स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करके भारत पहुंचा पहला LNG कैरियर 'दिशा'-देखें VIDEO

Published : Jun 19, 2026, 11:28 AM IST
lng carrier disha crosses strait of hormuz reaches dahej india energy supply gas crisis

सार

क्या होर्मुज के संकट के बीच LNG कैरियर दिशा का सुरक्षित पहुंचना भारत के लिए बड़ी राहत है? क्या पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा अब टल गया है? क्या 62,370 मीट्रिक टन LNG लेकर आया यह जहाज समुद्री सुरक्षा में नया भरोसा जगाएगा? क्या अमेरिका-ईरान समझौते से होर्मुज मार्ग फिर से वैश्विक व्यापार के लिए सुरक्षित हो पाएगा?

LNG Carrier Disha Reaches Dahej: पश्चिम एशिया में जारी भयानक युद्ध और बारूद की गूंज के बीच भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बेहद राहत भरी लेकिन सांसें थाम देने वाली खबर सामने आई है। लगभग साढ़े तीन महीने से भी अधिक समय से बंद पड़े दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते से गुजरकर पहला भारतीय कमर्शियल जहाज सुरक्षित भारत की धरती पर लौट आया है। माल्टा के झंडे वाला विशालकाय लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) कैरियर 'दिशा' (LNGC Disha) सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार करने के बाद गुजरात के दहेज बंदरगाह पर पहुँच चुका है। इस जहाज की वापसी महज़ एक व्यापारिक घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपी है अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति, युद्धविराम का सस्पेंस और करोड़ों भारतीयों के घरों में जलने वाले चूल्हे की सुरक्षा।

जब थम गई थीं भारत की सांसें: कतर का वो 'फोर्स मेज्योर' और बंद हुआ समंदर

इस पूरे सस्पेंस की शुरुआत इस साल 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर अचानक सैन्य हमले कर दिए थे। इसके जवाब में बौखलाए तेहरान ने दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री लाइफलाइन कहे जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को व्यावहारिक रूप से बंद कर दिया। यह रास्ता बंद होते ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में हाहाकार मच गया।

भारत अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग आधी मांग को पूरा करने के लिए विदेशी आयात पर निर्भर है, जिसका लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा कतर जैसे खाड़ी देशों से इसी रास्ते से होकर आता है। रास्ता बंद होते ही कतर ने भारत सहित कई वैश्विक खरीदारों को LNG शिपमेंट देने से हाथ खड़े कर दिए और 'फोर्स मेज्योर' (अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण अनुबंध पूरा न कर पाना) लागू कर दिया। भारत के सामने अचानक एक बहुत बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था, क्योंकि गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच चुकी थी।

 

 

मौत के मुहाने से गुजरा 62,000 टन बारूद: पेट्रोनेट जेटी पर हाई-अलर्ट

कड़े तनाव और अनिश्चितता के बीच, 15 जून को LNG कैरियर 'दिशा' ने उस संकरे और युद्ध प्रभावित शिपिंग रास्ते में प्रवेश किया जहाँ किसी भी वक्त मिसाइल या ड्रोन हमला होने का खतरा था। इस जहाज पर 62,370 मीट्रिक टन अत्यधिक ज्वलनशील लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) लदी हुई थी, जो किसी बड़े धमाके की सूरत में जलते हुए तबाही के गोले में तब्दील हो सकती थी। शुक्रवार की सुबह जब इस जहाज ने गुजरात के भरूच पोर्ट अथॉरिटी के अंतर्गत आने वाले दहेज बंदरगाह पर लंगर डाला, तब जाकर अधिकारियों ने राहत की सांस ली। गुजरात पोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, जहाज को तुरंत पेट्रोनेट LNG जेटी पर खड़ा किया गया और सुरक्षा जांच शुरू की गई।

ट्रंप-मोदी की सीक्रेट टॉक: कैसे फ्रांस की धरती से खुला बंद समंदर का ताला?

इस खतरनाक मिशन की सफलता के पीछे एक बहुत बड़ी और गोपनीय कूटनीतिक जीत छिपी हुई है। दरअसल, यह जहाज इस रास्ते से तब गुजर सका जब अमेरिका और ईरान के बीच एक शुरुआती युद्धविराम समझौते की घोषणा हुई। समझौते के तहत तेहरान ने 60 दिनों के लिए इस समुद्री रास्ते से बिना किसी टोल के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी और बदले में अमेरिकी सेना ने अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को हटा लिया।

 

 

इस युद्धविराम के ठीक पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में आयोजित G7 समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक बेहद अहम द्विपक्षीय बैठक की थी। इस बैठक में पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्र में नेविगेशन की आज़ादी और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा बेहद आक्रामक तरीके से उठाया था। मोदी और ट्रंप की इसी केमिस्ट्री का नतीजा था कि 'दिशा' को सुरक्षित रास्ता मिल सका।

आगे क्या? 60 दिनों की मोहलत और भारत का अगला कदम

बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने गुरुवार को ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि 'दिशा' शुक्रवार सुबह दहेज पहुंच जाएगा, और ठीक वैसा ही हुआ। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा प्रबंधित यह जहाज अब भारत के लिए एक नई उम्मीद बन चुका है।

मुख्य बिंदु (Key Metrics)विवरण (Details)
जहाज का नाम व ध्वजLNGC 'दिशा' (माल्टा का झंडा)
कुल कार्गो क्षमता62,370 मीट्रिक टन LNG
गैस आपूर्ति का स्रोतखाड़ी देश (कतर आदि)
रास्ते का संकटईरान-US युद्ध के कारण साढ़े 3 महीने से बंद

हालांकि, ईरान द्वारा दी गई 60 दिनों की यह मोहलत कब खत्म हो जाए या कब दोनों देशों के बीच दोबारा ठन जाए, यह कोई नहीं जानता। भारत के लिए यह 60 दिन बेहद कीमती हैं, जिनमें उसे अपनी गैस की कमी को पूरा करना होगा। क्या भारत इस समय सीमा के भीतर अपने सभी जहाजों को सुरक्षित निकाल पाएगा, या पश्चिम एशिया का यह बारूद दोबारा सुलग उठेगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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