Iran-US Tension के बीच ईरान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के जरिए अमेरिका को संदेश दिया है। तेहरान ने भरोसा बहाली के लिए 7 कड़ी शर्तें रखी हैं। जानिए ईरान की प्रमुख मांगें, तेल प्रतिबंध, बंदरगाहों की नाकेबंदी और बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावनाएं।
Iran-US Tension: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बावजूद भरोसे का संकट बना हुआ है। ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वाशिंगटन को उसकी सात शर्तें पूरी करनी होंगी, तभी बातचीत आगे बढ़ सकती है। यह संदेश पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के जरिए पहुंचाया गया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) का उल्लंघन किया और लगातार धमकियां दीं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इन शर्तों के जरिए पश्चिम एशिया में तनाव कम करने का रास्ता निकल पाएगा।
Iran-US Conflict: आसिम मुनीर के ईरान दौरे में क्या हुआ?
पाकिस्तान क्षेत्र में तनाव कम कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। इसी सिलसिले में सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने मंगलवार को तेहरान का दौरा किया।
ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने मुनीर से मुलाकात की।
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी भी इस बैठक में मौजूद थे।
मुनीर ने ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ से भी बातचीत की।
ग़ालिबाफ़ अप्रैल में अमेरिका के साथ हुई वार्ता में ईरान की ओर से प्रमुख वार्ताकार थे। उस बातचीत में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
Iran's 7 Conditions: अमेरिका से क्या चाहता है तेहरान?
प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ग़ालिबाफ़ ने कहा कि अमेरिका की ओर से इस्लामाबाद MoU का उल्लंघन और बार-बार मिल रही धमकियों ने ईरान का भरोसा कमजोर किया है। उन्होंने साफ किया कि दबाव से तेहरान के रणनीतिक फैसले नहीं बदलेंगे।
Iran-US Tension: अमेरिका के सामने ईरान की 7 शर्तें क्या हैं?
ईरान ने अमेरिका के सामने युद्ध समाप्त करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए कई मांगें रखी हैं। ईरान के सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई के बयानों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सार्वजनिक रूप से सामने आई प्रमुख शर्तें ये हैं:
1. सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो: ईरान चाहता है कि पश्चिम एशिया में सभी मोर्चों पर सैन्य संघर्ष रोका जाए। इसमें लेबनान समेत क्षेत्र के अन्य हिस्से भी शामिल हैं।
2. ईरानी बंदरगाहों से नाकेबंदी हटाना: अमेरिका द्वारा ईरान के प्रमुख समुद्री बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी को तुरंत और पूरी तरह से खत्म किया जाए।
3. तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों की समाप्ति: ईरान के कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय निर्यात पर लगे सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाया जाए।
4. विदेशों में जमा ईरान की संपत्ति जारी हो: ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों और धनराशि को जारी करने की मांग भी रिपोर्टों में सामने आई है।
5. संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान: ईरान के आंतरिक मामलों और उसकी भौगोलिक सीमाओं में किसी भी तरह के अमेरिकी हस्तक्षेप पर पूर्ण विराम लगे।
6. पूर्व समझौतों (MoU) का कड़ाई से पालन: वाशिंगटन 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' सहित पहले तय हुए सभी द्विपक्षीय व अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समझौतों का सम्मान करे।
7. भविष्य में एकतरफा प्रतिबंध न लगाने की गारंटी: अमेरिका की ओर से कानूनी गारंटी दी जाए कि वह भविष्य में एकतरफा और अवैध प्रतिबंध लागू नहीं करेगा।
Major General Rezaei, Secretary of Iran's SNSC, in a meeting with Asim Munir, Pakistan's Army Chief:
"Not a single particle of Iran's enriched nuclear material will ever leave the country." https://t.co/Pw60TOH0uZ
— IRIB (Islamic Republic of Iran Broadcasting) (@iribnews_irib) October 20, 2026
Strait of Hormuz: छह दिन में खुल सकता है जलडमरूमध्य?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पहले कहा था कि अगर अमेरिका शर्तें मान लेता है, तो जलडमरूमध्य छह दिनों के भीतर दोबारा खोला जा सकता है। उनके मुताबिक, सातवें दिन बातचीत फिर शुरू हो सकती है।
यह प्रस्ताव क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम है, लेकिन इसका आगे बढ़ना अमेरिका की प्रतिक्रिया और दोनों पक्षों के बीच सहमति पर निर्भर करेगा।
Islamabad MoU: अमेरिका-ईरान समझौता क्यों टूटा?
अमेरिका और ईरान ने जून में पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विवादों पर बातचीत आगे बढ़ाने के लिए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
मूल रिपोर्ट के मुताबिक, यह समझौता 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद हुआ था, जो 8 अप्रैल तक चला।
उस दौरान युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन बाद में समझौता टूट गया।
ईरान अब समझौते के उल्लंघन और अमेरिकी धमकियों को भरोसे में आई कमी की वजह बता रहा है।
Pakistan Mediation: मुनीर का पांचवां ईरान दौरा
फरवरी में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद आसिम मुनीर का यह पांचवां ईरान दौरा बताया गया है। उनकी यात्रा रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के तेहरान पहुंचने के एक दिन बाद हुई। लावरोव ने भी ईरानी नेताओं से मुलाकात की और लेबनान, फिलिस्तीन, यूक्रेन तथा यमन समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।
अब सवाल यह है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू करा पाएगी या नहीं। फिलहाल, ईरान की शर्तें और वाशिंगटन का रुख आगे की दिशा तय करने में अहम होंगे।
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