दुनिया की ताकतों में दरार? UN में अमेरिका के खिलाफ एकजुट हुए फ्रांस, रूस और चीन

Published : Apr 03, 2026, 04:38 PM IST
France Russia and China Veto UN Proposal Against Iran Signaling Major Shift in Global Power Balance

सार

UN VETO Against USA: ईरान जंग के बीच संयुक्त राष्ट्र में बड़ा घटनाक्रम हुआ। फ्रांस, रूस और चीन ने 23 साल बाद अमेरिका के खिलाफ एक साथ वीटो कर दिया। होर्मुज को लेकर लाए गए प्रस्ताव को रोक दिया गया, जिससे वैश्विक राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं।

मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच नया समीकरण बनता दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक ऐसा घटनाक्रम हुआ है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। करीब 23 साल बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब फ्रांस, रूस और चीन ने किसी मुद्दे पर एक साथ मिलकर अमेरिका के खिलाफ वीटो कर दिया। यह मामला ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव लाया गया था।

बहरीन का प्रस्ताव और वीटो की कहानी

जानकारी के मुताबिक Bahrain ने होर्मुज को लेकर एक प्रस्ताव United Nations Security Council में पेश किया था। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता तो युद्ध के बीच Iran पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ सकता था। लेकिन मतदान के दौरान France, Russia और China ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो कर दिया। इससे अमेरिका के लिए कूटनीतिक स्थिति कमजोर पड़ती दिखाई दी। संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार होता है। इन पांच देशों में United States, United Kingdom, फ्रांस, रूस और चीन शामिल हैं। इन्हें पी-5 देश कहा जाता है।

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23 साल बाद फिर दिखा ऐसा गठबंधन

इससे पहले ऐसा नजारा साल 2003 में देखने को मिला था, जब Iraq युद्ध के दौरान फ्रांस, रूस और चीन ने अमेरिका की नीति का विरोध किया था। उसके बाद पहली बार तीनों देश किसी मुद्दे पर एक साथ खड़े दिखाई दिए हैं।

फ्रांस ने अचानक क्यों बदला रुख

अब सवाल उठ रहा है कि फ्रांस ने अचानक ईरान के पक्ष में खड़ा होने जैसा कदम क्यों उठाया। इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं।

  1. पहली वजह: Donald Trump लगातार फ्रांस पर सार्वजनिक बयान दे रहे थे। हाल ही में उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron को लेकर भी तंज कसा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक युद्ध की शुरुआत में अमेरिका ने फ्रांस से सलाह नहीं ली थी। बाद में अमेरिका चाहता था कि फ्रांस इस युद्ध में उसका साथ दे, लेकिन मैक्रों ने इससे दूरी बना ली।
  2. दूसरी वजह: मध्य पूर्व की राजनीति में फ्रांस और Israel के बीच भी तनाव की खबरें सामने आई हैं। फ्रांस ने इजराइल के समर्थन में जाने वाले विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगाए हैं।
  3. तीसरी वजह: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक होर्मुज क्षेत्र में फ्रांस और ईरान के बीच एक समझौते की चर्चा है। बताया जा रहा है कि पहली बार फ्रांस के स्वामित्व वाले कंटेनर जहाज को वहां से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई है।

अमेरिका के लिए कूटनीतिक झटका

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यह घटनाक्रम अमेरिका के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व के मुद्दों पर अब फ्रांस रूस और चीन के साथ ज्यादा तालमेल दिखा सकता है।

नाटो को लेकर भी ट्रंप का बड़ा बयान

इस बीच NATO को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है। एक इंटरव्यू में Donald Trump ने कहा कि वह गंभीरता से इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या अब नाटो से बाहर निकलने का समय आ गया है। अगर ऐसा होता है तो यह वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

बदलते विश्व समीकरण का संकेत

ईरान को लेकर संयुक्त राष्ट्र में हुई यह घटना सिर्फ एक वोटिंग नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों के अनुसार यह इस बात का संकेत है कि दुनिया में ताकत का संतुलन धीरे-धीरे बदल रहा है और आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का नया अध्याय देखने को मिल सकता है।

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