US-Israel Strike: खामेनेई की मौत के बाद रो पड़े TV एंकर, IRGC बोला-सबसे खतरनाक ऑपरेशन अब शुरू! WATCH

Published : Mar 01, 2026, 10:13 AM IST
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सार

अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद ईरान टीवी पर एंकर रो पड़े। IRGC ने US-इज़राइल अटैक के खिलाफ़ ‘सबसे खतरनाक ऑपरेशन’ की चेतावनी दी। 40 दिन का शोक घोषित, क्या मिडिल ईस्ट वॉर शुरू होने वाला है, या यह ग्लोबल पावर गेम का नया मोड़ है?

Ali Khamenei Death Iran TV Anchor Crying: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की को लेकर हालात अचानक बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरानी मीडिया Press TV ने दावा किया कि US-Israel Attack में अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए। यह खबर जैसे ही स्टेट टीवी पर पढ़ी गई, लाइव प्रसारण के दौरान एंकर रो पड़े। एक एंकर ने गुस्से में कहा-“ट्रंप को ऐसी कीमत चुकानी पड़ेगी जो किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं चुकाई होगी… बदला आ रहा है!”

 

 

क्या US-Israel ऑपरेशन के बाद ईरान ने ‘सबसे खतरनाक’ जवाब की तैयारी कर ली?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को US-इज़राइल के संयुक्त हमले (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी/लायन्स रोअर) के बाद यह घटनाक्रम तेज हुआ। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने टेलीग्राम पर पोस्ट कर कहा कि “इतिहास का सबसे खतरनाक अटैकिंग ऑपरेशन किसी भी पल शुरू हो सकता है।” यह बयान संकेत देता है कि जवाबी कार्रवाई बड़े पैमाने पर हो सकती है—मिसाइल, ड्रोन या क्षेत्रीय ठिकानों पर हमले।

 

 

‘बदला आ रहा है’-लाइव टीवी पर एंकर क्यों फूट पड़े?

स्टेट टीवी पर घोषणा के दौरान एंकर भावुक हो गए। एक एंकर ने कहा-“बदला आ रहा है!” इस तरह की भाषा बताती है कि घटना को केवल सैन्य हमले के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और धार्मिक अपमान के रूप में पेश किया जा रहा है। इससे देश में एकजुटता बढ़ सकती है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ेगा।

 

 

40 दिन का पब्लिक शोक: शिया परंपरा में क्या है ‘अरबईन’ का महत्व?

रॉयटर्स के हवाले से बताया गया कि ईरान ने 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। शिया इस्लाम में मौत के 40वें दिन ‘अरबईन’ का खास धार्मिक महत्व होता है। सरकारी इमारतों पर झंडे आधे झुके रहेंगे और श्रद्धांजलि सभाएँ होंगी। इसे 1989 से शुरू हुए एक लंबे अध्याय के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

 

 

सत्ता का सवाल: अगला सुप्रीम लीडर कौन?

1989 से देश का नेतृत्व करने वाले खामेनेई, क्रांति के संस्थापक रूहोल्लाह खोमैनी के वारिस थे। अब सबसे बड़ा प्रश्न है-उत्तराधिकारी कौन होगा? प्रक्रिया के तहत धार्मिक निकाय नेतृत्व चुनता है, लेकिन युद्ध जैसे हालात में बैठक और सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। चर्चा यह भी है कि भविष्य में ताकत किसके हाथ में अधिक होगी-मौलवी वर्ग या रिवोल्यूशनरी गार्ड?

 

 

क्या अशांति बढ़ेगी? सुरक्षा क्यों कड़ी की गई?

तेहरान समेत बड़े शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आशंका है कि भावनात्मक माहौल और बाहरी खतरे मिलकर अशांति को जन्म दे सकते हैं। सरकार का फोकस दो चीज़ों पर है-आंतरिक स्थिरता और बाहरी जवाब।

क्या मिडिल ईस्ट नई आग की तरफ बढ़ रहा है?

खामेनेई की मौत की पुष्टि और “सबसे खतरनाक ऑपरेशन” की चेतावनी ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। 40 दिन का शोक, बदले की कसम और उत्तराधिकारी पर सस्पेंस-ये तीनों संकेत बताते हैं कि आने वाले हफ्ते निर्णायक हो सकते हैं।

 

 

 

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