
Monsoon Rainfall Update 2026: भारत में मानसून की स्थिति को सिर्फ एक-दो हफ्तों की बारिश के आधार पर आंकना सही नहीं माना जाता। खासकर El Niño और भारतीय मानसून के बीच संबंध को समझने के लिए पूरे मौसम के बारिश के आंकड़ों को देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगस्त के पहले दो हफ्तों में बारिश के उतार-चढ़ाव ने भी यही संकेत दिया है।
अगस्त के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हुई, जिससे देश में मानसून की संचयी कमी कुछ कम हुई। 1971-2020 के औसत को भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD बारिश के प्रदर्शन को मापने के लिए Long Period Average (LPA) मानता है। अगस्त के पहले सप्ताह के बाद संचयी बारिश की कमी 9 फीसदी तक आ गई थी, जो 5 जून के बाद सबसे कम स्तर था।
अगस्त के दूसरे सप्ताह में बारिश कमजोर रहने से स्थिति फिर बदल गई। इस दौरान अगस्त की बारिश में करीब 10.5 फीसदी की कमी दर्ज हुई। इसका असर पूरे मानसून के संचयी आंकड़े पर भी पड़ा और बारिश की कमी बढ़कर 10.5 फीसदी हो गई। यानी यह आंकड़ा 31 जुलाई के स्तर पर वापस पहुंच गया।
हालांकि संचयी बारिश की कमी 10.5 फीसदी तक पहुंच गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देश में बारिश की कमी वाले इलाकों का क्षेत्र अचानक बहुत बढ़ गया है। IMD के मुताबिक 20 से 59 फीसदी स्थानीय कमी वाले क्षेत्र को ‘Deficient’ और 60 फीसदी या उससे अधिक कमी वाले क्षेत्र को ‘Large Deficient’ श्रेणी में रखा जाता है।
31 जुलाई को देश के करीब 46.2 फीसदी क्षेत्र में बारिश सामान्य से कम थी। 7 अगस्त को यह आंकड़ा घटकर 45.3 फीसदी हुआ और 14 अगस्त तक मामूली बढ़त के साथ 45.4 फीसदी रहा। वहीं सामान्य से अधिक बारिश वाले क्षेत्रों का हिस्सा भी 7 अगस्त के 16.6 फीसदी से बढ़कर 14 अगस्त को 16.7 फीसदी हो गया।
मानसून की भौगोलिक स्थिति में हालांकि काफी बदलाव देखने को मिला है। केरल, तमिलनाडु, झारखंड, असम और हरियाणा में 31 जुलाई की तुलना में बारिश की कमी वाले क्षेत्र में राज्य के कुल क्षेत्रफल के लिहाज से करीब 10 फीसदी तक कमी आई है। उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में भी यह कमी 5 फीसदी से अधिक रही।
इसके विपरीत तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में 31 जुलाई के बाद बारिश की कमी वाले क्षेत्र में 5 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
El Niño और भारतीय मानसून के बीच संबंध पूरे देश में समान नहीं है। समय के साथ मध्य भारत में इस संबंध की मजबूती कमजोर हुई है, जबकि उत्तर और दक्षिण भारत में इसका प्रभाव अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। इसलिए सिर्फ कुछ दिनों की बारिश के आधार पर El Niño के प्रभाव का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
मानसून की अंतिम स्थिति का आकलन 30 सितंबर को सीजन खत्म होने के बाद अधिक स्पष्ट रूप से किया जा सकेगा। फिलहाल बारिश का प्रदर्शन IMD के पूरे सीजन के अनुमान से बहुत दूर नहीं है। ऐसे में आने वाले हफ्तों की बारिश और उसके भौगोलिक वितरण पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
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