ग्रेट पिरामिड का खुला चौंकाने वाला राज? वैज्ञानिकों ने बताया कैसे 60 टन पत्थर ऊपर पहुंचे

Published : Jan 25, 2026, 12:56 PM IST

World Mystery Update: क्या ग्रेट पिरामिड इंसानी ताकत से नहीं, बल्कि किसी छिपी हुई मशीनरी से बना था? नया वैज्ञानिक अध्ययन दावा करता है कि पुली और काउंटरवेट सिस्टम से भारी पत्थर ऊपर उठाए गए। क्या अब हजारों साल पुराना रहस्य सुलझने वाला है?

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Great Pyramid mystery: मिस्र का ग्रेट पिरामिड (Great Pyramid of Giza) दुनिया की सबसे रहस्यमयी और हैरान करने वाली संरचनाओं में से एक है। दशकों से वैज्ञानिक, इतिहासकार और पुरातत्वविद यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि हजारों साल पहले बिना आधुनिक मशीनों के इतनी विशाल इमारत आखिर बनाई कैसे गई। अब एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने इस रहस्य पर फिर से बहस छेड़ दी है। इस नए शोध में दावा किया गया है कि ग्रेट पिरामिड का निर्माण साधारण रैंप से नहीं, बल्कि एक पुली और काउंटरवेट सिस्टम की मदद से किया गया हो सकता है। यह दावा पिरामिड निर्माण की अब तक की सोच को पूरी तरह बदल सकता है।

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क्या पिरामिड सच में इतनी तेजी से बना था?

ग्रेट पिरामिड में करीब 23 लाख चूना पत्थर की ईंटें लगी हैं। हैरानी की बात यह है कि इन ईंटों का वजन 2 टन से लेकर 60 टन तक है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह पूरा पिरामिड लगभग 20 साल में तैयार हुआ, यानी औसतन हर मिनट एक पत्थर अपनी जगह पर रखा गया। अब सवाल उठता है- क्या इतनी भारी ईंटों को सिर्फ रैंप से ऊपर पहुंचाना संभव था? नए अध्ययन के अनुसार, यह लगभग असंभव लगता है। यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने एक वैकल्पिक और ज्यादा व्यावहारिक सिद्धांत पेश किया है।

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पुली और काउंटरवेट थ्योरी क्या कहती है?

न्यूयॉर्क स्थित वील कॉर्नेल मेडिसिन के शोधकर्ता डॉ. साइमन एंड्रियास श्यूरिंग, जिनका अध्ययन प्रतिष्ठित Nature Journal में प्रकाशित हुआ है, कहते हैं कि पिरामिड के अंदर एक तरह की मैकेनिकल प्रणाली काम कर रही थी। इस सिद्धांत के मुताबिक,

  1. पिरामिड के अंदर आंतरिक ढलान वाले रास्ते (internal ramps) थे।
  2. इन रास्तों पर काउंटरवेट से जुड़ी पुली सिस्टम लगी थी।
  3. भारी पत्थरों को स्लेज पर रखकर ऊपर खींचा जाता था।
  4. इससे कम मेहनत में ज्यादा वजन ऊपर पहुंचाया जा सकता था।
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क्या पिरामिड अंदर से बाहर की ओर बना?

शोधकर्ताओं का दावा है कि अगर यह सिद्धांत सही है, तो ग्रेट पिरामिड का निर्माण अंदर से बाहर की ओर हुआ होगा। यानी पहले कोर बना और फिर धीरे-धीरे ऊपर और बाहर की संरचना खड़ी की गई। इससे न सिर्फ निर्माण तेज हुआ, बल्कि भारी पत्थरों को संभालना भी आसान हो गया।

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ग्रैंड गैलरी और एंटेचैंबर का असली काम क्या था?

अब तक माना जाता था कि ग्रैंड गैलरी सिर्फ एक गलियारा थी, लेकिन नए अध्ययन में इसकी दीवारों पर पाए गए घिसाव के निशान बताते हैं कि यहां से लोग नहीं, बल्कि पत्थर खींचे जाते थे। वहीं एंटेचैंबर को पहले लुटेरों से बचाव के लिए बनाया गया कक्ष माना जाता था। लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि यह भी काउंटरवेट सिस्टम का हिस्सा हो सकता है, जो पूरी मशीनरी को कंट्रोल करता था।

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क्या यह खोज इतिहास बदल देगी?

यह नया सिद्धांत अभी पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि प्राचीन मिस्र की इंजीनियरिंग सोच हमारी कल्पना से कहीं आगे थी। आने वाले समय में अगर इसके और सबूत मिलते हैं, तो ग्रेट पिरामिड को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल सकता है।

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