
Jantar Mantar Protest Site Change: दिल्ली का जंतर-मंतर सिर्फ एक सड़क या धरना स्थल नहीं, बल्कि देश के कई बड़े आंदोलनों की यादों से जुड़ा नाम है। 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से लेकर कई राजनीतिक और सामाजिक विरोध प्रदर्शनों तक, इस जगह ने देश की आवाज को राष्ट्रीय मंच दिया। अब यहां प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव की खबर सामने आई है। दिल्ली पुलिस के एक आदेश के मुताबिक, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने और तीन वैकल्पिक स्थान तय करने की बात कही गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति ने नागरिकों को प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने के विकल्पों पर विचार किया था।
समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के आदेश में प्रदर्शन स्थलों में बदलाव का उल्लेख है। सुप्रीम कोर्ट ने भी विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थानों की व्यवस्था पर जोर दिया था। हालांकि, आदेश की सटीक भाषा और जंतर-मंतर से संबंधित बदलाव की प्रभावी तारीख की आधिकारिक दस्तावेज से पुष्टि जरूरी है।
Breaking – जंतर मंतर अब प्रदर्शन स्थल नहीं रहा। गृह मंत्रालय ने इसे प्रोटेस्ट साइट के रूप में डी–नोटिफाई किया। रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान शाहदरा को प्रोटेस्ट साइट को प्रोटेस्ट साइट बनाया। https://t.co/3vuBpaRkce
— Sachin Gupta (@Sachingupta) October 12, 2026
प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है।
इन जगहों पर धरना देने के लिए अनुमति, सुरक्षा और अन्य शर्तें लागू हो सकती हैं। संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और आधिकारिक निर्देशों से ही स्पष्ट होगा कि प्रदर्शनकारियों को किन नियमों का पालन करना होगा।
जंतर-मंतर 1993 के आसपास दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा। इससे पहले 1988 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में बोट क्लब क्षेत्र में बड़ा किसान आंदोलन हुआ था, जिसके बाद वहां प्रदर्शनों पर प्रतिबंध सख्त किए गए।
2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने जंतर-मंतर को देशव्यापी पहचान दिलाई। इसके बाद भी कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर यहां प्रदर्शन होते रहे। ऐसे में प्रदर्शन स्थलों में बदलाव की खबर केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि राजधानी में विरोध दर्ज कराने के लिए उपलब्ध सार्वजनिक जगहों की भूमिका आगे कैसी होगी।
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