Iran Tanker Attack में मारे गए देवनंदन प्रसाद सिंह आखिर कौन थे? जिनके परिवार ने खोला बड़ा राज!

Published : Mar 14, 2026, 10:22 AM IST

क्या मुंबई के भारतीय नाविक देवनंदन प्रसाद सिंह को सच में युद्ध क्षेत्र में भेजा गया था? इराक के बसरा के पास MT Safesea Vishnu तेल टैंकर पर ईरानी हमले में उनकी मौत के बाद परिवार ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। क्या कॉर्पोरेट दबाव ने उन्हें खतरे में डाला?

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Indian Sailor Killed Iran Attack: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक दुखद खबर सामने आई है। मुंबई के रहने वाले भारतीय नाविक देवनंदन प्रसाद सिंह की मौत एक तेल टैंकर पर हुए हमले में हो गई। बताया जा रहा है कि यह हमला इराक के बसरा के पास खोर अल ज़ुबैर बंदरगाह के नजदीक हुआ, जहां MT Safesea Vishnu नाम के तेल टैंकर पर ईरानी हमले की खबर सामने आई। इस घटना के बाद न सिर्फ समुद्री सुरक्षा पर सवाल उठे हैं, बल्कि परिवार ने कंपनी पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि सिंह को युद्ध के खतरे के बावजूद जहाज पर ड्यूटी करने के लिए मजबूर किया गया था।

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कौन थे देवनंदन प्रसाद सिंह और कैसे हुई उनकी मौत?

मुंबई के कांदीवली इलाके के रहने वाले 54 वर्षीय देवनंदन प्रसाद सिंह लंबे समय से जहाजरानी क्षेत्र से जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब 25 साल तक जहाजों के इंजीनियरिंग विभाग में काम किया था। हालांकि पिछले सात साल से वह समुद्र में काम छोड़कर शोर ड्यूटी (ऑफिस या जमीन पर काम) कर रहे थे। लेकिन अचानक उन्हें फिर से जहाज पर भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि वह MT Safesea Vishnu तेल टैंकर पर अतिरिक्त मुख्य अभियंता (Additional Chief Engineer) के रूप में काम कर रहे थे। इसी दौरान जहाज पर हमला हुआ और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई। इस घटना की पुष्टि भारत सरकार के बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के तहत जहाजरानी महानिदेशक (Directorate General of Shipping) ने भी की है।

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क्या युद्ध शुरू होने से ठीक पहले जहाज पर भेजे गए थे सिंह?

परिवार का आरोप है कि कंपनी ने उन्हें युद्ध शुरू होने से सिर्फ तीन दिन पहले जहाज पर लौटने के लिए मजबूर किया। परिजनों के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया था। इसके बाद मिडिल ईस्ट में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। इसके बावजूद कंपनी ने उन्हें ड्यूटी के लिए वापस बुला लिया। परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, सिंह ने कंपनी के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट (Agreement) साइन किया था, जिसके कारण उन्हें नियमों के तहत जहाज पर जाना पड़ा। परिवार का कहना है कि अगर वह पहले से शोर ड्यूटी पर थे, तो उन्हें युद्ध जैसे खतरनाक हालात में जहाज पर नहीं भेजा जाना चाहिए था।

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हमले के बाद बाकी क्रू को कैसे बचाया गया?

हमले के बाद जहाज पर मौजूद बाकी क्रू ने तुरंत जहाज छोड़ दिया। कई लोग समुद्र में कूद गए, जिसके बाद एक STS टगबोट की मदद से उन्हें बचाया गया। बाद में इराकी कोस्ट गार्ड ने सभी क्रू सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया। जहाज पर कुल 28 लोग मौजूद थे, जिनमें 16 भारतीय और 12 फिलिपिनो नागरिक शामिल थे। सभी को सुरक्षित बसरा बंदरगाह पहुंचा दिया गया।

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क्या इस घटना की जांच होगी?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस हमले की जानकारी संबंधित समुद्री एजेंसियों और अधिकारियों को दे दी गई है। फिलहाल हमले के कारणों और परिस्थितियों की जांच की जा रही है। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और भारतीय नाविकों पर भी पड़ रहा है।

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