
ED Raids Builders: दिल्ली-NCR में घर खरीदने वालों से जुड़ी कथित धोखाधड़ी के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने ‘No EMI Till Possession’ के नाम पर होम बायर्स को राहत देने का दावा करने वाली योजनाओं से जुड़े बिल्डरों के ठिकानों पर छापेमारी शुरू की है।
ED की यह कार्रवाई दो अलग-अलग बिल्डर-बैंक नेक्सस मामलों में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घर खरीदारों के नाम पर लिए गए बैंक लोन का पैसा कहां और किस तरह इस्तेमाल किया गया।
‘No EMI Till Possession’ को आमतौर पर Subvention Scheme के नाम से भी जाना जाता है। इस तरह की योजनाओं में होम बायर्स को बताया जाता है कि फ्लैट का कब्जा मिलने तक उन्हें होम लोन की EMI नहीं चुकानी होगी।
इसी भरोसे पर कई खरीदारों ने बैंक से होम लोन लेकर संबंधित प्रोजेक्ट में फ्लैट या अपार्टमेंट बुक किए। आरोप है कि कई मामलों में वर्षों बीत जाने के बाद भी खरीदारों को उनके घर का कब्जा नहीं मिला।
दूसरी ओर, खरीदारों के नाम पर लिए गए बैंक लोन और उससे जुड़ी देनदारियां बनी रहीं। ऐसे में कई लोगों के सामने घर न मिलने के साथ-साथ लोन का आर्थिक बोझ भी खड़ा हो गया।
जांच का सबसे अहम पहलू उन होम बायर्स से जुड़ा है, जिन्होंने बिल्डरों के वादों पर भरोसा करके अपनी जमा पूंजी लगाई और बैंक से होम लोन लिया।
खरीदारों को कथित तौर पर बताया गया था कि प्रोजेक्ट का पजेशन मिलने तक EMI का भुगतान बिल्डर की ओर से किया जाएगा या सबवेंशन स्कीम के जरिए इसकी व्यवस्था होगी।
लेकिन आरोप है कि कई प्रोजेक्ट्स में समय पर निर्माण पूरा नहीं हुआ और खरीदारों को तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं मिल सका। इसके बावजूद उनके नाम पर लिए गए लोन की देनदारी बनी रही।
ED की जांच केवल बिल्डरों के ठिकानों तक सीमित नहीं है। एजेंसी कथित बिल्डर-बैंक नेक्सस की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि-
‘No EMI Till Possession’ जैसी योजनाओं में घर खरीदारों को शुरुआत में आर्थिक राहत का भरोसा दिया जाता है। लेकिन अगर प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं होता, तो खरीदार लंबे समय तक घर और लोन दोनों की समस्या में फंस सकते हैं।
ED की मौजूदा जांच का फोकस इसी पूरे वित्तीय नेटवर्क और कथित मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ियों को खंगालने पर है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट हो सकता है कि होम बायर्स के नाम पर जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कहां किया गया और इस पूरे मामले में किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका रही।
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