How Educated is Nandan Nilekani? NEET पेपर लीक के बाद मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है, जिससे अब कभी पेपर और एग्जाम में कोई गड़बड़ी नहीं होगी। इसके लिए टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी की अगुवाई में एक हाई-पावर कमेटी बनेगी जो परीक्षा को लेकर सुधार करेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा सुधारों पर बड़ा फैसला किया है। पीएम ने कहा-दोस्तों जिन लोगों ने छात्रों के फ्यूचर से खिलवाड़ किया है वह जेल में बंद हैं। वहीं आने वाले समय में किसी तरह का और कोई पेपर लीक ना हो इसके लिए हम कड़े कदम उठा रहे हैं। इसलिए नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई पावर टास्क फोर्स गठित होगी। जो यह टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था में सुधार लाने का काम करेगी। जिससे एग्जाम के प्रणाली में ट्रांसपैरेंट और एडवांस टेक्लोलॉजी युक्त बन सके। तो आइए जानते हैं कौन हैं टेक्नॉलीज एक्सपर्ट नंदन नीलकेणी और कितने पढ़े लिखे हैं?

कौन हैं नंदन नीलकेणी?

नंदन नीलकेणी भारत ही नहीं, दुनिया के फेमस टेक्नो एक्सपर्ट में से एक हैं। जिन्होंने सबसे पहले भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखी थी। नीलकेणी ने साल 1981 में एन.आर. नारायण मूर्ति और अपने 5 अन्य सहयोगियो के साथ मिलकर इन्फोसिस कंपनी बनाई थी। जो डिजिटल इंडिया की पहली कंपनी थी। इस दौरान उन्होंने इंफोसिस को विश्व स्तर पर पहुंचाया। इस दौरान 2002 से 2007 तक इन्फोसिस के सीईओ रहे। हालांकि बाद में उन्होंने इंफोसिस को छोड़ दिया था।

कितने पढ़े लिखे हैं नंदन नीलकेणी

2 जून 1955 को बेंगलुरु में एक कोंकणी परिवार में जन्में नंदन नीलकेणी ने अपनी शुरूआती एजुकेशन बेंगलुरु और धारवाड़ में पूरी की। इसके बाद उन्होंने देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिक की।

देश को नीलकेणी ने दी डिजिटल की पहचान

बता दें कि नंदन नीलेकेणी वह शख्स हैं, जिन्होंने कृषि प्रधान भारत देश को डिजिटल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। साल 2009 में कांग्रेस की डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने उन्होंने कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया था। इसके अलावा 2016 में उन्होंने भारत सरकार की उस समिति का भी नेतृत्व किया था, जिससे देश में यूपीआई जैसे डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा मिला। इसके अलावा नीलकेणी के कई अहम योगदान हैं, जिससे भारत में डिजिटल क्रांति आई है। उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हे 2006 में पद्म भूषण से सम्मानित कर चुकी है।