होर्मुज़ संकट: अब 1-2 नहीं, 41 देशों से इनर्जी इंपोर्ट-जानिए मोदी सरकार का सबसे चौंकाने वाला प्लान!

Published : Mar 26, 2026, 12:35 PM IST

भारत ने मध्य पूर्व में सप्लाई बाधा और होर्मुज़ संकट के बीच तेल और LPG इंपोर्ट तेज़ कर दिए। रूसी तेल खरीद, घरेलू LPG उत्पादन 25% बढ़ाया गया, 41 देशों से आयात बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की गई। क्या LPG उत्पादन बढ़ने से घरेलू गैस संकट टल जाएगा?

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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तेल सप्लाई में रुकावट के बीच भारत ने कच्चे तेल और LPG के इंपोर्ट डील तेजी से साइन करना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बताया कि पिछले 11 सालों में भारत ने ऊर्जा आयात को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक फैलाया है। इसका मतलब है कि अब देश ऊर्जा सुरक्षा के लिए कई विकल्प रखता है।

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रूस से तेल खरीदने का क्या है असर?

सूत्रों के मुताबिक, भारत रूस से भी कच्चा तेल खरीदने पर विचार कर रहा है। जब रूस ने यूक्रेन पर युद्ध शुरू किया और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए, तब भारत ने रियायती दरों पर तेल खरीदा था। अमेरिका ने इस खरीद पर आपत्ति जताई थी, यह कहते हुए कि इससे यूक्रेन के युद्ध में पैसा जाएगा। बाद में फरवरी के अंतरिम समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से खरीदकर इस कमी को पूरा करने का रास्ता अपनाया।

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होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर युद्ध, भारत की सप्लाई क्यों प्रभावित?

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही बंद हो गई। यह रास्ता दुनिया के कच्चे तेल के 20-25 प्रतिशत व्यापार के लिए अहम है। भारत के लिए यह रास्ता और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की रोज़ाना 5.5 से 6 मिलियन बैरल की जरूरत का लगभग 40% हिस्सा इसी चैनल से आता है।

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क्या भारत के पास पर्याप्त रिज़र्व है?

पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में बताया कि देश के तीन रणनीतिक भंडारों में लगभग 3.372 मिलियन टन तेल मौजूद है, यानी भंडार की क्षमता का दो-तिहाई हिस्सा। कुल रिज़र्व 74 दिनों के लिए पर्याप्त है, जिसमें तेल मार्केटिंग कंपनियों के पास मौजूद भंडार भी शामिल हैं। इसका मतलब है कि अभी घरेलू सप्लाई सुरक्षित है।

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LPG उत्पादन में बढ़ोतरी, परिवारों को क्या फायदा?

33 करोड़ से अधिक भारतीय परिवार खाना पकाने के लिए LPG पर निर्भर हैं। सरकार ने मार्च में घरेलू उत्पादन में 25% बढ़ोतरी का आदेश दिया है। इसका मतलब है कि आम लोगों को गैस की कमी या घबराहट की ज़रूरत नहीं है।

क्या तेल की कीमतें बढ़ेंगी?

युद्ध और होर्मुज़ पर दबाव के कारण हर दिन 10.7 मिलियन बैरल की कमी हो रही है। मार्च के आखिर तक यह बढ़कर 11.5 मिलियन बैरल तक पहुँच सकती है। अमेरिका-ईरान और इज़राइल के हमलों से रिफाइनरियों और डिपो को हुए नुकसान ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

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अमेरिका की 30 दिन की छूट और सप्लाई की भरपाई

वॉशिंगटन ने भारत को 30 दिन की छूट दी है कि वह पहले से लोड किए गए रूसी तेल और प्रतिबंधित ईरानी तेल को खरीद सके। Kpler के अनुसार, इन छूटों से हर दिन लगभग 5 मिलियन बैरल तेल उपलब्ध होगा। लेकिन अगर मध्य पूर्व से सप्लाई फिर से शुरू नहीं हुई, तो अप्रैल के अंत तक कुल नुकसान 600 मिलियन बैरल तक पहुंच सकता है।

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