणनीतियां कमजोर होंगी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संतुलन बेहतर होने की उम्मीद है।

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राष्ट्रपति की शक्तियों पर लगेगी लगाम

ट्रंप के खिलाफ फैसले की स्थिति में भविष्य में कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति आपातकाल का हवाला देकर मनमाने टैरिफ नहीं लगा पाएगा। इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। इससे ट्रंप की ‘America First’ टैरिफ नीति को बड़ा कानूनी झटका लगेगा और अमेरिका को नई व्यापार रणनीति तैयार करनी पड़ेगी।

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अगर ट्रंप के पक्ष में फैसला आया तो क्या?

अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला देता है और यह मान लेता है कि राष्ट्रपति के पास IEEPA के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार है, तो ट्रंप के कार्यकाल में लगाए गए सभी विवादित टैरिफ पूरी तरह कानूनी माने जाएंगे। इस स्थिति में कंपनियों और आयातकों को कोई रिफंड नहीं मिलेगा और अमेरिकी सरकार का अरबों डॉलर का राजस्व सुरक्षित रहेगा।

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चीन, रूस और भारत पर बढ़ेगा दबाव

टैरिफ को लेकर ट्रंप के पक्ष में फैसला आने से अमेरिका को चीन, रूस और भारत जैसे देशों पर व्यापारिक दबाव बनाने की रणनीति को खुला कानूनी समर्थन मिल जाएगा। इससे ट्रंप भविष्य में और भी बड़े टैरिफ कदम उठा सकते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट से झटका मिला तो ट्रंप के पास क्या विकल्प?

अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप प्रशासन के खिलाफ आता है, तो सरकार के सामने कुछ सीमित लेकिन अहम रास्ते होंगे। प्रशासन अमेरिकी सीनेट से नया कानून पास कराने की कोशिश कर सकता है। इसके अलावा टैरिफ की रकम का रिफंड किस्तों में देने या कानूनी तरीकों से टालने का रास्ता भी खोजा जा सकता है। यह फैसला सिर्फ ट्रंप या अमेरिका तक सीमित नहीं है। इससे यह तय होगा कि भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति की आर्थिक आपात शक्तियां कितनी व्यापक होंगी और वैश्विक व्यापार में अमेरिका की भूमिका किस दिशा में जाएगी।

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