
Iran vs US War: दुनिया को लगा था कि 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' (Operation Epic Fury) शुरू होते ही खत्म हो जाएगा। अमेरिका और इजरायल ने जब ईरान के बड़े नेताओं और सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों की बौछार की, तो लगा कि बस अब गेम ओवर है। लेकिन आज 22 दिन बीत चुके हैं और यह 'क्विक स्ट्राइक' अब एक अंतहीन युद्ध में बदल चुका है। शनिवार को ईरान ने 4000 किलोमीटर दूर हिंद महासागर में अमेरिकी बेस 'डिएगो गार्सिया' पर हमला करने की कोशिश की। अमेरिका ने मिसाइल को बीच रास्ते में ही मार गिराया, लेकिन ईरान ने अपना मकसद पूरा कर लिया। उसने दिखा दिया कि कोई भी अमेरिकी ठिकाना उसकी पहुंच से बाहर नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दुनिया के सबसे पावरफुल देश यूएस से कहां चूक हुई? क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इरादों को हल्के में ले लिया? आइए समझते हैं वो 10 बड़ी गलतियां, जिन्होंने इस पूरी जंग का पासा पलट दिया।
अमेरिका का प्लान था- 'आओ, मारो और निकलो'। उन्हें लगा कि एक जोरदार हमले से ईरान घुटने टेक देगा, लेकिन ईरान ने इस वार को झेला और तुरंत खुद को संभाल लिया। नतीजा? जो जंग 2-3 दिन में खत्म होनी थी, वो अब तक खिंची है।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामनेई और कई बड़े कमांडरों को निशाना बनाया गया। वॉशिंगटन को लगा कि इससे ईरान में भगदड़ मच जाएगी। पर हुआ उल्टा, ईरान ने तुरंत नए चेहरे सामने कर दिए और उनका कमांड सिस्टम पहले की तरह काम करता रहा।
अमेरिकी एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान इतनी जल्दी और इतने बड़े स्तर पर जवाब देगा, इसका अंदाजा व्हाइट हाउस को नहीं था। ईरान ने न सिर्फ डिफेंस किया, बल्कि ड्रोन और मिसाइलों से अमेरिकी ठिकानों को ढूंढ-ढूंढ कर निशाना बनाना शुरू कर दिया।
हैरानी की बात है कि हमले के बाद जो बवाल मचने वाला था, उसके लिए अमेरिका पूरी तरह तैयार नहीं था। एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने और अपने नागरिकों को निकालने में जो देरी हुई, उसने अमेरिका की पोल खोल दी।
शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने कहा कि तेल की कीमतों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन जैसे ही ईरान ने होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में जहाजों को धमकाना शुरू किया, ग्लोबल मार्केट में हड़कंप मच गया। आज पूरी दुनिया महंगाई के डर से कांप रही है।
अमेरिकी सीनेटरों ने खुद माना कि सरकार के पास इस बात का कोई ठोस प्लान (Plan B) नहीं था कि अगर ईरान रास्ता बंद कर दे, तो उसे दोबारा कैसे खोला जाएगा। बिना किसी 'एग्जिट प्लान' के युद्ध में कूदना भारी पड़ गया।
डोनाल्ड ट्रंप को लगा कि दबाव डालने पर ईरान सरेंडर कर देगा, लेकिन वे ईरान की 'साइकॉलजी' समझने में चूक गए। जब किसी को दीवार से सटा दिया जाता है, तो वह डरता नहीं बल्कि और ज्यादा खतरनाक तरीके से लड़ता है। ईरान ने भी यही किया।
पेंटागन के कुछ अधिकारियों को भरोसा था कि ईरान बहुत सीमित जवाब देगा। इसी 'ओवरकॉन्फिडेंस' की वजह से अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत उस समय तैनात नहीं की, जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।
युद्ध के बीच अमेरिका के बड़े नेताओं के बयानों में तालमेल नहीं दिखा। ट्रंप कह रहे थे कि काम 'पूरा' हो गया, जबकि उनके मंत्री कुछ और ही लक्ष्य बता रहे थे। इस कन्फ्यूजन का फायदा ईरान को मिला।
जो ऑपरेशन एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' की तरह शुरू हुआ था, वो अब एक ऐसे दलदल में बदल गया है जहां से निकलना मुश्किल हो रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि या तो यहां सबकी शांति होगी या फिर 'हमलावरों' की बर्बादी।
इसे भी पढ़ें- Iran Oil Crisis: ईरान युद्ध खत्म करने को ट्रंप तैयार...लेकिन सीजफायर से इनकार-क्या है स्ट्रैटजी?
इसे भी पढ़ें- ..तो क्या खत्म होगी ईरान की दादागीरी, नेतन्याहू ने मुस्लिम देशों के सामने रखा गजब प्लान
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।