डिफेंस सिस्टम फेल, सुरक्षा ढाल बेअसर! भारत की नई हाईपरसोनिक मिसाइल से महाशक्तियों में बढ़ी बेचैनी

Published : May 02, 2026, 08:14 AM IST

भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक ने दुनिया की टेंशन बढ़ा दी-ब्रह्मोस से दोगुनी रफ्तार, स्क्रैमजेट इंजन और प्लाज्मा शील्ड के साथ लगभग ‘अनट्रेसेबल’ हथियार तैयार। DRDO का दावा-कोई डिफेंस सिस्टम नहीं रोक पाएगा। क्या बदलने वाला है वैश्विक युद्ध संतुलन? 

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BrahMos vs Hypersonic Missile: भारत की रक्षा क्षमता एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां युद्ध की परिभाषा ही बदल सकती है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation (DRDO)) अब उस तकनीक के बेहद करीब है, जिसे दुनिया की सबसे घातक और लगभग ‘अनस्टॉपेबल’ हथियार प्रणाली माना जाता है-हाइपरसोनिक मिसाइल। भारत की इस नई हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक ने पड़ोसी देशों-खासतौर पर दुश्मन देशों-की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जिस रफ्तार और तकनीक पर भारत काम कर रहा है, वह पारंपरिक डिफेंस सिस्टम को लगभग बेअसर बना सकती है। यह सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि रणनीतिक बढ़त का संकेत है।

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सुपरसोनिक से दोगुनी रफ्तार: खतरा या सुरक्षा कवच?

जहां ब्रम्होस मिसाइल (BrahMos Missile) लगभग 3,500 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ती है, वहीं नई हाइपरसोनिक मिसाइलें 7,000 से 12,000 किमी/घंटा तक की रफ्तार पकड़ सकती हैं। यह सिर्फ गति का मामला नहीं है-यह ‘रीएक्शन टाइम’ को लगभग खत्म कर देने वाला बदलाव है। इतनी तेज रफ्तार का मतलब है कि दुश्मन के पास प्रतिक्रिया देने का समय ही नहीं बचेगा। रडार इन्हें पकड़ने से पहले ही लक्ष्य पर हमला हो सकता है।

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प्लाज्मा शील्ड और स्क्रैमजेट: विज्ञान की सबसे खतरनाक परत

हाइपरसोनिक मिसाइलों की सबसे रहस्यमयी ताकत है उनकी ‘प्लाज्मा शील्ड’। यह शील्ड मिसाइल को रडार से लगभग अदृश्य बना देती है। स्क्रैमजेट इंजन-जिसका हाल ही में 1,000 सेकंड से ज्यादा सफल परीक्षण हुआ-इन मिसाइलों को हवा की ऑक्सीजन से ही ईंधन जलाने की क्षमता देता है। इसका मतलब है-कम वजन, ज्यादा रफ्तार और लंबी दूरी तक सटीक हमला।

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ग्लाइड मिसाइल: आसमान से गिरता अदृश्य वार

हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल को पहले रॉकेट से अंतरिक्ष की सीमा तक भेजा जाता है। वहां से यह बिना इंजन के ‘ग्लाइड’ करते हुए लक्ष्य तक पहुंचती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है-यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है, जिससे इसे ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है।

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चीन-रूस आगे, अमेरिका पीछे-भारत की एंट्री से बदलेगा संतुलन

रूस (Russia) की ‘Zircon’ और ‘Kinzhal’ तथा चीन (China) की DF-ZF पहले से तैनात हैं। वहीं United States अमेरिका इस दौड़ में कुछ पीछे नजर आता है। ऐसे में भारत का तेजी से आगे बढ़ना वैश्विक शक्ति संतुलन को नया आकार दे सकता है।

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अग्नि-6: एक मिसाइल, कई निशाने-परमाणु ताकत का नया अध्याय

DRDO प्रमुख के अनुसार, Agni-6 पूरी तरह तैयार है। सरकारी मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू होगा। यह मिसाइल 10,000-12,000 किमी तक मार कर सकती है और एक साथ कई परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होगी। हाइपरसोनिक तकनीक सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि रणनीतिक बढ़त है। यह भविष्य के युद्धों को तेज, घातक और लगभग अनियंत्रित बना सकती है। भारत की यह छलांग जहां सुरक्षा को मजबूत करेगी।

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