Kumbh Mela Star: नाबालिग 'वायरल स्टार' की शादी में फंसे CPM नेता, पूर्व DGP ने गिना डाली दर्जनों संगीन धाराएं

Published : Apr 11, 2026, 10:26 AM IST
Kumbh Mela Star: नाबालिग 'वायरल स्टार' की शादी में फंसे CPM नेता, पूर्व DGP ने गिना डाली दर्जनों संगीन धाराएं

सार

कुंभ मेला की 'वायरल स्टार' नाबालिग की शादी में CPM नेता घिर गए हैं। इस मामले में POCSO और SC/ST एक्ट समेत कई कानूनों के तहत केस दर्ज करने की तैयारी है। फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वालों पर भी कार्रवाई होगी।

तिरुवनंतपुरम: कुंभ मेला की 'वायरल स्टार' के नाम से मशहूर हुई नाबालिग लड़की की शादी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस विवाद में CPM के नेता बुरी तरह घिर गए हैं। वायरल स्टार की शादी में POCSO एक्ट के बाद अब अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के तहत भी केस दर्ज करने की तैयारी है। कहा जा रहा है कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में मदद करने वालों को भी आरोपी बनाया जाएगा।

ये बात ST कमीशन के कानूनी सलाहकार प्रकाश उइके ने एक फेसबुक पोस्ट में कही। प्रकाश ने इस मामले में साजिश का शक जताया है। उनकी मांग है कि शादी कराने वाले केरल के CPM नेताओं की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। वहीं, शादी में शामिल हुए CPM नेता इस केस और विवाद पर चुप्पी साधे हुए हैं। इस बीच, पूर्व DGP टी.पी. सेनकुमार ने बताया है कि इस मामले में कौन-कौन सी धाराएं लगाई जा सकती हैं। उन्होंने 2012 के POCSO एक्ट से लेकर नए भारतीय न्याय संहिता तक के कानूनों का जिक्र किया है।

सेनकुमार ने इन धाराओं का किया जिक्र

POCSO एक्ट, 2012 (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण)

धारा 19 (रिपोर्ट करने की अनिवार्य जिम्मेदारी): अगर किसी को पता चलता है या शक होता है कि किसी बच्चे के साथ यौन अपराध हुआ है या होने वाला है, तो उसे पुलिस या स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट को सूचना देनी होगी। ऐसा न करना एक दंडनीय अपराध है। सूचना देने वाले व्यक्ति को पुलिस सुरक्षा दी जानी चाहिए।

धारा 4: बच्चे के खिलाफ गंभीर यौन हमले के लिए सजा।

धारा 7, 8: यौन इरादे से छूने के बारे में बताती हैं।

2. भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023

धारा 96 (बच्चों को यौन उद्देश्यों के लिए उकसाना): इसमें 18 साल से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण या गलत कामों के लिए उकसाना शामिल है। यह सभी बच्चों पर लागू होता है, चाहे वे लड़के हों या लड़की। सजा: 10 साल तक की कैद और जुर्माना।

धारा 137 (अपहरण): इसमें किसी को भारत से बाहर ले जाना या कानूनी अभिभावक की सहमति के बिना (नाबालिग बच्चों को) ले जाना शामिल है। सजा: 7 साल तक की कैद।

धारा 143 (मानव तस्करी): धमकी देकर, बल प्रयोग करके या लालच देकर किसी का शोषण करने के लिए तस्करी करना अपराध है। अगर पीड़ित बच्चा है, तो सजा 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक हो सकती है। यहां पीड़ित की सहमति कोई मायने नहीं रखती।

धारा 54 (अपराध में मदद करना): अपराध होते समय मदद करने वाले व्यक्ति को भी मुख्य अपराधी ही माना जाएगा।

धारा 64(2)(i): ऐसी महिलाओं के खिलाफ यौन हमला जो सहमति देने की मानसिक स्थिति में नहीं हैं।

धारा 337 (फर्जी दस्तावेज बनाना): सरकारी दस्तावेज या पहचान पत्र (जैसे आधार) फर्जी तरीके से बनाने पर 7 साल तक की कैद हो सकती है।

धारा 234 (फर्जी सर्टिफिकेट देना): कानूनी कामों के लिए जानबूझकर फर्जी सर्टिफिकेट देना भी दंडनीय है।

धारा 174 (चुनाव में गड़बड़ी): चुनाव में अनुचित प्रभाव डालना या किसी और का रूप धारण करना एक साल तक की कैद का अपराध हो सकता है।

3. बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006

धारा 9: 18 साल से कम उम्र की लड़की या 21 साल से कम उम्र के लड़के से शादी करने वाले वयस्क पुरुष के लिए सजा (2 साल तक की कठोर कैद और एक लाख रुपये का जुर्माना)।

धारा 10: बाल विवाह कराने या उसे बढ़ावा देने वालों के लिए सजा।

धारा 11: बाल विवाह न रोकने वाले माता-पिता और अभिभावकों के खिलाफ कार्रवाई।

धारा 12: यह कानून कहता है कि जबरदस्ती, धोखे से या अपहरण करके कराया गया बाल विवाह शुरू से ही अमान्य है।

4. किशोर न्याय अधिनियम, 2015

धारा 83: बच्चों को गैर-कानूनी कामों के लिए इस्तेमाल करने वाले वयस्कों को 7 साल तक की कठोर कैद और 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।

धारा 84: 18 साल से कम उम्र के बच्चों के अपहरण से संबंधित कानून।

5. अन्य कानून

SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1898: अगर कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य के खिलाफ उनकी जाति के कारण ऐसा अपराध करता है, जिसमें 10 साल से ज्यादा की सजा हो, तो दोषी को आजीवन कारावास तक हो सकता है।

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (धारा 18): शादी की उम्र सीमा का उल्लंघन करके शादी करना दंडनीय है। ऐसी शादियों को कानूनी रूप से अमान्य किया जा सकता है।

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