
Lockdown in india Explained: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और गूगल पर एक शब्द तेजी से ट्रेंड कर रहा है “Lockdown in India”। इसकी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह बयान है, जिसमें उन्होंने लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से दुनिया के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है और हमें कोरोना जैसी मुश्किल परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
पीएम के इस बयान के बाद कई लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि क्या देश में फिर से लॉकडाउन लग सकता है? क्या हालात सच में इतने गंभीर हो गए हैं? इन सवालों का जवाब समझने के लिए पहले पूरी स्थिति को समझना जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा हालात को दशकों का सबसे गंभीर ऊर्जा संकट माना जा रहा है। रिपोर्ट बताती है कि पूरी दुनिया में हर दिन करीब 1.1 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है।
अगर इतिहास से तुलना करें तो 1970 के दशक में आए तेल संकट के दौरान दुनिया को लगभग 50 लाख बैरल प्रतिदिन का नुकसान हुआ था। यानी मौजूदा स्थिति उससे भी कहीं ज्यादा गंभीर मानी जा रही है। पश्चिम एशिया के कई अहम इलाकों से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण इसका असर कई देशों पर दिखने लगा है।
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ऊर्जा संकट की आशंका के बीच फिलीपींस ने बड़ा कदम उठाया है। वहां की सरकार ने नेशनल एनर्जी इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने चेतावनी दी है कि देश की ईंधन सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है।
स्थिति संभालने के लिए फिलीपींस में कुछ खास कदम उठाए गए हैं-
फिलहाल फिलीपींस के पास लगभग 45 दिनों का ईंधन स्टॉक मौजूद बताया जा रहा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर एशिया के कई देशों में दिखाई देने लगा है।
इन कदमों का मकसद ईंधन और बिजली की खपत को कम करना है।
भारत के लिए भी यह चुनौती आसान नहीं है, क्योंकि देश की बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई खाड़ी देशों से होती है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से लगभग 50 प्रतिशत तेल और गैस की आवाजाही होती रही है। हालांकि हाल के तनाव के कारण सप्लाई में कुछ बाधाएं आई हैं। कई जगहों पर एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें भी देखने को मिली हैं। लेकिन सरकार ने हालात संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं-
सरकार के मुताबिक भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है और करीब 65 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त रिजर्व बनाने पर काम चल रहा है। पिछले 11 सालों में भारत ने अपनी रिफाइनिंग क्षमता भी काफी बढ़ा ली है, जिससे आपूर्ति को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत में कोरोना जैसा लॉकडाउन लग सकता है? मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है। कोरोना एक स्वास्थ्य आपदा थी, जबकि मौजूदा संकट ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा है। इसलिए कोरोना जैसे सख्त लॉकडाउन की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।
अगर हालात ज्यादा गंभीर होते हैं तो सरकार कुछ सीमित कदम उठा सकती है, जैसे-
सरकार का फोकस ऊर्जा बचत और सप्लाई संतुलन पर रहेगा।
लोकसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध लंबे समय तक असर डाल सकता है। इसलिए देश को तैयार रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत ने कोरोना महामारी के दौरान भी एकजुट होकर चुनौतियों का सामना किया था और अब भी उसी तरह संयम और धैर्य के साथ काम करना होगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी साफ किया कि ऐसे समय में कुछ लोग काला बाजारी और जमाखोरी की कोशिश करते हैं। सरकार ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रख रही है। उन्होंने कहा कि जहां भी इस तरह की शिकायतें मिलेंगी, वहां तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट की चिंता जरूर बढ़ा दी है। कई देश पहले ही एहतियाती कदम उठा चुके हैं। भारत भी अपनी तैयारी मजबूत करने में जुटा है। हालांकि फिलहाल देश में लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं है। सरकार का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और तैयारी जरूरी है। आने वाले दिनों में दुनिया की ऊर्जा स्थिति किस दिशा में जाती है, उसी पर आगे की रणनीति तय होगी।
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