
kaja kallas: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दुनिया में कोई भी कदम बिना किसी ठोस कारण या स्वार्थ के नहीं उठाया जाता। हाल ही में यूरोपीय संघ (ईयू) की शीर्ष राजनयिक और विदेश मामलों की प्रमुख काजा कलास के पाकिस्तान दौरे ने नई दिल्ली से लेकर ब्रुसेल्स तक एक बड़ी कूटनीतिक बहस छेड़ दी है। अचानक ऐसा क्या हुआ कि यूरोप को आतंकवाद के मुद्दे पर हमेशा कटघरे में रहने वाले पाकिस्तान की जरूरत महसूस होने लगी? एक तरफ जहां भारत के साथ यूरोप मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह पाकिस्तान के साथ अपने संबंध प्रगाढ़ कर रहा है।
1 जून 2026 को इस्लामाबाद में यूरोपीय संघ और पाकिस्तान के बीच आठवें दौर का रणनीतिक संवाद आयोजित किया गया। इस बैठक की सह-अध्यक्षता काजा कलास और पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार ने की। इस दौरान कलास ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से भी मुलाकात की। लेकिन इस दौरे ने तब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया, जब एक संयुक्त बयान में यूक्रेन युद्ध के साथ जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को जोड़ दिया गया।
यह भी पढ़ें: Claude AI vs ChatGPT: किस AI से कम मेहनत में हो सकती है ज्यादा कमाई?
यूरोप के पाकिस्तान की ओर झुकाव के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी अस्थिरता है। काजा कलास ने अपनी इस यात्रा के दौरान सार्वजनिक तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कराने के लिए पाकिस्तान के कूटनीतिक प्रयासों की जमकर तारीफ की।
वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखने और इस क्षेत्र में युद्धविराम को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान बैकचैनल वार्ता में अहम भूमिका निभा रहा है। काजा कलास ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ परमाणु भंडार और अन्य मुद्दों पर यूरोपीय संघ बातचीत के लिए तैयार है और वह किसी भी संभावित समझौते को स्थायी बनाने में अपनी बड़ी भूमिका देखता है। दरअसल, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यूरोपीय संघ खुद को ईरान वार्ता की मेज पर बनाए रखने के लिए पाकिस्तानी सेना और वहां के नेतृत्व को खुश करने की कोशिश कर रहा है। मध्य पूर्व की शांति और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं (विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार) को सुरक्षित रखने की मजबूरी ने यूरोप को पाकिस्तान के दरवाजे पर ला खड़ा किया है।
यूरोप और पाकिस्तान के बीच इस बातचीत का एक और बड़ा कारण 'जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस' (GSP+) है। पाकिस्तान अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए इस योजना के विस्तार पर जोर दे रहा है, जो उसे यूरोपीय बाजारों में ड्यूटी-फ्री (शुल्क मुक्त) पहुंच प्रदान करती है। काजा कलास ने इस दिशा में पाकिस्तान की गहरी रुचि को स्वीकार किया और आगे मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
अफगानिस्तान के हालात और वहां से होने वाले प्रवासन (migration) को लेकर भी यूरोप चिंतित है। यूरोपीय संघ पाकिस्तान के साथ आतंकवाद निरोधी सहयोग, मानव तस्करी रोकने और अफगानिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं पर व्यापक रूप से काम करना चाहता है। काजा कलास की मजबूरी यह भी है कि अगर पाकिस्तान में अस्थिरता बढ़ती है, तो यूरोप की ओर अवैध प्रवासियों का प्रवाह तेज हो सकता है, जिसे रोकने के लिए पाकिस्तान का सहयोग उनके लिए अनिवार्य है।
यह भी पढ़ें: पटना हॉस्टल में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत, आखिर उस रात कमरे के भीतर क्या हुआ था?
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।