दुनिया में तेल संकट, लेकिन भारत क्यों नहीं हुआ बेहाल? समझिए मोदी सरकार की रणनीति

Published : May 15, 2026, 04:19 PM ISTUpdated : May 15, 2026, 04:49 PM IST
How India Avoided a Fuel Crisis During the Iran Israel Conflict Despite Global Panic

सार

India Fuel Crisis 2026: ईरान-इज़राइल युद्ध और वैश्विक तेल संकट के बीच भारत कैसे बचा? जानिए कैसे रणनीतिक तेल भंडार, वैकल्पिक सप्लाई रूट, विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा रणनीति ने देश को राशनिंग, महंगाई और ईंधन संकट से दूर रखा।

जब इस साल पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंचा, तब पूरी दुनिया में एक नए ऊर्जा संकट का डर फैल गया था। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें उछलने लगीं, समुद्री शिपिंग रूट असुरक्षित माने जाने लगे और कई देशों ने ईंधन राशनिंग, ट्रैवल कंट्रोल और बिजली बचत जैसे आपात कदम उठाने शुरू कर दिए।

भारत को लेकर भी आशंका जताई जा रही थी। वजह साफ थी, देश अपनी लगभग 90 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। विशेषज्ञों को डर था कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत, गैस संकट और महंगाई की नई लहर देखने को मिल सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दुनिया के कई देशों के मुकाबले भारत इस संकट के दौरान अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा। न बड़े स्तर पर राशनिंग करनी पड़ी, न पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी मची और न ही घरेलू सप्लाई चेन पूरी तरह चरमराई। इसके पीछे कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि पिछले एक दशक में तैयार की गई भारत की लंबी रणनीतिक ऊर्जा नीति थी।

एक ही क्षेत्र पर निर्भरता कम करना बना सबसे बड़ा हथियार

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी तेल आयात नीति में बड़ा बदलाव किया। पहले जहां देश मुख्य रूप से खाड़ी देशों पर निर्भर था, वहीं अब भारत 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है। 2006-07 में भारत केवल 27 देशों से तेल आयात करता था, लेकिन अब रूस, वेनेजुएला, अमेरिका, गुयाना और कई अफ्रीकी देशों से भी बड़े पैमाने पर खरीदारी हो रही है। अप्रैल 2026 में ही भारत ने वेनेजुएला से करीब 1.2 करोड़ बैरल डिस्काउंटेड हेवी क्रूड आयात किया। यही विविधता संकट के समय सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित हुई। जब दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी थी, तब भारत के पास पहले से वैकल्पिक सप्लाई चैन सक्रिय थीं।

होर्मुज संकट के बीच भारत ने तैयार किए वैकल्पिक समुद्री रास्ते

ईरान-इज़राइल तनाव बढ़ने के बाद सबसे बड़ा खतरा समुद्री तेल परिवहन पर था। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग मार्गों में से एक माना जाता है। भारत ने पहले से तैयार रणनीति के तहत ओमान के सोहार और UAE के फुजैराह व खोरफक्कान जैसे वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल बढ़ाया। इससे संवेदनशील समुद्री हिस्सों को बायपास करने में मदद मिली। भारत ने लगभग 60 देशों के साथ समुद्री स्थिरता पर बातचीत में भी हिस्सा लिया, ताकि तेल और LPG सप्लाई प्रभावित न हो। इसी दौरान दुनिया भर में वॉर-रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम करीब 300 प्रतिशत तक बढ़ गए थे, लेकिन भारत ने कूटनीतिक समन्वय और वैकल्पिक रूट्स की मदद से लॉजिस्टिक दबाव को काफी हद तक नियंत्रित रखा।

74 दिनों का तेल और गैस भंडार बना सुरक्षा कवच

भारत के पास मौजूद रणनीतिक और व्यावसायिक पेट्रोलियम रिजर्व इस संकट में बेहद अहम साबित हुए। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार:

  • भारत के पास लगभग 60 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद था
  • करीब 60 दिनों का प्राकृतिक गैस रिजर्व उपलब्ध था
  • LPG का स्टॉक लगभग 45 दिनों की मांग पूरी करने लायक था

कुल मिलाकर भारत के पास लगभग 74 दिनों की ऊर्जा सुरक्षा क्षमता मौजूद थी। सोशल मीडिया पर पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर अफवाहें जरूर फैलीं, लेकिन सरकार लगातार यह कहती रही कि देश में कहीं भी ईंधन की कमी नहीं है।

भारत की रिफाइनिंग ताकत ने संकट को संभाला

भारत आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है। संकट के दौरान भारतीय रिफाइनरियां लगातार उच्च क्षमता पर काम करती रहीं। घरेलू LPG उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई ताकि आयातित गैस पर निर्भरता कम हो सके। सरकार ने Essential Commodities Act, 1955 के तहत रिफाइनरियों को निर्देश दिया कि प्रोपेन, ब्यूटेन और ब्यूटीन का इस्तेमाल घरेलू LPG उत्पादन के लिए प्राथमिकता से किया जाए। इसके साथ ही अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से अतिरिक्त LPG कार्गो भी मंगाए गए ताकि सप्लाई बाधित न हो।

कूटनीति बनी भारत की सबसे बड़ी ताकत

इस पूरे संकट में भारत की विदेश नीति ने भी अहम भूमिका निभाई। भारत ने एक साथ ईरान, इज़राइल, अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ अपने रिश्ते संतुलित बनाए रखे। इसी संतुलन का फायदा ऊर्जा सुरक्षा में मिला। विदेश मंत्री ने UAE के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा, जबकि पेट्रोलियम मंत्री ने कतर के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बातचीत तेज की। यही कारण रहा कि कई देशों की तुलना में भारत को कम लॉजिस्टिक बाधाओं और ज्यादा सुरक्षित शिपिंग एक्सेस का फायदा मिला।

भारतीय नौसेना की सुरक्षा में LPG जहाज MT Sarv Shakti का विशाखापत्तनम पहुंचना भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता का बड़ा उदाहरण माना गया। इस जहाज ने करीब 46,313 टन LPG सुरक्षित पहुंचाई।

किसानों और MSME सेक्टर को भी बचाने की तैयारी

भारत की रणनीति सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रही।

  • खाद सुरक्षा : सरकार ने खरीफ सीजन से पहले करीब 177 लाख टन उर्वरक स्टॉक सुरक्षित रखा। चूंकि उर्वरक उत्पादन प्राकृतिक गैस पर निर्भर करता है, इसलिए यह कदम बेहद अहम माना गया। अधिकारियों के मुताबिक खाद उपलब्धता पिछले स्टॉक की तुलना में करीब 36 प्रतिशत अधिक रही।
  • MSME राहत : ऊर्जा लागत बढ़ने से छोटे उद्योगों पर असर न पड़े, इसके लिए सरकार ने ₹2.5 लाख करोड़ का MSME क्रेडिट गारंटी फ्रेमवर्क तैयार किया।
  • एविएशन सेक्टर को राहत : एयरपोर्ट लैंडिंग और पार्किंग चार्ज में लगभग 25 प्रतिशत तक कटौती की गई ताकि एविएशन फ्यूल महंगा होने के बावजूद घरेलू हवाई किराए बेकाबू न हों।

भारत ने चलाया सबसे बड़ा नागरिक निकासी अभियान

ऊर्जा संकट के साथ-साथ भारत ने हाल के वर्षों का सबसे बड़ा गैर-युद्धकालीन निकासी अभियान भी चलाया। करीब 4.75 लाख भारतीय नागरिकों को पश्चिम एशिया के अस्थिर क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला गया या सहायता पहुंचाई गई। यह संख्या माल्टा और मालदीव जैसे देशों की कुल आबादी के बराबर मानी जा रही है। इस अभियान ने खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीयों के बीच भरोसा बनाए रखने में मदद की।

दुनिया में लगी पाबंदियां, भारत में नहीं दिखा बड़ा संकट

जहां भारत तैयारी और संतुलन पर काम कर रहा था, वहीं कई देशों को कड़े कदम उठाने पड़े।

  • 18 देशों ने फ्यूल राशनिंग और वाहन प्रतिबंध लागू किए
  • 13 देशों ने वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य किया
  • कई देशों ने AC तापमान सीमा तय की
  • श्रीलंका ने ईंधन बचाने के लिए बुधवार को सरकारी छुट्टी घोषित कर दी
  • बांग्लादेश और पेरू ने स्कूल टाइमिंग बदल दी
  • यूरोपीय देशों ने आपात ऊर्जा बचत अभियान शुरू किए

इसके उलट भारत में व्यापक राशनिंग या बड़े घरेलू प्रतिबंध देखने को नहीं मिले।

पीएम मोदी की अपील: घबराहट नहीं, जिम्मेदारी जरूरी

प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से घबराने के बजाय जिम्मेदारी से ईंधन इस्तेमाल करने की अपील की। सरकार ने कारपूलिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, वर्क फ्रॉम होम और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की सलाह दी। साथ ही अनावश्यक विदेशी यात्रा और लक्जरी आयात कम करने की भी अपील की गई। सरकार ने “Make in India” पर फिर जोर देते हुए घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने की रणनीति को आगे बढ़ाया।

संकट टला, लेकिन खतरा खत्म नहीं

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत अभी भी ऊर्जा आयात पर भारी निर्भर है और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भविष्य में फिर चुनौती बन सकते हैं। लेकिन इस संकट ने यह जरूर दिखा दिया कि पिछले एक दशक में तैयार की गई ऊर्जा विविधता, रणनीतिक भंडार, रिफाइनिंग क्षमता और संतुलित विदेश नीति ने भारत को उस स्थिति से बचा लिया, जहां कई देशों को राशनिंग, पाबंदियों और आर्थिक अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की सबसे बड़ी सफलता यही रही कि देश ने घबराहट नहीं, बल्कि तैयारी के दम पर खुद को संभाला।

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