क्या ट्रंप ने शांति समझौते की घोषणा में जल्दबाज़ी कर दी, जबकि ईरान कह रहा है कि अभी कुछ भी तय नहीं हुआ? क्या वीकेंड में होने वाली कथित डील आखिरी समय में टूट सकती है, क्योंकि ईरान अपनी “रेड लाइन्स” पर अड़ा है? क्या ईरान सचमुच न्यूक्लियर हथियार छोड़ने को तैयार है, या ट्रंप का दावा अभी सिर्फ राजनीतिक बयान साबित होगा?

US Iran Peace Deal: मध्य-पूर्व (Middle East) से इस वक्त एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जिसने न सिर्फ वैश्विक राजनीति के समीकरणों को हिलाकर रख दिया है, बल्कि पूरी दुनिया को एक अनसुलझे रहस्य के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ईरान के साथ 'युद्ध खत्म' कर दिया है और एक ऐतिहासिक शांति समझौते का मसौदा तैयार हो चुका है। लेकिन दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए जो बयान दिया है, उसने इस पूरी 'डील' को एक बेहद सस्पेंसिव और थ्रिलर मोड़ दे दिया है। आखिर बंद कमरों के पीछे क्या खेल चल रहा है? आइए इस रहस्य की परतों को खोलते हैं।

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ओवल ऑफिस से आया वो 'चौंकाने वाला' दावा: युद्ध खत्म होने की इनसाइड स्टोरी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस से पत्रकारों से बात करते हुए एक ऐसा धमाका किया, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ होने जा रहे इस शांति समझौते पर इसी सप्ताहांत (वीकेंड) में यूरोप के भीतर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप ने यहाँ तक साफ कर दिया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस ऐतिहासिक क्षण के गवाह बनने के लिए खुद इस हस्ताक्षर समारोह में शामिल हो सकते हैं।

क्या परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद?

ट्रंप का दावा है कि ईरान हमेशा के लिए परमाणु हथियार विकसित न करने पर सहमत हो गया है। उन्होंने इसे समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। हालांकि ईरान ने इस दावे की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है। ट्रंप ने एक रैली के दौरान गरजते हुए कहा, "शायद आपको अभी तक पता न चला हो, लेकिन हमने ईरान के साथ युद्ध को खत्म कर दिया है।" ट्रंप के अनुसार, इस बेहद मजबूत मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तहत ईरान हमेशा-हमेशा के लिए परमाणु हथियार बनाने की अपनी जिद छोड़ने को तैयार हो गया है। इतना ही नहीं, स्टॉक मार्केट से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने तक के बड़े-बड़े दावे वाशिंगटन से किए जा चुके हैं।

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ईरान की 'रेड लाइन्स': तेहरान का वो पलटवार जिसने अमेरिका की उम्मीदों पर पानी फेर दिया!

जैसे ही ट्रंप की इस 'महा-डील' की गूंज दुनिया भर के मीडिया में फैली, ईरान ने एक ऐसा बयान जारी किया जिसने अमेरिकी प्रशासन के दावों की हवा निकाल दी। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के हवाले से कड़े शब्दों में कहा: "अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है। समझौते पर हस्ताक्षर करने का समय और स्थान केवल एक कोरी अटकलें हैं।"

ट्रंप के दावे पर तेहरान ने क्या कहा?

तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह बातचीत की मेज पर तो है, लेकिन अपनी "रेड लाइन्स" (अहम शर्तों) से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। बघाई ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि हालांकि बातचीत का एक बड़ा हिस्सा तय हो चुका था, लेकिन ट्रंप प्रशासन लगातार अपना रुख बदल रहा है। ईरान के इस सख्त और सस्पेंस भरे रुख ने यह साफ कर दिया है कि यह डील जितनी आसान दिख रही है, उतनी है नहीं।

खार्ग द्वीप पर कब्जे की धमकी और वो 'सीक्रेट' मिलिट्री प्रेशर का रहस्य

इस पूरी कहानी का सबसे रहस्यमयी और डरावना हिस्सा वो सैन्य दबाव है, जिसका जिक्र खुद डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। गुरुवार की सुबह तक माहौल बेहद तनावपूर्ण था। ट्रंप ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र, यानी खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर कब्जा करने और ईरान पर अब तक का सबसे "ज़ोरदार हमला" करने की खुली धमकी दी थी। लेकिन फिर अचानक कुछ ही घंटों के भीतर ऐसा क्या हुआ कि ट्रंप ने अपने सुनियोजित हमलों को रद्द कर दिया? ट्रंप का दावा है कि अमेरिका द्वारा की गई भारी सैन्य कार्रवाई और इस 'ज़बरदस्त मार' के डर से ही ईरान घुटनों पर आया और समझौते के लिए तैयार हुआ। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वाकई ईरान इस खौफनाक दबाव के आगे झुक गया है, या फिर यह ईरान की कोई नई कूटनीतिक चाल है?

इजराइल का कनेक्शन और मिडिल ईस्ट के ६ देशों से ट्रंप की वो गुप्त बातचीत!

इस सस्पेंस ड्रामा में सिर्फ अमेरिका और ईरान ही शामिल नहीं हैं। ट्रंप ने पर्दे के पीछे से इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक बहुत बड़ा भरोसा दिलाया है। ट्रंप के वादे के मुताबिक, इस अंतिम समझौते में:

  • ईरान के पूरे परमाणु बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जाएगा।
  • ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमताओं पर सख्त सीमाएं थोपी जाएंगी।
  • आतंकवादी समूहों को मिलने वाले ईरानी समर्थन पर हमेशा के लिए पूर्ण विराम लगाया जाएगा।

नेतन्याहू ने भले ही कहा हो कि इजराइल इस बातचीत का प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं है, लेकिन इजराइल की सुरक्षा शर्तें इस डील की रीढ़ हैं। इसके अलावा, ट्रंप ने कतर, यूएई (UAE), सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और पाकिस्तान जैसे ६ देशों के शीर्ष नेताओं से भी इस नए दौर की बातचीत को लेकर गुप्त चर्चा की है।

क्या वाकई हस्ताक्षरित होगी यह 'सीक्रेट डील' या बढ़ेगा महायुद्ध का खतरा?

फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले वीकेंड में यूरोप की धरती पर क्या वाकई कोई ऐतिहासिक समझौता आकार लेने जा रहा है, या फिर यह सिर्फ एक कूटनीतिक छलावा है? एक तरफ ट्रंप अपनी जीत का डंका बजा रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान अपनी 'रेड लाइन्स' का कवच लेकर अड़ा हुआ है। इस महा-शतरंज के खेल में ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका फैसला आने वाले कुछ घंटे तय करेंगे। लेकिन एक बात साफ है-मध्य-पूर्व की शांति इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है, जहाँ एक भी गलत कदम पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आग में झोंक सकता है।