“10 रुपये का डायपर लीक नहीं होता…” NEET पेपर लीक पर खान सर का फूटा गुस्सा

Published : May 12, 2026, 08:52 PM IST
Khan Sir Slams NTA Over NEET 2026 Paper Leak Calls It a Betrayal of Students Future

सार

Khan Sir On NEET Paper Leak: NEET 2026 पेपर लीक मामले पर खान सर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने NTA और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जानिए क्या बोले खान सर और क्यों मचा बवाल।

Khan Sir Viral Statement on NEET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG एक बार फिर विवादों के घेरे में है। पेपर लीक के आरोपों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। परीक्षा की तैयारी में सालों की मेहनत लगाने वाले छात्र अब सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच मशहूर शिक्षक और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय खान सर की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने पूरे मामले को लेकर बहस और तेज कर दी है।

खान सर ने इस मुद्दे को केवल परीक्षा में गड़बड़ी नहीं, बल्कि “लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़” बताया। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं छात्रों का आत्मविश्वास तोड़ रही हैं और देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

“2024 में भी हुआ था पेपर लीक, फिर क्यों नहीं सुधरी व्यवस्था?”

खान सर ने कहा कि सबसे दुखद बात यह है कि 2024 में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। उस समय जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं, सीबीआई जांच भी हुई, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उनके मुताबिक जब दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो ऐसे गिरोहों का मनोबल और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा, “जब 2024 में कार्रवाई का असर नहीं दिखा, तो जाहिर है कि सिस्टम को कमजोर समझकर फिर वही खेल खेला गया। इसका सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों को होता है जो ईमानदारी से मेहनत करते हैं।”

 

 

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“सरकारी एजेंसियों को नहीं, बच्चों को पता चला पेपर लीक हुआ”

खान सर ने व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस मामले की जानकारी किसी जांच एजेंसी ने नहीं दी, बल्कि छात्रों ने खुद सरकार तक यह बात पहुंचाई कि पेपर लीक हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन एजेंसियों को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें पहले से इस तरह की गतिविधियों का पता क्यों नहीं चल पाया।

उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “समझ नहीं आता कि एजेंसी को परीक्षा कराने के लिए रखा गया है या पेपर लीक कराने के लिए। NTA का नाम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी नहीं, बल्कि ‘नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी’ होना चाहिए।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और छात्र भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

“10 रुपये का डायपर लीक नहीं होता, लेकिन पेपर लीक हो जाता है”

खान सर ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए एक बेहद तीखी टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा, “दस रुपये में बच्चों का जो डायपर आता है वो लीक नहीं होता, लेकिन इनका पेपर लीक हो जाता है।” उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। कई छात्र और अभिभावक इसे शिक्षा व्यवस्था पर एक करारा तंज मान रहे हैं।

“सीबीआई जांच से सालों निकल जाएंगे”

खान सर ने सीबीआई जांच पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि अगर यह मामला सिर्फ लंबी जांच प्रक्रियाओं में उलझा रहा, तो छात्रों का करियर प्रभावित होगा। उन्होंने कहा, “अगर यह मामला सीबीआई के पास गया तो बच्चों का MBBS पूरा हो जाएगा, लेकिन जांच खत्म नहीं होगी। इसलिए इस पूरे मामले की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर जज को करनी चाहिए।” उन्होंने सुझाव दिया कि एक तय समयसीमा के भीतर दोषियों की पहचान कर सख्त सजा दी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

“प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट को सीधे दखल देना चाहिए”

खान सर ने कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की राष्ट्रीय छवि से जुड़ा मामला बन चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट से व्यक्तिगत स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना था कि पेपर लीक जैसे मामलों से मेहनती छात्रों का मनोबल टूटता है, जबकि पैसे और पहुंच वाले लोगों के लिए गलत रास्ते खुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में और भी बड़े विवाद सामने आ सकते हैं।

“पेपर लीक के बाद छात्रों से दुश्मनी निकालती हैं एजेंसियां”

खान सर ने पिछले वर्षों के उदाहरण देते हुए कहा कि अक्सर पेपर लीक के बाद अगली परीक्षा बेहद कठिन बना दी जाती है, जिसका नुकसान आम छात्रों को उठाना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि 2024 में NEET पेपर लीक के बाद अगला पेपर इतना कठिन बनाया गया कि छात्रों की हालत खराब हो गई। इसी तरह उन्होंने 1997 के IIT-JEE पेपर लीक का उदाहरण देते हुए कहा कि उसके बाद परीक्षा का स्तर अचानक बहुत कठिन कर दिया गया था।

छात्रों के मन में बढ़ रहा असुरक्षा का भाव

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। NEET जैसी परीक्षा केवल एक एंट्रेंस टेस्ट नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के करियर और सपनों से जुड़ी होती है। ऐसे में अगर परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर होता है, तो इसका असर केवल छात्रों पर नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर पड़ता है। अब सभी की नजर सरकार, जांच एजेंसियों और न्यायपालिका पर टिकी है कि इस बार क्या कार्रवाई होती है और क्या वास्तव में दोषियों तक पहुंचा जा सकेगा।

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