Iran US Secret Deal: क्या अमेरिका और ईरान के बीच सच में कोई सीक्रेट MoU करीब है? इसमें कौन-कौन से बड़े मुद्दे शामिल हैं? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान ने क्या बड़ा एलान किया है? इस सीक्रेट डील से इजरायल की नींद क्यों उड़ गई है? क्या इस डील से इजराइल और मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति बदल सकती है? 

US-Iran Secret MoU Inside Story: मिडिल ईस्टसे इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है। बरसों से एक-दूसरे के जानी दुश्मन रहे अमेरिका और ईरान के बीच परदे के पीछे एक बड़ा खेल हो गया है। दोनों देश एक बेहद सीक्रेट समझौते के करीब पहुंच गए हैं, जिसे 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (Islamabad MoU) का नाम दिया गया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची (Seyed Abbas Araghchi) ने खुद एक इंटरव्यू में इस सीक्रेट डील के जो राज खोले हैं, उसने पूरी दुनिया के बाजारों और खासकर इजराइल को हिलाकर रख दिया है। इस समझौते में कुछ ऐसी शर्तें हैं, जो दुनिया का पूरा बिजनेस और जंग का नक्शा बदल सकती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि यह डील अभी फाइनल नहीं हुई है और इसके कंटेंट को लेकर किसी भी तरह की अटकलें जल्दबाजी होंगी।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

Islamabad MoU पर बड़ा दावा

अरघची के मुताबिक, जिस 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' की बात हो रही है, वह अब अपने फाइनल फेज के बेहद करीब पहुंच चुका है। उन्होंने X पर लिखा, 'यह समझौता पहले कभी इतना करीब नहीं था।' हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि पूरा टेक्स्ट फाइनल होने के बाद ही सार्वजनिक किया जाएगा। अभी बातचीत कई चरणों में चल रही है।

US-Iran MoU में क्या-क्या शामिल हो सकता है?

होर्मुज जलमार्ग पर चार्ज वसूलेगा ईरान, अब मुफ्त नहीं गुजरेंगे जहाज

इस डील में सबसे चौंकाने वाला खुलासा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर हुआ है। ईरानी विदेश मंत्री ने साफ कह दिया है कि यह समुद्री रास्ता उनके और ओमान के अधिकार क्षेत्र में आता है। सालों से यहां जहाजों की आवाजाही बिल्कुल मुफ्त थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब यहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और तेल के टैंकरों को टैक्स (charges) देना होगा। ईरान इसे अपने सबसे बड़े हथियार (Deterrent Tool) की तरह इस्तेमाल कर रहा है। अगर यह टैक्स लागू हुआ, तो ग्लोबल ट्रेड यानी वैश्विक व्यापार में हड़कंप मचना तय माना जा रहा है। दुनिया का करीब 20 से 30 प्रतिशत कच्चा तेल 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रास्ते से ही गुजरता है। अगर यहां टैक्स लगा, तो आने वाले दिनों में भारत सहित पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं!

अमेरिका से 'नो-वॉर' का वादा, इजराइल की बढ़ी टेंशन

इस गुप्त समझौते (MoU) में अमेरिका और ईरान के बीच कुछ बहुत बड़े वादे हुए हैं, जिन्होंने इजराइल की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ड्राफ्ट के तहत अमेरिका ने लिखित में भरोसा दिया है कि वह ईरान के खिलाफ कभी युद्ध शुरू नहीं करेगा और न ही उसे धमकियां देगा। अमेरिका ईरान के खिलाफ समंदर में की गई अपनी नाकाबंदी को हटाएगा और ईरान के जो अरबों डॉलर के फंड फ्रीज हैं, उन्हें रिलीज करने का रास्ता साफ किया जाएगा। दोनों देश एक-दूसरे के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देंगे।

लेबनान में जंग का अंत

इस समझौते के जरिए लेबनान समेत सभी मोर्चों पर चल रही जंग को पूरी तरह खत्म करने का ऐलान किया जाएगा। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि वह लेबनान को कभी अकेला नहीं छोड़ेगा और इजराइल को दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटानी ही होगी। ईरानी विदेश मंत्री अरघची के मुताबिक, इस 'इस्लामाबाद MoU' में यह भी जय हुआ है कि युद्ध के बाद लेबनान और प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण (Reconstruction) पर बातचीत अगले फेज में होगी।

परमाणु मुद्दा अभी होल्ड पर

ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम (यूरेशियम संवर्धन) और प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने के मुद्दे को अभी आखिरी चरण के लिए टाल दिया गया है। ईरान ने साफ किया है कि वह अमेरिका की कड़ी न्यूक्लियर शर्तें इस स्टेज पर नहीं मानेगा।

इजराइल क्यों है परेशान

इजराइल को डर है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच यह दोस्ती हो गई, तो ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध कमजोर पड़ जाएंगे और मिडिल ईस्ट में उसकी ताकत बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। ईरान का आरोप है कि इजराइल इस डील को तोड़ने की पूरी कोशिश कर रहा है।

अमेरिका-ईरान की डील कब तक फाइनल होगी?

ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि बातचीत के दौरान इस ड्राफ्ट को कई बार बदला जा चुका है। यह समझौता अभी पूरी तरह फाइनल नहीं हुआ है, इसलिए इस पर अटकलें लगाने से बचना चाहिए। ईरान की 'सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' इस पूरी बातचीत पर नजर रखे हुए है। ईरान के भीतर भी कुछ लोग इस डील के पक्ष में हैं और कुछ इसके खिलाफ हैं। अंतिम फैसला सभी की सहमति के बाद ही होगा। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी भी दी है कि अमेरिका का पुराना रिकॉर्ड वादे तोड़ने का रहा है, इसलिए अगर इस बार शर्तों को जमीन पर लागू नहीं किया गया, तो आगे कोई बातचीत नहीं होगी।