
Lucknow Metro Latest Update: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार अब शहर की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के बाद अब लखनऊ मेट्रो का नया ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर शहर के विकास की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। सोमवार को योगी आदित्यनाथ कैबिनेट की बैठक में लखनऊ मेट्रो फेज-1B को मंजूरी मिलने की संभावना है। अगर इस परियोजना को हरी झंडी मिलती है, तो यह सिर्फ एक मेट्रो लाइन नहीं होगी, बल्कि पुराने और नए लखनऊ के बीच तेज, सुरक्षित और आधुनिक कनेक्टिविटी का नया अध्याय साबित होगी।
पुराने लखनऊ की तंग गलियां, रोज लगने वाला जाम, अस्पतालों तक पहुंचने में लगने वाला लंबा समय और बाजारों में घंटों की भीड़ अब धीरे-धीरे बीते दौर की बात हो सकती है। यह नया कॉरिडोर खासतौर पर उन इलाकों को राहत देगा, जहां सड़क परिवहन व्यवस्था वर्षों से दबाव झेल रही है।
लखनऊ मेट्रो का प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर करीब 11.16 किलोमीटर लंबा होगा। इस रूट पर कुल 12 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें 7 स्टेशन भूमिगत और 5 एलिवेटेड होंगे। पुराने शहर की घनी आबादी और ऐतिहासिक धरोहरों को देखते हुए परियोजना का बड़ा हिस्सा अंडरग्राउंड रखा गया है, ताकि निर्माण कार्य से पुराने इलाकों को नुकसान न पहुंचे। यह मेट्रो लाइन चारबाग से शुरू होकर वसंत कुंज तक जाएगी। रास्ते में कई महत्वपूर्ण बाजार, रेलवे स्टेशन और मेडिकल संस्थान सीधे मेट्रो नेटवर्क से जुड़ेंगे।
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प्रस्तावित रूट के तहत मेट्रो के स्टेशन इन प्रमुख इलाकों में बनाए जाएंगे:
हैदर रोड तक के शुरुआती सात स्टेशन भूमिगत होंगे। इससे शहर के संवेदनशील और व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था पर कम असर पड़ेगा।
यह नया कॉरिडोर स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। King George's Medical University, बलरामपुर अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचने वाले मरीजों और तीमारदारों को अब ट्रैफिक जाम में फंसने से राहत मिल सकती है।
पुराने लखनऊ के जिन इलाकों में एंबुलेंस तक समय पर नहीं पहुंच पाती, वहां मेट्रो एक तेज विकल्प बनकर सामने आएगी। मेडिकल कॉलेज, चौक, अमीनाबाद और ठाकुरगंज जैसे क्षेत्रों में रोजाना लाखों लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में मेट्रो नेटवर्क स्थानीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेगा।
Charbagh Railway Station इस नए प्रोजेक्ट का सबसे अहम केंद्र होगा। यहां मौजूदा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर और नया ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर आपस में जुड़ेंगे। यात्रियों को दूसरी लाइन पकड़ने के लिए स्टेशन से बाहर नहीं निकलना पड़ेगा। परिवहन विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मॉडल दिल्ली के Rajiv Chowk Metro Station की तरह विकसित किया जाएगा, जहां हर दिन लाखों यात्री आसानी से लाइन बदलते हैं। इससे लखनऊ में भी मेट्रो यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी।
Uttar Pradesh Metro Rail Corporation ने इस परियोजना की संशोधित डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की है। पहले प्रस्तावित रूट में बदलाव किए गए, ताकि अधिक आबादी वाले क्षेत्रों और ट्रैफिक प्रभावित इलाकों को बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके।
UPMRC के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार के अनुसार, प्री-सिविल कंस्ट्रक्शन कार्यों में तेजी लाई जा रही है। बिजली के खंभे, तार और अन्य अवरोधों को हटाने का काम शुरू हो चुका है। सरकार का दावा है कि यह परियोजना राजधानी के ट्रैफिक प्रबंधन को नई दिशा देगी।
राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को केंद्र सरकार के शहरी आवास एवं विकास मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। इसके बाद पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) की स्वीकृति ली जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, परियोजना के लिए यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक जैसी विदेशी फंडिंग एजेंसियों से भी बातचीत चल रही है, ताकि निर्माण कार्य में वित्तीय बाधा न आए और प्रोजेक्ट तय समय में पूरा हो सके।
राजधानी में आने वाले वर्षों में मेट्रो नेटवर्क को और विस्तारित करने की तैयारी है। प्रस्तावित विस्तार योजनाओं में शामिल हैं:
इन योजनाओं का मकसद राजधानी के तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार को भविष्य के हिसाब से तैयार करना है।
मेट्रो विस्तार के साथ-साथ योगी सरकार लखनऊ और आसपास के जिलों को जोड़ने के लिए आर्बिटल रेल नेटवर्क पर भी काम कर रही है। यह परियोजना लखनऊ, कानपुर, उन्नाव और बाराबंकी समेत छह जिलों को जोड़ेगी। करीब 170 किलोमीटर लंबे इस नेटवर्क के लिए केंद्र सरकार 7500 करोड़ रुपये की मंजूरी दे चुकी है। इसमें पिपरसंड, अमौसी, आलमनगर, ट्रांसपोर्टनगर, उतरेटिया, मोहनलालगंज, मलिहाबाद और इटौंजा जैसे रेलवे स्टेशनों को जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2031 तक इस परियोजना को पूरा करने का है।
लखनऊ का पुराना हिस्सा लंबे समय से ट्रैफिक, अव्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन और बढ़ती आबादी के दबाव से जूझ रहा है। ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर शुरू होने के बाद चारबाग से अमीनाबाद, चौक, मेडिकल कॉलेज और ठाकुरगंज जैसे इलाकों तक पहुंच आसान हो जाएगी।
लोगों का मानना है, कि यह परियोजना सिर्फ यात्रा का समय कम नहीं करेगी, बल्कि पुराने लखनऊ की आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगी। बाजारों में पहुंच आसान होगी, मेडिकल सुविधाएं तेज होंगी और निजी वाहनों पर निर्भरता कम होने से प्रदूषण पर भी असर पड़ेगा। राजधानी के लिए यह परियोजना आने वाले वर्षों में शहरी विकास का सबसे बड़ा आधार बन सकती है।
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