Who is Sukhbir Singh Sandhu Vivek Joshi: सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी कौन हैं? चुनाव आयोग में 10 महीनों में 14 बार आपत्ति क्यों जताई? जानिए दोनों का एजुकेशन, करियर समेत जरूरी डिटेल्स।

Sukhbir Singh Sandhu Vivek Joshi Profile: चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर इन दिनों दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की लिखित आपत्तियां चर्चा में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ने पिछले करीब 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार आयोग के फैसलों और काम करने के तरीके पर आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गईं। जानिए कौन है सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, उनका एजुकेशन, करियर समेत जरूरी डिटेल्स।

कौन हैं सुखबीर सिंह संधू?

सुखबीर सिंह संधू 1988 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उत्तराखंड कैडर से आते हैं। वे 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त बने। इससे पहले वे जुलाई 2021 से जनवरी 2024 तक उत्तराखंड के मुख्य सचिव रहे। 2019 से 2021 के बीच वे एनएचएआई के चेयरमैन भी रहे। फरवरी 2024 में उन्होंने कुछ समय के लिए लोकपाल के सचिव की जिम्मेदारी संभाली थी।

संधू हरिद्वार, गौतम बुद्ध नगर यानी नोएडा और ऊधम सिंह नगर के कलेक्टर भी रह चुके हैं। 2007 से 2014 के बीच वे तीन राजनीतिक दलों से जुड़े चार मुख्यमंत्रियों के प्रमुख सचिव भी रहे। उन्होंने अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से इतिहास में मास्टर्स और कानून की पढ़ाई की है।

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कौन हैं विवेक जोशी?

विवेक जोशी 1989 बैच के आईएएस अधिकारी और हरियाणा कैडर से हैं। वे 19 फरवरी 2025 को चुनाव आयुक्त बने। इससे पहले वे हरियाणा के मुख्य सचिव रहे। केंद्र में उन्होंने कपड़ा, महिला एवं बाल विकास और वित्त से जुड़े मंत्रालयों में काम किया।

हरियाणा में वे जींद, हिसार और पंचकूला के डिप्टी कमिश्नर और अंबाला के डिविजनल कमिश्नर रह चुके हैं। वे आरबीआई और एसबीआई के बोर्ड सदस्य भी रहे हैं। जोशी ने जिनेवा के ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट से इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में पीएचडी और रुड़की यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई किया है।

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आखिर 14 आपत्तियां किस बात पर थीं?

  • दोनों की आपत्तियां नए वोटरों के फॉर्म-6 में बदलाव, आयोग की मंजूरी के बिना जारी हो रहे आधिकारिक कम्युनिकेशन, अधिकारियों के विदेश दौरों, वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण, आईटी सिस्टम तक राज्य अधिकारियों की पहुंच और पश्चिम बंगाल में दायर अपीलों जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं।
  • संधू ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को “अनऑथराइज्ड और इलीगल” बताया था। वहीं जोशी ने वोटर डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण पर चिंता जताते हुए ऑडिट की जरूरत बताई थी।
  • गोवा में एक सॉफ्टवेयर समस्या को लेकर भी सवाल उठा, जहां अधिकारियों ने 97 वोटरों को योग्य माना, लेकिन सिस्टम में उनके नाम बहाल करने का विकल्प समय पर उपलब्ध नहीं हो पाया।