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Hormuz Strait Oil Crisis: रूस ने भारत को भेजे जा रहे क्रूड ऑयल का डेटा देने से किया इनकार! वजह चौंकाने वाली
Russia-India Oil Secret: आखिर रूस भारत को भेजे जा रहे क्रूड ऑयल का असली डेटा क्यों छुपा रहा है? क्रेमलिन का दावा-“बहुत ज़्यादा बुरा चाहने वाले हैं।” क्या US सेंक्शन्स और वेस्ट एशिया तनाव के बीच कोई बड़ा ऑयल गेम खेला जा रहा है?

Russian Crude Oil Export India Data Secret: दुनिया की ऊर्जा राजनीति में एक नया मोड़ सामने आया है। रूस ने साफ कह दिया है कि वह भारत को भेजे जा रहे क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट का पूरा डेटा सार्वजनिक नहीं करेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव (Dmitry Peskov) ने इसकी वजह भी बहुत चौंकाने वाली बताई है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे साफ वजह है-दुनिया में “बहुत ज़्यादा बुरा चाहने वाले” मौजूद हैं, इसलिए यह जानकारी गुप्त रखी जाएगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक तेल बाजार में तनाव बढ़ा हुआ है और कई देश रूस के ऊर्जा व्यापार पर नजर बनाए हुए हैं। रूस का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा राजनीति में नई चर्चा शुरू कर चुका है।
क्या US सेंक्शन्स ने भारत-रूस तेल व्यापार को प्रभावित किया है?
रूस पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वैश्विक तेल व्यापार में काफी बदलाव आया है। खास तौर पर Scott Bessent द्वारा हाल ही में यह घोषणा की गई कि भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी जाएगी। इन प्रतिबंधों की वजह से भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव भी पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार दिसंबर में भारत का रूस से तेल आयात घटकर करीब 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया था, जो पिछले महीनों के मुकाबले कम है। इसके चलते कई भारतीय रिफाइनर अब तेल खरीदने के लिए नए स्रोत तलाश रहे हैं।
अगर रूस से तेल कम हो जाए तो भारत किन देशों से खरीद सकता है?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए उसके लिए लगातार और सस्ती ऊर्जा सप्लाई बहुत जरूरी है। अगर रूस से सप्लाई कम होती है, तो भारत मिडिल ईस्ट, वेस्ट अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों से तेल खरीदने के विकल्प देख रहा है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय कंपनियां इक्वाडोर और वेनेजुएला जैसे देशों से भी क्रूड ऑयल के नए कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि इन देशों से तेल खरीदना अक्सर ज्यादा महंगा पड़ सकता है। इसके बावजूद भारत कोशिश कर रहा है कि उसकी ऊर्जा सप्लाई किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर न रहे।
क्या वैश्विक तनाव भारत की ऊर्जा रणनीति बदल रहा है?
पिछले कुछ सालों में दुनिया की भू-राजनीति तेजी से बदली है। खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी प्रतिबंध और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। भारत भी इसी वजह से अपनी ऊर्जा रणनीति में बदलाव कर रहा है। सरकार और तेल कंपनियां अब अलग-अलग देशों से तेल आयात करने की नीति पर काम कर रही हैं ताकि किसी संकट की स्थिति में सप्लाई प्रभावित न हो।
क्या रूस अभी भी भारत को ज्यादा तेल सप्लाई करना चाहता है?
रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक (Alexander Novak) ने हाल ही में कहा कि उनका देश भारत और चीन को क्रूड ऑयल सप्लाई बढ़ाने के लिए तैयार है। यह बयान उस समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाला तेल ट्रांजिट भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
क्या भारत-रूस तेल संबंध आगे और मजबूत होंगे?
हाल के वर्षों में भारत ने रूस से सस्ता क्रूड ऑयल खरीदकर अपनी ऊर्जा लागत कम रखने की कोशिश की है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों के कारण यह व्यापार अब ज्यादा संवेदनशील हो गया है। रूस द्वारा डेटा गुप्त रखने का फैसला भी इसी बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत माना जा रहा है। ऊर्जा बाजार और वैश्विक राजनीति के इस खेल पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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