India China Pakistan Conflict: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत ने चीन-पाकिस्तान गठजोड़ पर बड़ा हमला बोला है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन ने संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी मदद दी। जानिए पूरा मामला और भारत का कड़ा रुख।

भारत ने एक बार फिर साफ संकेत दे दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर वह किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर विदेश मंत्रालय ने चीन और पाकिस्तान के कथित गठजोड़ पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने उन रिपोर्टों का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया, जिनमें दावा किया गया था कि मई 2025 के संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान को तकनीकी और रणनीतिक सहायता दी थी।

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भारत ने दो टूक कहा है कि जो देश खुद को “जिम्मेदार वैश्विक शक्ति” बताते हैं, उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में किसी एक पक्ष का समर्थन उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि और विश्वसनीयता पर कितना असर डाल सकता है।

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‘ऑपरेशन सिंदूर’ था आतंकवाद के खिलाफ जवाब

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने जो कार्रवाई की, वह किसी आवेश में लिया गया कदम नहीं था, बल्कि एक सोच-समझकर किया गया सटीक ऑपरेशन था। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उद्देश्य पाकिस्तान से संचालित और उसके समर्थन से चल रहे आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। उन्होंने कहा, “हमने वे रिपोर्टें देखी हैं जो पहले से सामने आ रही आशंकाओं की पुष्टि करती हैं। ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया एक लक्षित अभियान था, जिसका मकसद राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के नेटवर्क को खत्म करना था।”

चीन ने पाकिस्तान की मदद की बात मानी?

दरअसल यह पूरा विवाद उस समय और गहरा गया जब चीनी मीडिया में प्रकाशित एक इंटरव्यू में एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) के इंजीनियर झांग हेंग ने संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता देने की बात स्वीकार की। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक झांग हेंग ने दावा किया कि वह उस टीम का हिस्सा थे जिसे युद्ध के दौरान पाकिस्तान की सहायता के लिए तैनात किया गया था। उन्होंने कहा कि सपोर्ट बेस पर लगातार लड़ाकू विमानों की आवाजें और एयर रेड सायरन सुनाई देते थे। उन्होंने यह भी बताया कि मई की भीषण गर्मी में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। इस बयान के सामने आने के बाद भारत ने चीन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

भारत पहले भी जता चुका है चिंता

यह पहली बार नहीं है जब भारत ने चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य नजदीकियों पर चिंता जताई हो। इससे पहले भी भारतीय अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि चीन ने संवेदनशील सैन्य जानकारी पाकिस्तान के साथ साझा की थी। जुलाई 2025 में लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने पाकिस्तान को “चीनी सेना की लाइव लैब” तक बता दिया था। उनका कहना था कि चीन पाकिस्तान के जरिए आधुनिक युद्ध तकनीकों और रणनीतियों का परीक्षण कर रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग की हालिया रिपोर्ट में भी यह दावा किया गया था कि चीन ने पाकिस्तान को सूचना युद्ध, साइबर ऑपरेशन, खुफिया सहयोग और कूटनीतिक समर्थन के जरिए मदद पहुंचाई।

भारत का संदेश साफ

विदेश मंत्रालय की इस प्रतिक्रिया को केवल एक बयान नहीं, बल्कि एक कड़ा कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है। भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद और सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर वह किसी भी तरह के बाहरी समर्थन या हस्तक्षेप को गंभीरता से देखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब वैश्विक मंचों पर चीन-पाकिस्तान सहयोग को अधिक आक्रामक तरीके से उठाने की रणनीति अपना सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।

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