58 साल का कपल, शादी के 46 वर्ष और अब मांगा तलाक, हाई कोर्ट ने कर दिया इनकार, जानिए क्यों?

Published : Feb 15, 2026, 12:21 PM IST

Rajasthan High Court Divorce: 58 साल की शादी के बाद बुज़ुर्ग कपल ने तलाक मांगा, लेकिन हाईकोर्ट ने साफ मना कर दिया। दहेज FIR, संपत्ति विवाद और अवैध संबंधों के आरोप लगे-फिर भी कोर्ट बोला: छोटी बहस क्रूरता नहीं, इतनी लंबी शादी तोड़ना नुकसानदायक होगी।

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जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) से जुड़ा एक फैसला इन दिनों काफ़ी चर्चा में है। मामला एक ऐसे बुज़ुर्ग दंपती का है, जिनकी शादी को पूरे 58 साल हो चुके थे। पति ने तलाक की मांग की, लेकिन कोर्ट ने साफ़ शब्दों में इसे खारिज कर दिया। कोर्ट का कहना था कि छोटी-मोटी बहस, घरेलू तनाव और संपत्ति विवाद को क्रूरता नहीं कहा जा सकता। आइए, आसान भाषा में समझते हैं पूरा मामला।

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1967 से 2025 तक: 58 साल की शादी की कहानी

इस बुज़ुर्ग कपल की शादी 29 जून 1967 को हुई थी। दोनों ने लगभग 46 साल तक (2013 तक) बिना किसी बड़ी शिकायत के साथ जीवन बिताया। बच्चे हुए, परिवार बढ़ा और सामाजिक सम्मान भी बना रहा। लेकिन बाद के वर्षों में संपत्ति और पारिवारिक मतभेद सामने आए, जिसने रिश्ते में तनाव पैदा कर दिया।

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क्या शादीशुदा ज़िंदगी में हर झगड़ा तलाक की वजह बन सकता है?

  • पुलिस जांच में FIR को मनगढ़ंत बताया गया।
  • इससे उसकी समाज में बेइज्जती हुई।
  • पत्नी एक संपत्ति बड़े बेटे के नाम करना चाहती थी।
  • जबकि वह संपत्ति दोनों बेटों में बराबर बांटना चाहता था।
  • पत्नी उस पर अवैध संबंधों के झूठे आरोप लगाती थी।
  • पति के मुताबिक, इन सब बातों से उसे मानसिक पीड़ा हुई।
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पति ने तलाक क्यों मांगा?

पति ने 26 मई 2014 को फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी। उसका कहना था कि पत्नी ने 2014 में दहेज उत्पीड़न की FIR दर्ज कराई। पुलिस जांच में FIR को मनगढ़ंत बताया गया। इससे उसकी समाज में बेइज्जती हुई। पत्नी एक संपत्ति बड़े बेटे के नाम करना चाहती थी। जबकि वह संपत्ति दोनों बेटों में बराबर बांटना चाहता था। पत्नी उस पर अवैध संबंधों के झूठे आरोप लगाती थी। पति के मुताबिक, इन सब बातों से उसे मानसिक पीड़ा हुई।

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पत्नी का पक्ष क्या था?

पत्नी ने पति के सभी आरोपों को नकार दिया। उसका कहना था कि पति परिवार की संपत्ति को बर्बाद कर रहा है। छोटे भाई के दबाव में आकर तलाक की अर्जी दी। पति के अवैध संबंध थे। उसने अपने कमरे में दूसरी महिला को बुलाया। उसी झगड़े के बाद FIR दर्ज कराई। जिस संपत्ति को लेकर विवाद है, वह उसने खुद खरीदी थी।

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फैमिली कोर्ट और हाई कोर्ट का रुख

भरतपुर फैमिली कोर्ट ने पहले ही पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद पति ने राजस्थान हाई कोर्ट में अपील की। यह मामला Rajasthan High Court की डिवीजन बेंच के सामने आया। बेंच में जस्टिस सुदेश बंसल (Justice Sudesh Bansal) और जस्टिस अनिल कुमार उपमान (Justice Anil Kumar Upman) शामिल थे।

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कोर्ट ने तलाक क्यों ठुकराया?

राजस्थान हाई कोर्ट की डबल बेंच ने अपने फैसले में कहा कि शादीशुदा जीवन में उतार-चढ़ाव सामान्य हैं। छोटी बहस या असहमति को क्रूरता नहीं कहा जा सकता। 58 साल साथ रहने के बाद मानसिक सहनशीलता बढ़ जाती है। संपत्ति विवाद तलाक का ठोस आधार नहीं है। तलाक से न सिर्फ पत्नी, बल्कि पूरे परिवार की सामाजिक इज्ज़त को नुकसान होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस उम्र में रिश्ते तोड़ने से ज़्यादा ज़रूरी उन्हें संभालना है।

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क्यों खास है यह फैसला? (Why This Judgment Matters)

यह फैसला उन सभी मामलों के लिए मिसाल है, जहां बुज़ुर्ग दंपती तलाक की मांग करते हैं। संपत्ति विवाद को क्रूरता बताया जाता है। लंबे वैवाहिक जीवन को नजरअंदाज़ किया जाता है। कोर्ट ने साफ संदेश दिया कि हर पारिवारिक विवाद का समाधान तलाक नहीं होता।

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