
Houthis History: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर है। मक्का के पास हूती ड्रोन को लेकर बढ़े तनाव के बीच एक बार फिर दुनिया की नजर यमन के इस संगठन पर है। मंगलवार, 15 सितंबर को मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को सऊदी एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट कर नष्ट करने का दावा किया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। वहीं हूती पक्ष ने मक्का या किसी दूसरे पवित्र स्थल को निशाना बनाने से इनकार किया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हूती कोई देश या सेना नहीं, बल्कि एक परिवार और कबीले से निकला संगठन है? आइए जानते हैं इनका असली नाम क्या है और कैसे एक पहाड़ी परिवार दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक सऊदी अरब की नाक में दम किए हुए है...
मक्का इस्लाम का सबसे मुकद्दस (पवित्र) शहर है, जहां हर साल दुनिया भर से लाखों लोग हज और उमराह के लिए आते हैं। सऊदी अरब का कहना है कि 2017 में बैलिस्टिक मिसाइल के बाद ये दूसरी बार है जब हूतियों ने मक्का की दिशा में हमला करने की हिमाकत की है। इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों, मस्जिदों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना खुला आतंकवाद है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लाम की मूल भावना के खिलाफ है। दूसरी तरफ हूतियों का दावा है कि उनका मक्का या किसी पवित्र स्थल पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है। वे केवल सऊदी के उन एयरबेस को निशाना बना रहे हैं, जहां से यमन में उनके ठिकानों पर बमबारी की जाती है।
दुनिया जिसे 'हूती' या 'हूथी' कहती है, उस संगठन का आधिकारिक और असली नाम अंसार अल्लाह (Ansar Allah) है, जिसका मतलब 'अल्लाह के मददगार' होता है। इस पूरे संगठन की जड़ें यमन के हुसैन बदरुद्दीन अल-हूती नाम के एक शख्स से जुड़ी हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व बाद में उसके भाई अब्दुल-मलिक अल-हूती के हाथ में आया। हुसैन का संबंध उत्तरी यमन के सादा पहाड़ों में रहने वाले 'हूती' कबीले से था।
1990 के दशक में सादा (Saada) इलाके में एक धार्मिक और सामाजिक आंदोलन उभरा। इसका मकसद मुख्य रूप से जायदी समुदाय के बीच अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना था। इस आंदोलन के शुरुआती दौर में हुसैन अल-हूती एक अहम चेहरा बने। इसे उस समय 'बिलीविंग यूथ' (Believing Youth) यानी अल-शबाब अल-मुमिन के नाम से भी जाना जाता था। शुरुआत में यह आज जैसी सैन्य ताकत नहीं थी। धीरे-धीरे इसमें राजनीति, सरकार के खिलाफ विरोध और फिर हथियारबंद संघर्ष जुड़ता चला गया। यही बदलाव आगे चलकर हूती आंदोलन को यमन की सबसे अहम ताकतों में ले गया।
हूती आंदोलन को समझने के लिए जायदी को समझना जरूरी है। जायदी इस्लाम के शिया परंपरा की एक शाखा है, जिसकी यमन के उत्तरी हिस्से में लंबे समय से मौजूदगी रही है। जायदी और ईरान में बहुसंख्यक शिया परंपरा एक जैसी नहीं हैं। यानी हर जायदी ईरानी शिया नहीं है। हूती आंदोलन की अपनी यमनी धार्मिक और राजनीतिक जड़ें हैं।
उत्तरी यमन में जायदी आबादी वाले इलाकों और सऊदी सीमा के बीच भौगोलिक नजदीकी है। समय के साथ धार्मिक पहचान, सत्ता, सीमा सुरक्षा, यमन की राजनीति और क्षेत्रीय ताकतों की भूमिका, इन सबने विवाद को बड़ा किया। हूती आंदोलन और यमन की सरकार के बीच लड़ाई 2000 के दशक में खुलकर सामने आई। जब यमन की सेना से लड़ते हुए 2004 में हुसैन मारा गया, तो उसके लड़ाकों और समर्थकों को उसके सरनेम यानी 'हूती' के नाम से ही पुकारा जाने लगा। हुसैन अल-हूती की मौत के बाद आंदोलन खत्म नहीं हुआ। उसके नाम से जुड़ा संगठन आगे बढ़ता रहा और नेतृत्व बाद में अब्दुल-मलिक अल-हूती के हाथ में आया। यही वो मोड़ था जब एक स्थानीय आंदोलन धीरे-धीरे बड़े राजनीतिक और सैन्य संगठन में बदलने लगा।
साल 2014 हूती इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है। उस साल हूतियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और देश की सत्ता के समीकरण को उलट दिया। इसके बाद यमन का संघर्ष सिर्फ देश के अंदर की लड़ाई नहीं रहा। 2015 में सऊदी अरब ने अपने सहयोगियों के साथ सैन्य कार्रवाई शुरू की। मकसद हूतियों को पीछे धकेलना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार को समर्थन देना था। इसके बाद सऊदी अरब और हूतियों के बीच लंबा सैन्य टकराव शुरू हुआ।
हूती यमन के ऐसे हिस्सों में मजबूत हुए हैं, जो लाल सागर (Red Sea) के बेहद करीब हैं और लाल सागर के दक्षिण में बाब अल-मंदेब स्ट्रेट (Bab el-Mandeb Strait) है। ये दुनिया के अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है। यानी अगर इस इलाके में तनाव बढ़ता है तो उसका असर सिर्फ यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहता है। जहाजों की आवाजाही, तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार तक इसका असर पहुंच सकता है। सितंबर 2026 में हूतियों की लाल सागर तट पर बढ़त और रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी है। Reuters के अनुसार, हूती बलों ने मोखा और इसके बाद हनीश द्वीपों की ओर बढ़त बनाई है।
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